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Technology - ख़बरें

  • भारत ने रचा एविएशन इतिहास! सैटेलाइट से होगी विमान की लैंडिंग, जानें क्या है ISRO का GAGAN सिस्टम
    भारत ने पहली बार किसी कमर्शियल जेट विमान की लैंडिंग स्वदेशी GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) सिस्टम की मदद से कराई है। IndiGo का Airbus A320 उदयपुर एयरपोर्ट पर बिना पारंपरिक ग्राउंड-बेस्ड Instrument Landing System (ILS) के सफलतापूर्वक उतरा। GAGAN को ISRO और Airports Authority of India (AAI) ने मिलकर विकसित किया है। यह GPS सिग्नल में आने वाली त्रुटियों को रियल टाइम में सुधारकर पायलट को अधिक सटीक नेविगेशन देता है। माना जा रहा है कि यह तकनीक भविष्य में छोटे एयरपोर्ट्स पर भी सुरक्षित और सटीक लैंडिंग को आसान बना सकती है।
  • कंक्रीट पर गिरने पर भी नहीं टूटेगा डिस्प्ले! इस नए फोन ने पास किए हैं मजबूती के 23 टेस्ट
    Fujitsu Connected Technologies Limited (FCNT) ने जापान में Arrows Alpha 2 स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह 23 MIL-STD मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी टेस्ट पास कर चुका है और इसमें IP66, IP68 व IP69 रेटिंग दी गई है। फोन में 6.4-इंच LTPO डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 8350 Extreme प्रोसेसर, 5370mAh सिलिकॉन-कार्बन बैटरी और 90W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा इसमें 50MP ट्रिपल कैमरा सेटअप, Google Gemini, arrows AI और 144Hz रिफ्रेश रेट जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।
  • वेनेजुएला भूकंप से पहले Google ने भेजा था अलर्ट! क्या आपके फोन में ऑन है ये फीचर?
    24 जून को वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि उनके Android फोन पर झटके महसूस होने से पहले ही Google का Earthquake Alert आ गया था। इसके बाद Android Earthquake Alerts System चर्चा में आ गया। यह सिस्टम Android फोन में मौजूद Accelerometer Sensor की मदद से शुरुआती कंपन का पता लगाता है। जब एक ही इलाके में कई फोन समान वाइब्रेशन रिकॉर्ड करते हैं, तो Google का सिस्टम उन्हें विश्लेषण कर संभावित भूकंप की पुष्टि करता है और प्रभावित यूजर्स को अलर्ट भेज देता है। भारत में यह सुविधा 2023 से उपलब्ध है।
  • EV दिग्गजों को टक्कर देने उतरी तेल बेचने वाली Shell! पेश की 10 मिनट से कम चार्ज होने वाली इलेक्ट्रिक कार
    Shell ने Triple 10 Challenge नाम का नया इलेक्ट्रिक कार कॉन्सेप्ट पेश किया है। कंपनी के मुताबिक, इसे भविष्य की इलेक्ट्रिक कारों के लिए नई डिजाइन और कूलिंग टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। Shell का दावा है कि यह कॉन्सेप्ट 175kW DC फास्ट चार्जर की मदद से 10% से 80% तक सिर्फ 9.54 मिनट में चार्ज हो सकता है। इसमें नया Recharge Thermal Fluid और सिंगल-सर्किट कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जो बैटरी और पावरट्रेन की थर्मल मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। फिलहाल कंपनी ने इसे केवल कॉन्सेप्ट मॉडल के तौर पर पेश किया है।
  • Bitcoin में बड़ी गिरावट, टेक्नोलॉजी शेयर्स में बिकवाली का पड़ा असर
    मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI और टेक्नोलॉजी शेयर्स में बिकवाली की वजह से रिस्क वाल एसेट्स से इनवेस्टर्स ने दूरी बनाई है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व के सतर्क रवैये और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से विड्रॉल का भी मार्केट के सेंटीमेंट पर असर पड़ा है। बिटकॉइन के लिए रेजिस्टेंस लगभग 64,200 डॉलर पर है। इस महीने के हाई लेवल से बिटकॉइन लगभग 13 प्रतिशत तक गिरा है।
