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इसरो - ख़बरें

  • ISRO के टॉप मिशनों को झटका? 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी, सरकार ने बदले नियम
    ISRO के महत्वपूर्ण मिशनों से वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफे सामने आने के बाद Department of Space ने नई गाइडलाइन जारी की है। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, Gaganyaan और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या Voluntary Retirement अब पहले की तरह सामान्य प्रक्रिया में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिक संगठन छोड़ चुके हैं। नए नियमों के तहत ऐसे सभी मामलों में अंतिम फैसला Department of Space करेगा, ताकि राष्ट्रीय अंतरिक्ष परियोजनाओं पर अचानक असर न पड़े।
  • भारत को बड़ी उपलब्धि, ISRO ने पूरे किए गगनयान के 3 टेस्ट, लैंडिग पर समुद्र में भी नहीं डूबेंगे अंतरिक्षयात्री
    ISRO ने पहले टेस्ट से यह सुनिश्चित किया है कि समुद्र पर उतरने के बाद क्रू मॉड्यूल सीधी स्थिति में रहेगा। आपको बता दें कि यह क्रू की सेफ्टी के लिए सबसे जरूरी बातों में से एक है। इसके लिए कोल्ड-गैस पर बेस्ड एक अपराइटिंग सिस्टम बनाया गया और उसका टेस्ट किया गया, जिससे इसका बात की पुष्टि हुई कि यह उतरने पर सीधा ही रहेगा।
  • भारत ने रचा एविएशन इतिहास! सैटेलाइट से होगी विमान की लैंडिंग, जानें क्या है ISRO का GAGAN सिस्टम
    भारत ने पहली बार किसी कमर्शियल जेट विमान की लैंडिंग स्वदेशी GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) सिस्टम की मदद से कराई है। IndiGo का Airbus A320 उदयपुर एयरपोर्ट पर बिना पारंपरिक ग्राउंड-बेस्ड Instrument Landing System (ILS) के सफलतापूर्वक उतरा। GAGAN को ISRO और Airports Authority of India (AAI) ने मिलकर विकसित किया है। यह GPS सिग्नल में आने वाली त्रुटियों को रियल टाइम में सुधारकर पायलट को अधिक सटीक नेविगेशन देता है। माना जा रहा है कि यह तकनीक भविष्य में छोटे एयरपोर्ट्स पर भी सुरक्षित और सटीक लैंडिंग को आसान बना सकती है।
  • 2026 का पहला ISRO मिशन फेल! PSLV-C62 के साथ कहां, कब और कैसे हुई गड़बड़? यहां पढ़ें पूरी कहानी
    ISRO ने 12 जनवरी 2026 को साल का पहला स्पेस मिशन PSLV-C62 लॉन्च किया था, लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। लॉन्च के शुरुआती मिनटों में सब कुछ सामान्य रहा, हालांकि तीसरे स्टेज के अंत में रॉकेट में अस्थिरता आ गई। इसके चलते रॉकेट जरूरी ऑर्बिटल स्पीड और दिशा हासिल नहीं कर पाया और सैटेलाइट्स पृथ्वी की ओर लौट गए। PSLV-C62 में EOS-N1 समेत कई पेलोड्स शामिल थे। ISRO ने फेल्योर के कारणों की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
  • रास्ते से भटका ISRO का रॉकेट! 16 सैटेलाइट लेकर गया है PSLV, जानें क्या हुआ तीसरे स्टेज में
    ISRO के Polar Satellite Launch Vehicle के 64वें मिशन PSLV-C62 में लॉन्च के कुछ मिनट बाद तकनीकी अनियमितता दर्ज की गई है। श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे लॉन्च हुए इस मिशन में रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे स्टेज में ट्रेजेक्टरी में झुकाव देखा गया। ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यह मिशन 2025 में हुई PSLV की विफल उड़ान के बाद एक अहम वापसी माना जा रहा था।
  • ISRO बना ग्लोबल हीरो! 'बाहुबली' रॉकेट से स्पेस में पहुंचाई सबसे भारी विदेशी सैटेलाइट, सेट किया रिकॉर्ड
    ISRO के हेवी-लिफ्ट रॉकेट LVM3-M6 ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरते हुए अमेरिका के BlueBird-6 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित किया है। यह अब तक किसी भारतीय लॉन्च व्हीकल द्वारा ले जाया गया सबसे भारी पेलोड है। यह मिशन आम स्मार्टफोन्स तक सीधे स्पेस से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लक्ष्य से जुड़ा है। करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद सैटेलाइट 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने तय ऑर्बिट में पहुंचा। यह भारत की कमर्शियल स्पेस लॉन्च क्षमता को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करता है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ने बनाया रिकॉर्ड, एक साथ डॉक हुए 8 स्पेसक्राफ्ट
    ISS का इस्तेमाल माइक्रोगेविटी में वैज्ञानिक रिसर्च, टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग और मानव पर अंतरिक्ष के प्रवाहों की स्टडी करने के लिए होता है। इस वर्ष जून में भारतीय एस्ट्रोनॉट Shubhanshu Shukla ने Axiom-4 मिशन के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचकर एक बड़ी सफलता हासिल की थी। भारत की योजना भी स्पेस स्टेशन बनाने की है।
  • Gen-Z के बनाए ड्रोन्स ने जीता PM Modi का दिल, ISRO का 'Mars' चैलेंज हुआ वायरल
