Elon Musk की Starlink सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस भारत में एंट्री के करीब है। जानें यह कैसे काम करती है, संभावित कीमत क्या होगी और इसके फायदे-कमियां क्या हैं।
Photo Credit: Unsplash/ ANIRUDH
दुनिया हाई-स्पीड इंटरनेट की ओर बढ़ रही है, लेकिन अब यह रेस सिर्फ फाइबर और 5G तक सीमित नहीं है। Elon Musk की SpaceX की सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को लेकर भारत में भी दिलचस्पी अचानक बढ़ गई है - खासकर तब, जब रिपोर्ट्स ने इसके संभावित भारतीय प्राइसिंग की झलक दिखानी शुरू कर दी। सरकारी मंजूरी अभी बाकी है, लेकिन चर्चा इसका इंतजार नहीं कर रही। अभी तक फाइनल प्राइसिंग का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह सर्विस असल में क्या है, कैसे काम करती है, भारत में इसकी कीमत क्या हो सकती है और इसमें कौन-सी खूबियां और कमियां हैं, इसका अंदाजा अन्य देशों में चल रही इस सर्विस से लगाया जा सकता है। तो बिना देरी किए चलिए सब कुछ जानते हैं।
Starlink, Elon Musk की SpaceX कंपनी का प्रोजेक्ट है, जो दुनिया को सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है। इसका लक्ष्य है - जगह कोई भी हो, इंटरनेट हमेशा उपलब्ध हो, यानी हिल स्टेशन, जंगल, गांव, समुद्र, एयरलाइन आदि। Starlink अपनी लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स की मदद से यह इंटरनेट देता है। अभी तक SpaceX 6,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है।
इसके लिए तीन चीजें चाहिए होती हैं:
Starlink की खासियत है कि इसकी सैटेलाइट्स बहुत नीचे (550 km ऊंचाई) पर चलती हैं। यही वजह है कि लेटेंसी कम रहती है, स्पीड फाइबर जैसी महसूस हो सकती है और कनेक्शन खराब मौसम में भी स्थिर रह सकता है।
अभी Starlink ने भारत के लिए फाइनल ऑफिशियल प्राइस घोषित नहीं किया है। हाल ही में कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर 8,600 रुपये का प्राइस दिखाई दिया, जिसे बाद में कंपनी ने डमी प्राइस कहा और वेबसाइट पर ग्लिच के कारण यह दिखाई देने लगा था। बाद में ET की रिपोर्ट सामने आई, जिसके मुताबिक, Starlink की मंथली कीमत 2,500-3,500 रुपये के बीच हो सकती है। वहीं, हार्डवेयर किट (डिश + राउटर) की कीमत लगभग 25,000-30,000 रुपये रखे जाने की उम्मीद है।
ग्लोबल डेटा के आधार पर Starlink आमतौर 50-220 Mbps स्पीड देता है, जिसमें 20-40 ms की लेटेंसी हो सकती है और अपलोड स्पीड 5-20 Mbps हो सकती है। भारत में स्पीड नेटवर्क डेंसिटी और लोकेशन के हिसाब से तय होगी।
संभावना कम है, लेकिन यह जहां ब्रॉडबैंड पहुंच ही नहीं सकता, वहां सबसे मजबूत ऑप्शन बन सकता है। इसके अलावा, रिमोट वर्क, पहाड़ी गांवों में स्कूल, रिसर्च सेंटर्स, खेती/IoT, आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में Starlink एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। Starlink के भारत में अगले साल लॉन्च होने की पूरी संभावना है।
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