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News Study - ख़बरें

  • लंबे नाखून से फोन नहीं चलता? स्टूडेंट ने बनाई अनोखी नेल पॉलिश, ऐसे करेगी काम
    लंबे नाखून रखने वाले यूजर्स के लिए स्मार्टफोन चलाना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान खोजा जा रहा है। ACS में पेश की जाने वाली एक स्टडी के मुताबिक वैज्ञानिक एक ऐसी clear नेल पॉलिश पर काम कर रहे हैं, जो नाखूनों को टचस्क्रीन के साथ compatible बना सकती है। यह पॉलिश हल्की conductivity पैदा कर स्क्रीन को टच रजिस्टर करने में मदद करती है। फिलहाल यह टेक्नोलॉजी शुरुआती स्टेज में है और इसे ज्यादा सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार बनाने के लिए और रिसर्च जारी है।
  • NASA के चांद मिशन में एस्ट्रोनॉट्स के हाथ में होगा खास बैंड, जानें कैसे करेगा काम
    NASA का Artemis II मिशन 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च होने वाला है, जो Apollo के बाद पहला crewed deep-space मिशन होगा। इस मिशन में चार astronauts चांद के आसपास यात्रा करेंगे। खास बात यह है कि इस बार “Archer” स्टडी के तहत astronauts रिस्टबैंड पहनेंगे, जो उनकी नींद, स्ट्रेस, मूवमेंट और टीमवर्क से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करेंगे। कंपनी के मुताबिक यह रिसर्च भविष्य के Moon और Mars मिशन के लिए अहम साबित हो सकती है, क्योंकि इससे डीप स्पेस में इंसानों के व्यवहार और हेल्थ पर पड़ने वाले असर को समझने में मदद मिलेगी।
  • चांद से टकराने वाला है विशाल एस्टेरॉयड? NASA की नई रिपोर्ट ने साफ किया पूरा मामला
    NASA के James Webb Space Telescope ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 को लेकर नई ऑब्जर्वेशन की हैं, जिनसे वैज्ञानिकों ने इसकी कक्षा को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से मापा है। पहले आशंका जताई जा रही थी कि यह एस्टेरॉयड 2032 में चांद से टकरा सकता है, लेकिन अब नई गणनाओं के बाद यह संभावना लगभग खत्म हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एस्टेरॉयड बेहद धुंधला है और मौजूदा समय में इसे ट्रैक करना आसान नहीं है। Webb Telescope की संवेदनशीलता की वजह से वैज्ञानिक इसकी स्थिति को बेहतर तरीके से माप पाए, जिससे भविष्य में इसकी सटीक स्थिति का अनुमान लगाना संभव हुआ।
  • AI कर रहा है 'भेजा फ्राई'? ज्यादा AI टूल्स का यूज आपके लिए खतरा! नई स्टडी में दावा
    वर्कप्लेस पर AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कई कर्मचारी एक साथ कई AI सिस्टम का यूज कर रहे हैं। हालांकि एक नई स्टडी में सामने आया है कि लगातार इन टूल्स को मॉनिटर और मैनेज करना मानसिक थकान पैदा कर सकता है, जिसे “AI Brain Fry” कहा गया है। Harvard Business Review में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक कुछ कर्मचारियों को ध्यान लगाने में कठिनाई, निर्णय लेने में देरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं महसूस हुईं। स्टडी यह भी बताती है कि जिन कर्मचारियों पर AI टूल्स की निगरानी का दबाव ज्यादा होता है, उनमें निर्णय थकान और गलतियों की संभावना भी बढ़ सकती है।
  • ब्रह्मांड का सबसे पुराना पता अब मिला, NASA के टेलीस्कोप ने बदली यूनिवर्स की समझ
