ग्रहों की लिस्ट में जुड़ा एक नया नाम! बिना खोजे ही NASA को मिला Beta Pictoris d

NASA के James Webb Space Telescope ने 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित Beta Pictoris स्टार सिस्टम में नए विशाल ग्रह Beta Pictoris d की खोज की है। खास बात यह है कि वैज्ञानिक इस ग्रह की तलाश नहीं कर रहे थे और इसकी पहचान एक नई तकनीक से हुई।

ग्रहों की लिस्ट में जुड़ा एक नया नाम! बिना खोजे ही NASA को मिला Beta Pictoris d

Photo Credit: NASA

James Webb Telescope ने 63 प्रकाश वर्ष दूर नया विशाल ग्रह Beta Pictoris d खोजा

ख़ास बातें
  • NASA के James Webb Telescope ने नया विशाल Exoplanet खोजा
  • Beta Pictoris d की पहचान वातावरण के केमिकल सिग्नेचर से हुई
  • यह खोज भविष्य में नए ग्रह खोजने के तरीकों को बदल सकती है
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NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने एक नए विशाल ग्रह (Giant Exoplanet) की खोज की है। दिलचस्प बात यह है कि वैज्ञानिक इस ग्रह की तलाश नहीं कर रहे थे। वे पहले से मौजूद एक दूसरे ग्रह का अध्ययन कर रहे थे, तभी उन्हें यह नया ग्रह मिला। नए ग्रह का नाम Beta Pictoris d रखा गया है। इस खोज के बाद Beta Pictoris ऐसा दूसरा ज्ञात ग्रह तंत्र (Planetary System) बन गया है, जहां कम से कम तीन ग्रहों की सीधे तौर पर पहचान की जा चुकी है।

Beta Pictoris d हमारे सौर मंडल से बाहर मौजूद एक Exoplanet है। यह ग्रह Beta Pictoris नाम के एक युवा तारे की परिक्रमा करता है, जो पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इस तारे की उम्र लगभग 2.3 करोड़ साल बताई गई है।

इस सिस्टम में पहले से Beta Pictoris b और Beta Pictoris c नाम के दो विशाल ग्रह मौजूद थे। अब तीसरे ग्रह की खोज ने इसे वैज्ञानिकों के लिए और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। आमतौर पर वैज्ञानिक किसी ग्रह की पहचान उसकी रोशनी या उसकी वजह से दिखाई देने वाले बदलावों के आधार पर करते हैं। लेकिन Beta Pictoris d की खोज एक अलग तरीके से हुई।

James Webb Telescope ने ग्रह के वातावरण में मौजूद Carbon Monoxide के खास केमिकल सिग्नेचर को पहचाना। बाद में टेलीस्कोप के दूसरे इंस्ट्रूमेंट से पानी की भाप और मीथेन की भी पुष्टि हुई, जिससे वैज्ञानिकों को यकीन हो गया कि यह वास्तव में एक नया ग्रह है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि Beta Pictoris d का द्रव्यमान बृहस्पति से कम से कम दो गुना ज्यादा है। हालांकि, यह अपने सिस्टम के तीनों ज्ञात ग्रहों में सबसे छोटा माना जा रहा है।

यह ग्रह अपने तारे से लगभग 30 खगोलीय इकाइयों (Astronomical Unit) की दूरी पर चक्कर लगाता है। तुलना करें तो हमारे सौर मंडल में Neptune भी लगभग इतनी ही दूरी पर सूर्य की परिक्रमा करता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में दूसरे तारों के आसपास ग्रहों की तलाश के तरीके को बदल सकती है। अब केवल ग्रह की रोशनी पर निर्भर रहने की बजाय उसके वातावरण में मौजूद रासायनिक तत्वों की मदद से भी नए ग्रह खोजे जा सकेंगे।

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