  • बिना ड्राइवर दौड़ी Xiaomi की ये इलेक्ट्रिक कार, Audi को पछाड़ बना डाला नया रिकॉर्ड
    Xiaomi YU7 GT ने जर्मनी के Nurburgring ट्रैक पर दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। कंपनी के मुताबिक, यह ट्रैक को पूरी तरह ऑटोनॉमस मोड में पूरा करने वाली पहली कार बन गई है। SUV ने 20.8 किलोमीटर लंबे ट्रैक का लैप 10 मिनट 29.483 सेकंड में पूरा किया। इसके अलावा इंसानी ड्राइवर के साथ YU7 GT ने 7 मिनट 34.93 सेकंड का लैप टाइम दर्ज कर प्रोडक्शन SUV रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। Xiaomi का कहना है कि इस रन से जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल उसकी ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
  • 1 हजार कर्मचारियों के बदले 50 रोबोट! इस बड़ी कार कंपनी के खिलाफ खुला यूनियन का मोर्चा
    General Motors ने अपने Factory Zero EV प्लांट में 50 कोलैबोरेटिव रोबोट्स यानी Cobots तैनात किए हैं और 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों को अस्थायी रूप से साइडलाइन किया है। कंपनी का कहना है कि ये रोबोट कर्मचारियों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लगाए गए हैं। हालांकि यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स (UAW) यूनियन इससे सहमत नहीं है। यूनियन का आरोप है कि ऑटोमेशन के जरिए नौकरियां कम की जा रही हैं। EV की घटती मांग के बीच उठाए गए इस कदम ने ऑटो इंडस्ट्री में रोबोट्स और रोजगार के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
  • अब किराने की दुकान चलाएगा AI रोबोट, इंसानों की तरह करेगा बात!
    Hong Kong जल्द ही अपना पहला Humanoid Robot द्वारा संचालित रिटेल स्टोर शुरू करने जा रहा है। Hung Hom Waterfront पर बनने वाला यह 24x7 स्टोर "Xiao Gai" नाम के रोबेट की मदद से ग्राहकों को सर्विस देगा। रोबोट ग्राहकों से बातचीत कर सकेगा, प्रोडक्ट्स दिखाएगा और खरीदारी में सहायता करेगा। यह प्रोजेक्ट Embodied AI टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिसमें AI को फिजिकल सिस्टम्स और रोबोट्स में इस्तेमाल किया जाता है। Hong Kong सरकार इसे AI के प्रैक्टिकल यूज को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है और शहर में AI डेवलपमेंट को लेकर कई नई पहल भी की जा रही हैं।
  • AI क्या करके मानेगा? Elon Musk बोले- "5 साल में इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगा"
    Elon Musk ने AI के भविष्य को लेकर एक और बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि अगले 4 से 5 साल में AI की कुल इंटेलिजेंस सभी इंसानों की कुल इंटेलिजेंस से ज्यादा हो सकती है। Musk ने यह बात Peter H. Diamandis की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। Diamandis का मानना था कि ह्यूमन स्किल्स की लिमिट आबादी और उपलब्ध रिसोर्सेज से तय होती है। Musk के बयान पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। वहीं, AI के भविष्य और मानव समाज पर उसके असर को लेकर एक्सपर्ट्स के बीच भी राय बंटी हुई है।
  • न कंप्रेसर होगा, न गैस! चुंबक से चलेंगे फ्रिज और AC, जानें क्या है मैग्नेटिक कूलिंग तकनीक