    NASA ने बताया है कि James Webb Space Telescope ने अब तक की सबसे दूर स्थित गैलेक्सी MoM-z14 को देखा है। यह गैलेक्सी बिग बैंग के सिर्फ 280 मिलियन साल बाद मौजूद थी और इसकी रोशनी को धरती तक पहुंचने में करीब 13.5 अरब साल लगे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह खोज ब्रह्मांड के शुरुआती दौर यानी कॉस्मिक डॉन को समझने में मदद करती है। MoM-z14 उम्मीद से ज्यादा चमकदार और विकसित पाई गई है, जिसने शुरुआती ब्रह्मांड को लेकर बनी कई थ्योरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • धरती में कहां से आया था पानी? अब चांद की मिट्टी से निकली बिल्कुल नई कहानी
    NASA की एक नई स्टडी ने धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर अहम जानकारी दी है। अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाए गए सैंपल्स के विश्लेषण में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि उल्कापिंडों ने धरती पर सिर्फ सीमित मात्रा में पानी पहुंचाया था। रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी का अधिकांश पानी उसके बनने के शुरुआती दौर में मौजूद मटेरियल से ही आया था। इस स्टडी में ट्रिपल ऑक्सीजन आइसोटोप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे अरबों साल पुराने इम्पैक्ट्स का रिकॉर्ड समझना संभव हुआ है।
  • वैज्ञानिकों का काम खत्‍म! AI भी कर सकता है सौर तूफान की भविष्‍यवाणी
    एक नई स्‍टडी में कहा गया है कि AI, पिछले साल मई में पृथ्वी पर आए शक्तिशाली सौर तूफान (solar storm) की भविष्यवाणी कर सकता था। वह तूफान सूर्य पर एक्टिव AR13664 नाम के सनस्‍पॉट से निकला था। जेनोआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का मानना है कि ऐतिहासिक सौर घटनाओं पर एआई को ट्रेनिंग दी जाए तो वह कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से पहले के पैटर्नों की पहचान कर सकता है।
  • चार गुना तेजी से गर्म हो रहा समुद्र, सिर्फ एक चीज रोक सकती है यह ‘मुसीबत’, जानें
    एक नई स्‍टडी ने इस चिंता को बढ़ा दिया है। इसमें कहा गया है कि बीते चार दशकों में समुद्र के गर्म होने की रफ्तार चौगुनी हो गई है। यह स्‍टडी जरनल एनवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स में पब्लिश हुई है। इसमें कहा गया है कि 1980 के दशक में समुद्र का तापमान प्रति दशक 0.06 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा था, जो मौजूदा समय में 0.27 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक (10 साल) हो गया है।
  • क्‍या हमारी दुनिया से पहले भी पृथ्‍वी पर कोई दुनिया थी जो डूब गई? वैज्ञानिकों को मिला सबूत
    जियोफ‍िजिसिस्‍ट की एक टीम ने पृथ्वी के आंतरिक भाग को लेकर नई जानकारी जुटाई है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक भाग की ट्रेडिशनल प्‍लेट बाउंड्री से दूर डूबी हुई टेक्टोनिक प्लेटों के अवशेषों का पता लगाया है। यह रिसर्च ETH ज्यूरिख और कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलजी की एक टीम ने की है। उन्‍होंने पृथ्‍वी के नीचे ऐसे टेक्टोनिक प्लेटों जैसे क्षेत्र का पता लगाया है, जो महासागरों के नीचे हैं।
  • पानी ‘छुपाकर’ बैठा है यूरेनस का चंद्रमा मिरांडा! वैज्ञानिकों ने कर दी बड़ी खोज