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने रविवार को प्रसारित हुए ‘मन की बात’ (Mann ki Baat) के 128वें एपिसोड में देश के युवाओं की वैज्ञानिक जिज्ञासा के बारे में बात की। इस बार उनका फोकस ISRO की एक अनोखी ड्रोन प्रतियोगिता पर था, जिसने हाल ही में सोशल मीडिया पर खूब चर्चा भी बटोरी। पीएम मोदी ने बताया कि प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने वाले Gen-Z प्रतिभागियों का उत्साह और लगातार कोशिशें उन्हें बेहद प्रभावित कर गईं और यही ऊर्जा भारत के वैज्ञानिक भविष्य का आधार है।
  • भारत का 2028 में चंद्रयान-4 लॉन्च करने का टारगेट
    केंद्र सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए स्वीकृति दे दी है। इस मिशन में चंद्रमा से सैम्प्ल को लाया जाएगा। यह देश का सबसे जटिल लूनर मिशन होगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस ने चंद्रमा से सैम्प्ल लाने की क्षमता को प्रदर्शित किया है। Chandrayaan-4 मिशन को 2028 में लॉन्च करने का टारगेट है। ISRO की योजना अगले तीन वर्षों में स्पेसक्राफ्ट के मैन्युफैक्चरिंग की अपनी कैपेसिटी को तिगुना करने की है।
  • गगनयान मिशन में हुई बड़ी प्रगति, ISRO ने किया क्रू मॉड्यूल के लिए पैराशूट टेस्ट
    ISRO ने यह टेस्ट उत्तर प्रदेश में झांसी की बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में किया है। इसमें भारतीय वायु सेना के IL-76 एयरक्राफ्ट से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से लगभग 2.5 टन के क्रू मॉड्यूल को गिराया था। क्रू मॉड्यूल के नीचे उतरने पर पैराशूट सिस्टम बिना किसी मुश्किल के खुला जिससे इसकी वास्तविक मिशन के दौरान अत्यधिक मुश्किल स्थिति को संभालने में इसकी क्षमता साबित हो गई है।
  • ISRO की बड़ी कामयाबी, देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 किया लॉन्च
    देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 को रविवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया है। इस सैटेलाइट का भार लगभग 4,410 किलोग्राम का है। LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) एक थ्री-स्टेज लॉन्च व्हीकल है। इस हेवी व्हीकल लॉन्च व्हीकल से ISRO को भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स को GTO में भेजने में आसानी हो गई है।
  • ISRO का मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट इस सप्ताह होगा लॉन्च
    इस मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट का डिजाइन भारत सहित ओशियानिक क्षेत्र में सर्विसेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। CMS-03 का भार लगभग 4,400 किलोग्राम का है। यह भारत से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में लॉन्च किया जाने वाला सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट होगा। ISRO ने बताया कि LVM3 का पिछला मिशन Chandrayaan-3 था।
  • गगनयान मिशन जल्द होगा टेस्ट फ्लाइट के लिए तैयार, ISRO ने दी जानकारी
    इस मिशन में तीन एस्ट्रोनॉट्स के क्रू को 400 किलोमीटर के ऑर्बिट में तीन दिन के लिए भेजा जाएगा और इसके बाद उनकी समुद्र पर सुरक्षित वापसी होगी। भारत की योजना अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की भी इस स्टेशन का नाम "भारत अंतरिक्ष स्टेशन" होगा। इसकी स्थापना 2035 तक हो सकती है। भारत की योजना अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की भी है।
  • ISRO का Gaganyaan मिशन 90% पूरा हुआ, जानें स्पेस में कब जाएंगे भारतीय अंतरिक्ष यात्री?
    भारत अब अपने सबसे बड़े स्पेस ड्रीम के बेहद करीब पहुंच चुका है। ISRO (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) ने कंफर्म किया है कि देश का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन Gaganyaan अब लगभग 90% पूरा हो चुका है। ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने बताया कि एजेंसी अब मिशन के अंतिम चरणों पर काम कर रही है और लक्ष्य है कि इसे 2027 तक लॉन्च किया जाए। इससे पहले ISRO तीन अनक्रूड (बिना इंसान वाले) टेस्ट फ्लाइट्स पूरी करेगा, ताकि सिस्टम की सुरक्षा और तैयारी को परखा जा सके। इस मिशन के सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिन्होंने अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है।
  • इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को: भारत में दिखेगा या नहीं.... 
    सूर्य ग्रहण तब होता है जब धरती और सूर्य के बीच से चंद्रमा गुजरता है। इससे धरती तक सूर्य की रोशनी का पहुंचना आंशिक तौर पर या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। यह अलाइनमेंट के आधार पर पूर्ण, आंशिक या गोले के आकार का हो सकता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में सूर्य का केवल एक हिस्सा चंद्रमा की ओर से धुंधला होता है। यह एक आकर्षक खगोलीय दृश्य बनाता है।

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