सूर्य ग्रहण तब होता है जब धरती और सूर्य के बीच से चंद्रमा गुजरता है। इससे धरती तक सूर्य की रोशनी का पहुंचना आंशिक तौर पर या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। यह अलाइनमेंट के आधार पर पूर्ण, आंशिक या गोले के आकार का हो सकता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में सूर्य का केवल एक हिस्सा चंद्रमा की ओर से धुंधला होता है। यह एक आकर्षक खगोलीय दृश्य बनाता है।
इस सैटेलाइट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के साथ मिलकर बनाया है।इस सैटेलाइट के ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसके डुअल-फ्रीक्वेंसी राडार एक दिन में धरती का 14 बार चक्कर लगाएंगे। इससे प्रत्येक 12 दिनों में धरती पर सभी जमीन और बर्फ की सतहों की स्कैनिंग की जाएगी। यह सैटेलाइट धरती की सतह पर 1 सेंटीमीटर जितने बदलाव को भी रिकॉर्ड कर सकेगा।
पिछले डेढ़ महीने से यह रोवर Jezero क्रेटर रिम की बाहरी ढलानों पर मौजूद Krokodillen पठार पर मिट्टी वाली चट्टानों की खोज कर रहा है। अगर चट्टानों के नमूनों में 'फिलोसिलिकेट्स' कहे जाने वाले मिनरल्स पाए जाते हैं तो इसका मतलब हो सकता है कि पहले इस ग्रह पर बड़ी मात्रा में पानी की मौजूदगी थी। NASA के Curiosity और Opportunity जैसे मंगल ग्रह पर अन्य रोवर्स की तुलना में इसकी स्पीड भी अधिक रही है।
इस मिशन के पायलट की जिम्मेदारी शुक्ला ने सभाली है, जबकि और मिशन कमांडर के तौर पर कमान Peggy Whitson के पास थी। अनडॉकिंग के कई घंटे बाद Axiom-4 मिशन का स्पलैशडाउन अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रशांत महासागर के तट के निकट होगा। Axiom-4 मिशन में 31 देशों की भागीदारी है इस मिशन को सुरक्षा के साथ ISS पर पहुंचाने के लिए NASA और Axiom Space ने कड़ी तैयारी की थी।
वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के अपनी धुरी पर घूमने की रफ्तार पर ग्लेशियर्स का पिघलना भी असर डाल सकता है। धरती पर अल नीनो और ला नीना जैसी मौसम से जुड़ी स्थितियां भी एक कारण हो सकती हैं। इनसे धरती पर भार का वितरण बदलता है जिससे इसके घूमने की गति पर असर हो सकता है। इसके लिए चंद्रमा भी जिम्मेदार हो सकता है।
Science Alert में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, यह स्टार सिस्टम केवल 2.3 करोड़ वर्ष पुराना है, जो लगभग 4.6 अरब वर्ष पुराने सोलर सिस्टम की तुलना में काफी युवा है। यह स्टार सिस्टम अभी अपने शुरुआती दौर में है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के James Webb Telescope ने जमे हुए पानी के साथ ही पारदर्शी पानी वाली बर्फ को भी खोजा है।
एक भारतीय खगोलशास्त्री दोर्जे अंगचुक (Dorje Angchuk) ने बेहतरीन टाइम-लैप्स वीडियो बनाया है। इसे लद्दाख में शूट किया गया है। वीडियो में वहां की एक साइंस लेबोरेटरी के सामने पृथ्वी को घूमते हुए दिखाया गया है। वीडियो अपने आप में यूनीक है और हमारे ग्रह की गति को लेकर अनूठा दृश्य पेश करता है। दोर्जे अंगचुक लद्दाख के हानले में स्थित ऑब्जर्वेट्री के इंजीनियर इन-चार्ज हैं।
Super Jupiter : आईआईटी कानपुर के रिसर्चर्स समेत इंटरनेशनल वैज्ञानिकों की टीम ने पृथ्वी से लगभग 12 प्रकाश वर्ष दूर ‘सुपर-जुपिटर’ एक्सोप्लैनेट का पता लगाया है।
Gama-Ray Brust : रिसर्चर्स ने 37MeV तक ऊर्जा वाली एक गामा-रे स्पेक्ट्रम लाइन को खोजा है। दावा है कि यह किसी भी खगोलीय पिंड से देखी गई अब तक की सबसे अधिक ऊर्जा है।
भारत ने लगभग 15 वर्ष पहले स्पेस शटल का अपना वर्जन डिवेलप करने की योजना बनाई थी। इसके कुछ वर्ष बाद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम ने RLV बनाने का कार्य शुरू किया था
इस बंदर को एक अभूतपूर्व प्रयोग के माध्यम से पैदा किया गया था। जिसमें जेनेटिक रूप से भिन्न एक ही प्रजाति के बंदरों की स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल हुआ था।
साइंटिस्ट का कहना है कि चंद्रयान-3 रोवर दक्षिण में 69 डिग्री अक्षांश पर लैंड हुआ है। यह क्षेत्र चांद के दक्षिणी गोलार्ध में जरूर है, लेकिन पोल पर नहीं है।