    वैज्ञानिकों ने माना है कि यूरेनस के चंद्रमा मिरांडा की बर्फीली सतह के नीचे कोई महासागर छिपा हो सकता है। रिसर्चर्स ने वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट से ली गई इमेजेस पर स्‍टडी के बाद यह सुझाव दिया है। खास यह है कि वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट साल 1986 में मिरांडा के पास से गुजरा था। तब उसने इसके दक्षिणी गोलार्ध की तस्वीरें ली थीं।
  • अंतरिक्ष घूमकर आए आलू, मटर, मक्‍का अब पृथ्‍वी पर रोपे जाएंगे, क्‍या है पूरा मामला? जानें
    अंतरिक्ष में कई महीनों तक रखने के बाद वैज्ञानिकों ने कई प्रकार के बीजों (Seeds) को पृथ्‍वी पर भेज दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वसंत की शुरुआत में बीजों को पृथ्‍वी पर रोपा जाएगा। यह कल्‍चरल एंड स्‍टेम स्‍टडी का हिस्‍सा है। स्‍टेम का पूरा नाम साइंस, टेक्‍नॉलजी, इंजीनियरिंग एंड मैथ है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल नवंबर में पांच किस्‍म के बीज- स्‍वीट पोटैटो, मटर, मक्‍का और लैम्ब्सक्वार्टर को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर भेजा गया था।
  • हिमालय की बर्फ में मिले 1700 प्रकार के वायरस, एक तो 11 हजार साल पुराना
    रिसर्चर्स ने हिमालय की बर्फ में छुपी लगभग 1700 प्राचीन वायरस प्रजातियों का पता लगाया है। जो वायरस मिले हैं, उनमें से लगभग तीन-चौथाई के बारे में साइंटिस्‍ट नहीं जानते थे। तिब्बत के पठार पर स्थित गुलिया ग्लेशियर से बर्फ की परतों के सैंपल लिए थे। उनमें वायरस प्रजातियां मिलीं। यह जगह समुद्र तल से लगभग 6400 मीटर ऊपर है। रिसर्चर्स समझना चाहते हैं कि वायरस, मौमस में होने वाले बदलावों के साथ तालमेल कैसे बैठाते हैं।
  • ऋग्वेद के आगे नतमस्‍तक हुए साइंटिस्‍ट! 6 हजार साल पुराने सूर्यग्रहण का राज़ खुला
    वैज्ञानिकों की एक टीम को ऋग्वेद में 6 हजार साल पहले लगे सूर्यग्रहण का उल्‍लेख मिला है। यह सूर्यग्रहण के बारे में अबतक मिली सबसे पुरानी जानकारी है। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के मयंक वाहिया और जापान के मित्सुरु सोमा ने यह स्‍टडी की है। उन्‍होंने दो तारीखों के बारे में बताया है। 22 अक्टूबर 4202 ईसापूर्व और 19 अक्टूबर 3811 ईसापूर्व। ये तारीखें अबतक मिले रिकॉर्ड से भी पुरानी बन गई हैं।
  • बिग बैंग से नहीं हुई ब्रह्मांड की शुरुआत! मौजूद था ‘रहस्‍यमयी जीवन’, नई स्‍टडी में चौंकाने वाली बात
    एक स्‍टडी में कहा गया है कि बिग बैंग से पहले ब्रह्मांड में ‘रहस्‍यमयी जीवन’ की मौजूदगी हो सकती है। बिग बैंग से पहले हमारा ब्रह्मांड संकुचन के चरण से गुजरा यानी सिकुड़ गया। फ‍िर इसका विस्‍तार हुआ। इन बदलावों ने ब्‍लैक होल और डार्क मैटर के निर्माण में भूमिका निभाई। उनमें से कुछ आज भी मौजूद हो सकते हैं। भविष्‍य की तकनीक अगर उन्‍हें एक्‍सप्‍लोर कर पाती हैं तो ब्रह्मांड के बारे में नई जानकारी मिल सकती है।
  • बिना भूकंप आई सुनामी ने 5 हजार किलोमीटर तक ‘डराया’, ग्रीनलैंड की घटना ने वैज्ञानिकों को चौंकाया
    Tsunami without earthquake : साल 2023 में पूर्वी ग्रीनलैंड में हुए बड़े भूस्खलन से भी एक मेगासुनामी पैदा हुई थी, जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचाई।

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