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Medical - ख़बरें

  • Apple Watch ने बचाई एथलीट की जान! इस फीचर में दिखे गंभीर बिमारी के संकेत, समय रहते हुआ इलाज
    ट्रायथलॉन की तैयारी कर रहे Connor की हार्ट रेट ट्रेनिंग के दौरान 219 बीट प्रति मिनट तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने Apple Watch की ECG ऐप से हार्ट रिदम की जांच की, जिसमें Atrial Fibrillation यानी AFib के संकेत दिखाई दिए। इसके बाद डॉक्टर से जांच कराने पर उनके दिल से जुड़ी एक जन्मजात समस्या का पता चला, जिसके बारे में उन्हें पहले जानकारी नहीं थी। स्थिति के कारण उन्हें बाद में ओपन-हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। हालांकि, Apple Watch ने बीमारी का डायग्नोसिस नहीं किया था, बल्कि ECG रीडिंग में दिखे संकेतों के बाद Connor को मेडिकल जांच कराने के लिए प्रेरित किया।
  • दिमाग से कंट्रोल हो रहा है लैपटॉप! Neuralink इम्प्लांट के बाद शख्स ने शेयर किया 100 दिनों का अनुभव
    Neuralink के N1 ब्रेन इम्प्लांट का इस्तेमाल करने वाले एक पैरालाइज्ड मरीज ने 100 दिन बाद अपने अनुभव साझा किए हैं। Jon L. Noble नाम के इस मरीज के मुताबिक वह अब अपने दिमाग की मदद से कंप्यूटर कंट्रोल कर पा रहे हैं। सर्जरी के कुछ हफ्तों बाद ही उन्होंने कर्सर कंट्रोल, टाइपिंग और यहां तक कि गेमिंग भी शुरू कर दी। कंपनी के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर आधारित है, जो भविष्य में दिव्यांग लोगों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। हालांकि इसके लंबे समय के असर पर अभी और रिसर्च की जरूरत है।
  • Google ने बंद किया वो AI सर्च फीचर जो देता था हेल्थ की सलाह और जानकारी
    वॉट पीपल सजेस्ट हटा दिया गया है। कंपनी ने यह कदम सर्च पेज को काफी आसान बनाने के लिए उठाया गया है और इसका इस फीचर की क्वालिटी या सिक्योरिटी से कोई लेना-देना नहीं है। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब कंपनी लाखों यूजर्स को हेल्थ संबंधित जानकारी और सलाह प्रदान करने के लिए AI के इस्तेमाल को लेकर जांच का सामना कर रही है। पहले रिपोर्ट में पता चला था कि गूगल AI ओवरव्यू में गलत और भ्रामक हेल्थ जानकारी से लोगों को नुकसान का खतरा था।
  • भारत के Medical Dialogues ने जीता Google का JournalismAI इनोवेशन चैलेंज
    वैश्विक स्तर पर आयोजित #JournalismAI Innovation Challenge का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारिता में इनोवेशन को बढ़ाना और इसके भविष्य को बेहतर बनाना है। यह प्रतिस्पर्धा समाचार संगठनों को ऑडिएंस का जुड़ाव और रेवेन्यू में ग्रोथ को बढ़ाने् के लिए AI से जुड़े सॉल्यूशंस को तलाशने के लिए सशक्त बनाती है।
  • स्मार्ट गैजेट्स के बाद अब स्मार्ट दवा! चिप वाली गोली पेट में जाके भेजेगी सिग्नल, जानें किस काम आएगी
    MIT की नई रिसर्च में एक स्मार्ट पिल पेश की गई है, जो मरीज के पेट में पहुंचते ही रेडियो सिग्नल भेजकर यह कन्फर्म कर देती है कि दवा निगली जा चुकी है। इस पिल में बायोडिग्रेडेबल RF एंटीना का इस्तेमाल किया गया है, जो कुछ दिनों में शरीर के अंदर घुल जाता है। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, जिन्हें ट्रांसप्लांट, टीबी या HIV जैसी बीमारियों में नियमित दवा लेना जरूरी होता है। इससे डॉक्टर मरीज की दवा लेने की आदत पर बेहतर नजर रख सकेंगे।
  • Zomato CEO के माथे में क्या लगा था? इस दिमाग पढ़ने वाले डिवाइस ने सोशल मीडिया पर छेड़ दी बहस
    Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal के CEO Deepinder Goyal हाल ही में एक पॉडकास्ट में नजर आए, जहां उनके टेंपल पर लगे एक छोटे डिवाइस ने सोशल मीडिया पर खूब ध्यान खींचा। यह डिवाइस Temple नाम का एक एक्सपेरिमेंटल वियरेबल बताया जा रहा है, जो ब्रेन ब्लड फ्लो ट्रैक करने का दावा करता है। हालांकि, AIIMS Delhi से जुड़े डॉक्टरों ने इसकी वैज्ञानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं और Gravity Ageing Hypothesis को लेकर भी शंकाएं जताई हैं। फिलहाल यह डिवाइस चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।
  • सरकारी अस्पतालों में AI की एंट्री, आम से गंभीर बिमारियों का पता लगाएगा देश का पहला AI क्लिनिक
