MIT के इंजीनियर्स ने एक ऐसी स्मार्ट पिल डेवलप की है, जो निगले जाने के बाद पेट से रेडियो सिग्नल भेजकर कन्फर्म करती है कि मरीज ने दवा ली है या नहीं।
Photo Credit: MIT
MIT की स्मार्ट पिल पेट से सिग्नल भेजकर दवा निगलने की पुष्टि करती है
दवाइयों को समय पर न लेना दुनियाभर में एक बड़ी हेल्थ समस्या मानी जाती है। इसी परेशानी का टेक्नोलॉजी बेस्ड समाधान निकालते हुए MIT के इंजीनियर्स ने एक ऐसी स्मार्ट गोली डेवलप की है, जो निगले जाने के बाद यह कन्फर्म कर सकती है कि मरीज ने दवा ली है या नहीं। रिसर्चर्स का मानना है कि यह तकनीक खास तौर पर उन मरीजों के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती है, जिन्हें महीनों या सालों तक नियमित दवाइयां लेनी पड़ती हैं।
MIT की इस रिसर्च में ऐसी गोली तैयार की गई है, जिसके अंदर एक खास रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिस्टम लगाया गया है। जैसे ही मरीज गोली निगलता है और वह पेट तक पहुंचती है, यह सिस्टम अपने आप एक सिग्नल बाहर मौजूद रिसीवर तक भेज देता है। इससे डॉक्टर या हेल्थकेयर सिस्टम को यह जानकारी मिल जाती है कि दवा ली जा चुकी है।
खास बात यह है कि इस तकनीक को मौजूदा दवाइयों के कैप्सूल में ही जोड़ा जा सकता है। यानी मरीज को किसी अलग तरह की गोली लेने की जरूरत नहीं होगी।
नेचर स्टडी में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, इस पिल में मौजूद RF एंटीना जिंक और सेल्यूलोज जैसे सुरक्षित मटीरियल से बनाया गया है। जब गोली पेट में पहुंचती है, तो इसकी बाहरी कोटिंग टूट जाती है और एंटीना एक्टिव हो जाता है। यह एंटीना बाहर से आने वाले सिग्नल को पकड़कर जवाब में यह कन्फर्मेशन भेजता है कि दवा निगली गई है।
इस पूरी प्रक्रिया में करीब 10 मिनट का समय लगता है। कुछ दिनों के अंदर यह एंटीना खुद ही पेट में घुल जाता है। सिर्फ एक बेहद छोटा RF चिप बचता है, जो शरीर से सामान्य पाचन प्रक्रिया के जरिए बाहर निकल जाता है।
रिसर्च टीम का कहना है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है, जिनके लिए दवा मिस करना गंभीर खतरा बन सकता है। इसमें ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां लेने वाले मरीज, टीबी और HIV जैसे लंबे इलाज वाले संक्रमण, स्टेंट लगवाने वाले हार्ट पेशेंट्स और कुछ न्यूरोलॉजिकल या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मरीज शामिल हैं। ऐसे मामलों में अगर दवा समय पर न ली जाए, तो इलाज पूरी तरह फेल हो सकता है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, दवाइयों को ठीक से न लेने की वजह से हर साल लाखों लोगों की सेहत बिगड़ती है और हेल्थकेयर सिस्टम पर अरबों डॉलर का एक्स्ट्रा बोझ पड़ता है। कई बार डॉक्टरों को यह भी पता नहीं चल पाता कि मरीज की हालत दवा असर न करने की वजह से बिगड़ रही है या दवा ली ही नहीं जा रही। यह स्मार्ट पिल सिस्टम इस गैप को भर सकता है और इलाज को ज्यादा ट्रैक करने लायक बना सकता है।
फिलहाल इस तकनीक का सफल टेस्ट जानवरों पर किया गया है, जहां पेट के अंदर से भेजा गया सिग्नल दो फीट तक की दूरी से रिसीव किया जा सका। अगला कदम इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल का है। भविष्य में इसे एक वियरेबल डिवाइस से जोड़ा जा सकता है, जो दवा लेने का डेटा सीधे डॉक्टर या अस्पताल तक भेजेगा।
अगर यह तकनीक आम इस्तेमाल तक पहुंचती है, तो यह न सिर्फ दवाइयों के पालन को बेहतर बना सकती है, बल्कि मरीजों की सेहत और इलाज की सफलता दर को भी काफी हद तक बढ़ा सकती है।
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