WhatsApp के खिलाफ CCI के ऑर्डर से बिजनेस को खतरा, Meta ने लगाई गुहार

Meta ने आरोप लगाया है कि CCI ने ऑर्डर जारी करने से पहले इसके असर का पर्याप्त विश्लेषण नहीं किया है

WhatsApp के खिलाफ CCI के ऑर्डर से बिजनेस को खतरा, Meta ने लगाई गुहार

यह मामला WhatsApp की लगभग चार वर्ष पहले लागू की गई प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है

ख़ास बातें
  • Meta ने NCLAT को बताया है कि इससे उसके बिजनेस मॉडल को नुकसान होगा
  • यह मामला WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है
  • वॉट्सऐप का मालिकाना हक मेटा के पास है
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इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के ऑर्डर को लेकर अमेरिकी कंपनी Meta ने NCLAT को बताया है कि इससे उसके बिजनेस मॉडल को नुकसान होगा। Meta ने आरोप लगाया है कि CCI ने ऑर्डर जारी करने से पहले इसके असर का पर्याप्त विश्लेषण नहीं किया है। वॉट्सऐप का मालिकाना हक मेटा के पास है। 

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में सुनवाई के दौरान CCI ने दलील दी कि अगर उसके ऑर्डर पर रोक लगाई जाती है तो इससे एक खतरनाक उदाहरण तय होगा। Meta ने बताया कि उसकी ग्रुप की कंपनियों के बीच डेटा की शेयरिंग का मॉडल बुरा नहीं है और वॉट्सऐप एक फ्री ऐप है और इसे किसी तरीके से रेवेन्यू हासिल करना होता है। सुप्रीम कोर्ट में पहले वॉट्सऐप की लगभग चार वर्ष पुरानी प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हो रही है। 

Meta का कहना था कि CCI के ऑर्डर से यूजर्स के अधिकारों के साथ ही उसके अधिकारों में भी कटौती की जा रही है। इस पर CCI ने बताया कि उसने ऑर्डर देने से पहले इसके प्रभाव का विश्लेषण किया है और यह ऑर्डर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले के खिलाफ नहीं जा रहा। CCI ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के आर्टिकल 21 के नजरिए से इस मामले की सुनवई कर रहा है, जबकि CCI ने कॉम्पिटिशन के लिहाज से इस मामले की जांच की है। यूरोप में मेटा ने यूजर्स को प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी शर्तों को मानने या नहीं मानने का विकल्प दिया है। हालांकि, भारत में यूजर्स के पास इस पॉलिसी के लिए सहमति देने के बाद उसे वापस लेने का विकल्प नहीं है। 

पिछले वर्ष नवंबर में CCI ने मेटा पर अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल करने के लिए 213.14 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई थी। यह मामला इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की लगभग चार वर्ष पहले लागू की गई प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है। CCI ने Meta और वॉट्सऐप को एक निश्चित अवधि में सुधार के कुछ उपाय करने के भी निर्देश दिए थे। इस पॉलिसी के तहत, वॉट्सऐप और Facebook जैसी Meta की अन्य फर्मों के बीच डेटा शेयरिंग को अनिवार्य किया गया था। इससे यूजर्स की प्राइवेसी और मार्केट में निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे थे। 
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आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

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