पिछले वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में पूर्व सोवियत संघ में शामिल इस देश में क्रिप्टोकरेंसी का टर्नओवर 7.9 अरब डॉलर से अधिक रहा है
पूर्व सोवियत देश किर्गिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी का टर्नओवर 7.9 अरब डॉलर से अधिक रहा है
दुनिया के कई देशों में पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसीज का सेगमेंट तेजी से बढ़ा है। इन देशों में Kyrgyzstan भी शामिल है। किर्गिस्तान की इकोनॉमी के लिए यह सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट्स शामिल हो गया है। पिछले वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में पूर्व सोवियत संघ में शामिल इस देश में क्रिप्टोकरेंसी का टर्नओवर 7.9 अरब डॉलर से अधिक रहा है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किर्गिस्तान को क्रिप्टो सेगमेंट से लगभग 2.28 करोड़ डॉलर का टैक्स मिला है। इस देश में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी ट्रांजैक्शंस को कानूनी तौर पर अनुमति मिली है और अथॉरिटीज इस सेगमेंट के रेगुलेशन और निगरानी के लिए कार्य कर रही हैं। Association of Virtual Asset Market Participants के चेयरमैन, Temir Kazybaev ने बताया कि क्रिप्टो टर्नओवर से मिलने वाला टैक्स देश के सबसे बड़े कमोडिटी ट्रेडिंग हब से मिलने वाले रेवेन्यू से ज्यादा हो गया है।
उन्होंने कहा कि इस सेगमेंट को लेकर लोगों के नजरिए में बड़ा बदलाव हुआ है। Kazybaev ने बताया, "कुछ वर्ष पहले तक किर्गिस्तान के लोग क्रिप्टो मार्केट को एक स्कैम या पिरामिड स्कीम के तौर पर देखते थे। यह नजरिया तेजी से बदल रहा है। लोग और कारोबारी इसे एक मौके के तौर पर देख रहे हैं। इसका बड़ा कारण प्रेसिडेंट Sadyr Japarov का खुद क्रिप्टोकरेंसीज में इनवेस्टमेंट करना है।" किर्गिस्तान को क्रिप्टोकरेंसीज से मिलने वाले टैक्स में तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है।
किर्गिस्तान के पड़ोसी देश तुर्कमेनिस्तान ने हाल ही में अपनी इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए क्रिप्टो माइनिंग और एक्सचेंजों को कानूनी दर्जा दिया है। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के सदस्यों में शामिल तुर्कमेनिस्तान के प्रेसिडेंट, Serdar Berdimuhamedov ने वर्चुअल एसेट्स को रेगुलेट करने और क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए लाइसेंस से जुड़े कानून पर साइन किए थे। हालांकि, इस कानून में क्रिप्टोकरेंसीज को पेमेंट के जरिए या सिक्योरिटी के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है। तुर्कमेनिस्तान की इकोनॉमी नेचुरल गैस के एक्सपोर्ट पर निर्भर है। इस नेचुरल गैस का चीन सबसे बड़ा इम्पोर्टर है। सोवियत संघ से अलग होने वाले इस देश की योजना भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक नेचुरल गैस की सप्लाई के लिए एक पाइपलाइन बनाने की भी है। दुनिया में नेचुरल गैस का चौथा सबसे बड़ा रिजर्व रखने वाले तुर्कमेनिस्तान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान है।
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