    Magnetic Cooling या Magnetic Refrigeration एक उभरती हुई कूलिंग तकनीक है, जो Magnetocaloric Effect पर आधारित है। इसमें कुछ खास मैग्नेटिक मटेरियल चुंबकीय क्षेत्र मिलने पर गर्म और हटने पर ठंडे हो जाते हैं। इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कूलिंग पैदा करने के लिए किया जाता है। पारंपरिक फ्रिज और AC की तरह इसमें रेफ्रिजरेंट गैस और बड़े कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसकी लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण इसका इस्तेमाल सीमित स्तर पर ही हो रहा है।
  • Oppo Find N7 हो सकता है कंपनी का पहला वाइड फोल्डिंग स्मार्टफोन
    Oppo Find N7 में क्रीजलेस इनर फोल्डेबल डिस्प्ले सकता है। इस स्मार्टफोन में Oppo Find N6 के समान डिस्प्ले टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। Oppo Find N7 में हॉरिजॉन्टल रियर कैमरा मॉड्यूल हो सकता है। यह Oppo का पहला वाइड फोल्डिंग स्मार्टफोन होगा। इस स्मार्टफोन में 7.6 इंच का इनर डिस्प्ले और 5.5 इंच की कवर स्क्रीन मिल सकती है।
  • क्रिप्टो फर्मों पर ED के छापे, 2,500 करोड़ रुपये के गैर कानूनी मनी ट्रांसफर का है आरोप
    देश में यूजर्स को रुपये को USDT जैसे स्टेबलकॉइन्स सहित क्रिप्टोकरेंसीज में कन्वर्ट करने और क्रिप्टोकरेंसीज को रुपये में कन्वर्ट करने की सर्विस ये फर्में उपलब्ध करा रही थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से जरूरी अनुमतियां हासिल किए बिना ये फर्में विदेश में ट्रांजैक्शंस को प्रोसेस कर रही थी। ED का आरोप है कि इन फर्मों ने RBI की ओर से अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया है।
  • रोबोट पुलिसवाले की गई नौकरी, डिपार्टमेंट ने 1 साल से पहले ही दिखा दिया बाहर का रास्ता
    अमेरिका के ओहायो राज्य के डबलिन शहर ने "DubBot" नाम के रोबोट पुलिसवाले को समय से पहले रिटायर कर दिया है। यह रोबोट जुलाई 2025 से एक पार्किंग गैरेज में गश्त कर रहा था और इसका मकसद अपराध रोकने, पुलिस ऑपरेशन्स को सपोर्ट करने और सार्वजनिक सुरक्षा को बेहतर बनाना था। हालांकि शहर प्रशासन ने पाया कि यह प्रोजेक्ट उनकी परिचालन जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा है, जिसके बाद इसे सेवा से हटा दिया गया। DubBot को बनाने वाली कंपनी Knightscope को वापस भेज दिया गया है। शहर ने इस प्रोजेक्ट पर पहले साल में 1,28,080 डॉलर खर्च किए थे।
  • AI से चलेंगे, सेल्फ क्लीन भी करेंगे! Dreame ने भारत में लॉन्च किए 2 नए वैक्यूम क्लीनर
    Dreame Technology ने भारतीय बाजार में अपने दो नए रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर Dreame L50s Pro Ultra और Dreame L50 Ultra CE लॉन्च कर दिए हैं। दोनों डिवाइसेज AI आधारित नेविगेशन, स्मार्ट मैपिंग, ऑटोमैटिक कार्पेट डिटेक्शन और ऐप कंट्रोल जैसे फीचर्स के साथ आते हैं। फ्लैगशिप L50s Pro Ultra में 30,000Pa तक की सक्शन पावर मिलती है, जबकि L50 Ultra CE में 25,000Pa सक्शन पावर दी गई है। दोनों मॉडल्स में ऑटोमैटिक मॉप क्लीनिंग, डस्ट कलेक्शन और स्मार्ट डॉक सिस्टम मिलता है। इनकी कीमत क्रमशः 79,999 रुपये और 64,999 रुपये रखी गई है।
  • SpaceX  के IPO ने 4,400 से ज्यादा वर्कर्स को बनाया मिलिनेयर!
    SpaceX के बहुत से मौजूदा और पूर्व इंजीनियर्स, लॉन्च ऑपरेटर्स और ब्ल-कॉलर वर्कर्स मिलिनेयर बन गए हैं। इन वर्कर्स ने मस्क के विजन पर भरोसा कर SpaceX को ज्वाइन किया था। कंपनी की शुरुआती दौर में नाकामियों के बावजूद बहुत से वर्कर्स ने अपना विश्वास बरकरार रखा और इसका उन्हें बड़ा फायदा मिला है। इनमें से लगभग 400 वर्कर्स को इस IPO से 10 करोड़ डॉलर या इससे अधिक रकम मिलने का अनुमान है।

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