पिछले कुछ वर्षों में इस केंद्र शासित प्रदेश में सेना और पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों पर काफी नियंत्रण किया है। इस गैर कानूनी फंडिंग से जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों का नेटवर्क दोबारा मजबूत हो सकता है
इस जरिए से मिली रकम के सोर्स का पता लगाना मुश्किल होता है
देश में पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टो का सेगमेंट तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही गैर कानूनी गतिविधियों में क्रिप्टो का इस्तेमाल भी बढ़ा है। सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि जम्मू और कश्मीर में विदेशी फंड को पहुंचाने के लिए 'क्रिप्टो हवाला' नेटवर्क का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इस गैर कानूनी जरिए से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों के लिए होने का शक है।
एक मीडिया रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि क्रिप्टोकरेंसीज के हवाले नेटवर्क से मिलने वाले फंड से जम्मू और कश्मीर में कट्टरपंथियों को मजबूत किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस केंद्र शासित प्रदेश में सेना और पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों पर काफी नियंत्रण किया है। इस गैर कानूनी फंडिंग से जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों का नेटवर्क दोबारा मजबूत हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने कहा कि क्रिप्टो हवाला नेटवर्क उसी तरह चलता है जैसे 'हवाला' के सिस्टम को नॉन-बैंकिंग चैनल्स के जरिए रकम भेजकर चलाया जाता है। क्रिप्टो हवाला नेटवर्क में रकम के सोर्स का पता लगाना मुश्किल होता है। जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की एक संयुक्त जांच में पता चला है कि चीन, म्यांमार, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों में मौजूद हैंडलर्स जम्मू और कश्मीर में लोगों को प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स बनाने के लिए कह रहे हैं। इन क्रिप्टो वॉलेट्स को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPNs) के इस्तेमाल से बनाया जाता है। इसके लिए नो युअर कस्टमर (KYC) की जरूरत नहीं होती।
क्रिप्टो सेगमेंट से जुड़े स्कैम के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में इस तरह के एक मामले की जांच में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर छापे मारे थे। इसमें कथित तौर पर जाली क्रिप्टोकरेंसी पॉन्जी स्कीम और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कैम से कई इनवेस्टर्स के साथ लगभग 2,300 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया गया है। इस मामले में इनवेस्टर्स को ज्यादा रिटर्न का लालच दिया जाता था। इसमें जाली टोकन के प्राइसेज में हेरफर की जाती थी ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस मामले की जांच शुरू की है। इस तरह के स्कैम से मिली रकम के भी गैर कानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का शक है।
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