    भारत के सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम में एक अहम कदम उठाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित GIMS में देश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित AI क्लिनिक शुरू किया गया है। यह क्लिनिक GIMS Centre for Medical Innovation के तहत स्थापित किया गया है, जहां डॉक्टरों और मरीजों को AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशन्स का बेनिफिट मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को रियल-वर्ल्ड क्लिनिकल एनवायरनमेंट में अपने सॉल्यूशन्स को टेस्ट और वैलिडेट करने का मौका देना है। इससे इलाज को ज्यादा सटीक, तेज और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाने में मदद मिलेगी।
  • दुनिया का सबसे छोटा रोबोट तैयार, साइज रेत जैसा लेकिन सोचने और चलने की ताकत
    University of Pennsylvania और University of Michigan के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे छोटे पूरी तरह प्रोग्रामेबल और ऑटोनॉमस रोबोट तैयार किए हैं। ये माइक्रो रोबोट रेत के एक दाने से भी छोटे हैं और लाइट की मदद से चलते व प्रोग्राम होते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ये रोबोट अपने आसपास के माहौल को सेंस कर सकते हैं और ग्रुप में मिलकर भी काम कर सकते हैं। Science Robotics और PNAS में प्रकाशित स्टडीज़ के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल ट्रीटमेंट, सेल-लेवल हेल्थ मॉनिटरिंग और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
  • चीन ने यहां भी बाजी मार ली! बनाया AI हाथ जो करेगा ऑपरेशन में मदद
    चीन की Chinese University of Hong Kong (CUHK) की रिसर्च टीम ने मेडिकल टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने ऐसा AI सिस्टम डेवलप किया है जो सर्जिकल रोबोटिक आर्म को खुद कंट्रोल कर सकता है और ऑपरेशन थिएटर में सर्जन के “तीसरे हाथ” जैसा काम करता है। इसका मतलब है कि अब जटिल और बारीक काम जैसे टिशू हटाना, गॉज पकड़ना या ब्लड वैसल क्लिप करना, बिना इंसानी निर्देश के भी हो सकता है। खास बात ये है कि यह सिस्टम सिर्फ कैमरे से आने वाली रियल-टाइम इमेजेज के आधार पर काम करता है और इसमें किसी एक्स्ट्रा सेंसर की जरूरत नहीं पड़ती।
  • AI की मदद से हुआ बच्चा, IVF की दुनिया में नई मेडिटकल क्रांति!
    अमेरिका के Columbia University Fertility Center में मेडिकल साइंस ने नई मिसाल कायम की है। यहां एक दंपति, जो 18 साल से बच्चे के लिए संघर्ष कर रहा था, पहली बार मां-बाप बनने की उम्मीद पा सका और यह सब संभव हुआ AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदौलत। यह उपलब्धि उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्हें अब तक बार-बार IVF में नाकामी झेलनी पड़ी थी।
  • ब्लड टेस्ट बताएगा कितना बूढ़ा हो चुका है शरीर का अंग! समय से पहले हो सकेगा इलाज!
    स्टडी कहती है कि हर 5 में से 1 स्वस्थ व्यक्ति, जो 50 साल या उससे ऊपर का है, में कम से कम एक अंग ऐसा होता है जो बाकी अंगों की तुलना में ज्यादा तेजी से बूढ़ा हो रहा होता है।
  • कोलकाता में फंगस से बीमार हुआ शख्स! सामने आया दुनिया का पहला केस, जानें क्या है ये बीमारी
    केस को ScienceDirect के Medical Mycology Case Reports नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
  • नींद कम लेने से बढ़ सकता है मोटापा, नई स्टडी में हुआ खुलासा
    यह रिसर्च अमेरिका के नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे में हिस्सा लेने वाले 18-59 वर्ष की आयु के 5,000 से अधिक व्यस्कों पर आधारित है
  • AIIMS में शुरू होगा 5G नेटवर्क, मेडिकल केयर में टेक्नोलॉजी के अधिकतम इस्तेमाल का टारगेट
    एम्स में प्रति दिन लगभग 50,000 लोग आते हैं और अच्छी मोबाइल कनेक्टिविटी जरूरी है। एम्स में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां शून्य या बहुत खराब मोबाइल कनेक्टिविटी है
  • चीन में कोरोना मचा रहा भारी तबाही, पिछले 30 दिनों में लगभग 60,000 लोगों की मृत्यु
    पिछले महीने चीन के प्रेसिडेंट Xi Jinping की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बाद जीरो कोविड पॉलिसी को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद कोरोना के Omicron वेरिएंट से संक्रमण तेजी से फैला था

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