गगनयान मिशन जल्द होगा टेस्ट फ्लाइट के लिए तैयार, ISRO ने दी जानकारी

गगनयान मिशन की सफलता के साथ भारत ऐसे चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने ह्युमन स्पेस फ्लाइट को खुद डिवेलप किया है

गगनयान मिशन जल्द होगा टेस्ट फ्लाइट के लिए तैयार, ISRO ने दी जानकारी

भारत की योजना अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की भी है

ख़ास बातें
  • गगनयान मिशन का लॉन्च 2027 में किया जाना है
  • इससे पहले ISRO बिना क्रू वाली तीन टेस्ट फ्लाइट को भेजेगा
  • भारत की योजना अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की भी है
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देश की पहली ह्युमन स्पेस फ्लाइट के लिए लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। गगनयान मिशन का लॉन्च 2027 में किया जाना है। इससे पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को बिना क्रू वाली तीन टेस्ट फ्लाइट को पूरा करना होगा। इसके बाद इस फ्लाइट को ह्युमन्स के लिए तैयार घोषित किया जा सकेगा। 

गगनयान मिशन की सफलता के साथ भारत ऐसे चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने ह्युमन स्पेस फ्लाइट को खुद डिवेलप किया है। ISRO के चेयरमैन, V Narayanan ने बताया, "Gangyaan मिशन की प्रगति अच्छी चल रही है। मैं यह कह सकता हूं कि इसके डिवेलपमेंट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है।" नारायणन ने कहा कि भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में ले जाने का यह मिशन 2027 में लॉन्च किया जाएगा। 

इससे पहले ISRO बिना क्रू वाली तीन टेस्ट फ्लाइट को भेजेगा। इनमें से पहला बिना क्रू वाला मिशन ह्युमनॉइड Vyomitra के साथ इस वर्ष के अंत तक उड़ान भर सकता है। गगनयान मिशन की तैयारी को लेकर ISRO काफी सतर्कता बरत रहा है। इस मिशन के लॉन्च के साथ अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स को भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा। गगनयान मिशन में तीन एस्ट्रोनॉट्स के क्रू को 400 किलोमीटर के ऑर्बिट में तीन दिन के लिए भेजा जाएगा और इसके बाद उनकी समुद्र पर सुरक्षित वापसी होगी। भारत की योजना अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की भी है। इस स्टेशन का नाम "भारत अंतरिक्ष स्टेशन" होगा। इसकी स्थापना 2035 तक हो सकती है। 

हाल ही में ISRO ने अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के साथ मिलकर अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट NISAR का आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से सफल लॉन्च किया था।  NISAR (NASA-ISRO सिंथेटिक अपार्चर राडार सैटेलाइट) के ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसके डुअल-फ्रीक्वेंसी राडार एक दिन में धरती का 14 बार चक्कर लगाएंगे। इससे प्रत्येक 12 दिनों में धरती पर सभी जमीन और बर्फ की सतहों की स्कैनिंग की जाएगी। इस सैटेलाइट से मिले डेटा के जरिए वैज्ञानिकों को मिट्टी की नमी की निगरानी करने में आसानी होगी। इसके साथ ही भूस्खलन और बाढ़ जैसे खतरों का बेहतर तरीके से आकलन किया जा सकेगा। ISRO और NASA के बीच इस तरह का यह पहला कोलेब्रेशन है। 

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आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

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