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फाइनेंशियल फ्रॉड की चेतावनी देने के लिए ऑनलाइन पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा RBI

इससे फाइनेंशियल फ्रॉड को रियल टाइम में पकड़ा जा सकेगा। इन फ्रॉड से लोगों के साथ ही फर्मों को भी बड़ा नुकसान होता है

फाइनेंशियल फ्रॉड की चेतावनी देने के लिए ऑनलाइन पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा RBI

इससे फिनटेक इकोसिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाया जा सकेगा

ख़ास बातें
  • इससे फाइनेंशियल फ्रॉड को रियल टाइम में पकड़ा जा सकेगा
  • इन फ्रॉड से लोगों के साथ ही फर्मों को भी बड़ा नुकसान होता है
  • केंद्र सरकार की योजना RBI की गारंटी वाली एक डिजिटल करेंसी पेश करने की है
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देश में पिछले कुछ वर्षों में फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस समस्या से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक ऑनलाइन पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म बना रहा है। इससे फाइनेंशियल फ्रॉड को रियल टाइम में पकड़ा जा सकेगा। इन फ्रॉड से लोगों के साथ ही फर्मों को भी बड़ा नुकसान होता है। 

RBI के गवर्नर Sanjay Malhotra ने Global Fintech Fest में कहा कि यह देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और फिनटेक इकोसिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि RBI एक पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म को तैयार कर रहा है जिससे फ्रॉड वाली ट्रांजैक्शंस की रियल टाइम में पहचान कर उन्हें रोका जा सकेगा। 

देश के फिनटेक इकोसिस्टम की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले दशक में इसमें 10,000 से अधिक स्टार्टअप्स शामिल हुए हैं और इस सेगमेंट में 40 अरब डॉलर से अधिक का इनवेस्टमेंट हुआ है। डिजिटलाइजेशन में देश की सफलता के पीछे मजबूत पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी, सरकार की नीतियों और टेक टैलेंट की बड़ी संख्या प्रमुख कारण हैं। केंद्र सरकार की योजना RBI की गारंटी वाली एक डिजिटल करेंसी को लॉन्च करने की है। इससे पेमेंट्स को तेज किया जा सकेगा। कुछ देशों में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को पेश किया गया है। लगभग तीन वर्ष पहले RBI ने डिजिटल करेंसी का ट्रायल शुरू किया था। इस वर्ष मार्च तक इस डिजिटल करेंसी का सर्कुलेशन बढ़कर लगभग 1,016 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। 

क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर भी RBI की ओर से चेतावनी दी जा चुकी है। RBI का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसीज से वित्तीय और मॉनेटरी स्थिरता को बड़ा जोखिम है। पिछले वर्ष RBI के पूर्व गवर्नर Shantikanta Das ने कहा था, "मेरा मानना है कि इसे फाइनेंशियल सिस्टम पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इससे वित्तीय स्थिरता को लेकर बड़ा जोखिम है। क्रिप्टोकरेंसीज से बैंकिंग सिस्टम को भी रिस्क है। इससे ऐसी स्थिति बना सकती है जिसमें इकोनॉमी में फंड की सप्लाई पर सेंट्रल बैंक का कंट्रोल समाप्त हो सकता है।" उनका कहना था, "इकोनॉमी में फंड की सप्लाई पर सेंट्रल बैंक का कंट्रोल नहीं रहने से सिस्टम में उपलब्ध लिक्विडिटी का कैसे आकलन होगा?" दास ने कहा था कि क्रिप्टोकरेंसीज को एक बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समझ बननी चाहिए क्योंकि ये ट्रांजैक्शंस देश से बाहर भी होती हैं। 

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आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

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