अब AI बेस्ड STAR (Sperm Tracking and Recovery) तकनीक ने पूरी सूरत बदल दी। ये सिस्टम लाखों माइक्रोस्कोपिक इमेजेस को हाई-रिजॉल्यूशन से स्कैन करता है और उनमें छुपे, चलने-फिरने वाले, बेहद कमोर स्पर्म को भी डिटेक्ट करने में माहिर है।
Photo Credit: Unsplash/ Igor Omilaev
फिलहाल यह STAR टेक्नोलॉजी सिर्फ Columbia University Fertility Center में उपलब्ध है
अमेरिका के Columbia University Fertility Center में मेडिकल साइंस ने नई मिसाल कायम की है। यहां एक दंपति, जो 18 साल से बच्चे के लिए संघर्ष कर रहा था, पहली बार मां-बाप बनने की उम्मीद पा सका और यह सब संभव हुआ AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदौलत। यह उपलब्धि उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्हें अब तक बार-बार IVF में नाकामी झेलनी पड़ी थी।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कपल को लंबे समय से मेल इन्फर्टिलिटी (azoospermia) की वजह से सफर करना पड़ रहा था, ऐसी स्थिति जिसमें स्पर्म प्रैक्टिकली मौजूद ही नहीं दिखते। पिछले 18 सालों में उन्होंने सफरिंग, मेडिकल खर्चे और इमोशनली थकाने वाले IVF साइकल कई देशों में ट्राय किए पर हर बार परिणाम शून्य रहा। डॉक्टर्स ने आखिरी विकल्प के तौर पर दर्दनाक सर्जरी या डोनर स्पर्म सजेस्ट किया, लेकिन कपल बायोलॉजिकल बच्चा ही चाहता था।
अब AI बेस्ड STAR (Sperm Tracking and Recovery) तकनीक ने पूरी सूरत बदल दी। ये सिस्टम लाखों माइक्रोस्कोपिक इमेजेस को हाई-रिजॉल्यूशन से स्कैन करता है और उनमें छुपे, चलने-फिरने वाले, बेहद कमोर स्पर्म को भी डिटेक्ट करने में माहिर है। इसी केस में STAR ने करीब 80 लाख इमेज स्कैन करके तीन हेल्दी स्पर्म खोज निकाले, जिन्हें फिर इंजेक्ट कर महिला के एग्स से सफल IVF कराया गया और कपल पहली बार प्रेगनेंट होने में सफल रहा।
AI से अब मेल इन्फर्टिलिटी के जटिल मामलों में भी सर्जरी की जरूरत बेहद कम हो गई है, और बायोलॉजिकल पैरेंटहुड का सपना ज्यादा सटीक व कम खर्च में पूरा हो सकता है। STAR जैसे सिस्टम की मदद से स्पर्म डिटेक्शन और सलेक्शन की लागत करीब $3000 (लगभग 2.63 लाख रुपये) होने की उम्मीद है, जो पारंपरिक IVF की महंगी $30,000 (करीब 26 लाख रुपये) तक की कीमत के मुकाबले बेहद कम है।
फिलहाल यह STAR टेक्नोलॉजी सिर्फ Columbia University Fertility Center में उपलब्ध है, मगर इसकी सफलता देखते हुए दुनिया के कई फर्टिलिटी क्लीनिक इसे अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसे AI बेस्ड सिस्टम्स इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।
Columbia University की STAR तकनीक ने लाखों माइक्रोस्कोपिक इमेजेस स्कैन कर छुपे हुए स्पर्म खोजे और IVF में कामयाबी दिलाई।
पुरुष पार्टनर में Azoospermia था, यानी स्पर्म मौजूद नहीं था, जिसके कारण प्रेगनेंसी संभव नहीं हो पा रही थी।
यह AI आधारित इमेजिंग तकनीक बेहद कम मात्रा में मौजूद सही स्पर्म की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से निकालती है।
फिलहाल यह तकनीक केवल Columbia University Fertility Center में उपलब्ध है, लेकिन भविष्य में व्यापक रूप से अपनाई जा सकती है।
AI की मदद से स्पर्म और एम्ब्रियो का चयन बेहतर बनता है, इलाज सस्ते और अधिक प्रभावी होते हैं।
AI आधारित सिस्टम में सर्जिकल एक्सट्रैक्शन की जरूरत कम हो जाती है और सफलता दर में सुधार होता है।
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