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मक्का के पास ड्रोन को हवा में कैसे मार गिराया? Saudi Arabia की Air Defence और Drone Detection Technology कैसे करती है काम

मक्का के पास एक ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले इंटरसेप्ट किया गया। जानिए ड्रोन डिटेक्शन और एयर डिफेंस सिस्टम कैसे काम करते हैं।

मक्का के पास ड्रोन को हवा में कैसे मार गिराया? Saudi Arabia की Air Defence और Drone Detection Technology कैसे करती है काम

Photo Credit: AI Generated

मक्का के पास ड्रोन को इंटरसेप्ट करने में एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी की भूमिका

ख़ास बातें
  • मक्का के पास ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से पहले इंटरसेप्ट किया गया
  • रडार और दूसरे सेंसर ड्रोन को खोजकर उसकी एक्टिविटी ट्रैक करते हैं
  • जैमर और इंटरसेप्टर ड्रोन को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं
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साऊदी अरब के मक्का के पास एक ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट किए जाने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसी छोटे ड्रोन को इतनी दूरी से कैसे खोजा जाता है और फिर उसे हवा में कैसे रोका जाता है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के मुताबिक, ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया था। इस घटना में इस्तेमाल किए गए खास एयर डिफेंस सिस्टम या इंटरसेप्टर की जानकारी सऊदी अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में इस घटना को समझने के लिए साऊदी अरब की काउंटर-ड्रोन और एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी के काम करने का तरीका समझना जरूरी है।

मक्का के पास क्या हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि मंगलवार शाम एक ड्रोन को मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट किया गया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इसे प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। हालांकि, सऊदी अरब ने ड्रोन का मॉडल, उसका लॉन्च पॉइंट या उसे नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किए गए सिस्टम की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। वहीं हूती पक्ष ने मक्का या दूसरे धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है।

ड्रोन डिटेक्शन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

किसी ड्रोन को हवा में मार गिराने से पहले सबसे जरूरी काम उसे ढूंढना और ट्रैक करना होता है। इसके लिए काउंटर-UAV सिस्टम में रडार जैसे सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकता है। छोटे ड्रोन का आकार बड़ा विमान या मिसाइल की तुलना में काफी कम होता है, इसलिए इन्हें खोजने के लिए खास डिटेक्शन और ट्रैकिंग तकनीक की जरूरत पड़ती है।

साऊदी अरब में देखे गए एक Counter-UAV सिस्टम के बारे में Janes ने बताया है कि इसमें रडार के साथ Electro-Optical और Signals Intelligence सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ये सेंसर किसी UAV को खोजने और उसकी पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

रडार के बाद होती है ड्रोन की पहचान

सिर्फ किसी उड़ती हुई चीज का पता चलना पर्याप्त नहीं होता। एयर डिफेंस सिस्टम को यह भी समझना होता है कि सामने मौजूद सब्जेक्ट क्या है, किस दिशा में जा रही है और उसका रास्ता किस तरफ है। इसके लिए रडार से मिली जानकारी को दूसरे सेंसर के डेटा के साथ मिलाया जा सकता है।

Electro-Optical कैमरे यहां विजुअल पहचान में मदद कर सकते हैं, जबकि सिग्नल्स इंटेलिजेंस सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकता है। इसके बाद कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम इन जानकारियों को एक साथ इस्तेमाल करके खतरे को ट्रैक करता है।

ड्रोन को रोकने के लिए कई तरीके

Counter-Drone Technology में किसी UAV को रोकने के लिए सिर्फ मिसाइल का इस्तेमाल जरूरी नहीं है। कुछ सिस्टम जैमर के जरिए ड्रोन के कम्युनिकेशन या नेविगेशन सिग्नल को बाधित कर सकते हैं। इसे आम तौर पर सॉफ्ट किल तरीका कहा जाता है।

दूसरी तरफ, जरूरत पड़ने पर ड्रोन को फिजिकल तरीके से नष्ट करने वाले हार्ड किल सिस्टम भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें गन, मिसाइल या दूसरे इंटरसेप्टर शामिल हो सकते हैं। Janes ने साऊदी अरब में देखे गए Counter-UAV सिस्टम के साथ जैमर और दूसरे सेंसर का उल्लेख किया है। हालांकि, इन्हीं में से किसी सिस्टम का इस्तेमाल मक्का के पास हुई इस घटना में हुआ था, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

साऊदी अरब की एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी कैसे काम कर सकती है?
किसी संवेदनशील इलाके की सुरक्षा में आम तौर पर एक ही सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय कई लेवल की सुरक्षा रखी जाती है। एक लेवल पर रडार और दूसरे सेंसर खतरे को खोज सकते हैं, फिर कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क उसकी जानकारी को संबंधित एयर डिफेंस यूनिट तक पहुंचा सकता है।

इसके बाद खतरे की प्रकृति और स्थिति के आधार पर जैमिंग या किसी दूसरे इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। साऊदी अरब में काउंटर-यूएवी टेक्नोलॉजी के ऐसे सिस्टम देखे जा चुके हैं जिनमें रडार, कैमरा, RF डिटेक्शन और जैमर जैसी तकनीकें शामिल हैं।

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नितेश पपनोई Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech products like smartphones, headphones, and smartwatches. At Gadgets 360, he is covering all ...और भी
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