Google Chrome

Google Chrome - ख़बरें

  • Google Chrome या Safari में अपना ब्राउजिंग डाटा कैसे करें साफ, ये है आसान तरीका
    यूजर्स वेब ब्राउजर पर ब्राउज करते हैं तो ये ब्राउजर यूजर्स के द्वारा देखी गई वेबसाइट, डाउनलोड की गई फाइल और सर्च जैसी जानकारी स्टोर कर सकते हैं। यह ब्राउजिंग डाटा आपके अनुभव को बेहतर बना सकता है, लेकिन इससे प्राइवेसी संबंधी चिंताएं भी जनरेट हो सकती हैं। अगर खासतौर पर जब आप शेयर और पब्लिक टूल का उपयोग कर रहे हैं। ब्राउजिंग डाटा साफ करने से प्राइवेसी की सिक्योरिटी होती है और ऑनलाइन ट्रैकिंग भी कम हो जाती है।
  • Chrome Keyboard Shortcuts (2026): ये शॉर्टकट्स सीख लिए तो माउस छूने की जरूरत नहीं पड़ेगी!
    Google Chrome दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ब्राउजर है, लेकिन इसके कई जरूरी Keyboard Shortcuts के बारे में ज्यादातर यूजर्स नहीं जानते। Chrome के 2026 अपडेट्स के साथ अब नए AI और Side Panel शॉर्टकट्स भी जोड़े गए हैं, जिनसे बिना माउस इस्तेमाल किए ब्राउजिंग काफी तेज हो जाती है। इस गाइड में टैब मैनेजमेंट, एड्रेस बार कंट्रोल, पेज नेविगेशन, डाउनलोड हिस्ट्री और Incognito मोड जैसे जरूरी Chrome Shortcuts बताए गए हैं। इन कमांड्स की मदद से यूजर्स तेजी से टैब स्विच कर सकते हैं, बंद टैब वापस ला सकते हैं और अपने रोजमर्रा के इंटरनेट इस्तेमाल को ज्यादा आसान बना सकते हैं।
  • Google Chrome का ये छिपा फीचर ऑन किया, तो Ads और Pop-ups भूल जाएंगे!
    Google Chrome में एक इन-बिल्ट Reading Mode फीचर मिलता है, जो किसी भी वेब पेज को साफ-सुथरे रीडिंग फॉर्मेट में बदल देता है। यह फीचर Ads, Pop-ups और ऑटो-प्ले वीडियो जैसी फालतू चीजों को हटाकर सिर्फ जरूरी टेक्स्ट और इमेज दिखाता है। यूजर्स इसमें फॉन्ट, टेक्स्ट साइज, बैकग्राउंड कलर और लाइन स्पेसिंग भी अपनी सुविधा के अनुसार बदल सकते हैं। यह फीचर खासतौर पर लंबे आर्टिकल, ब्लॉग और रिसर्च कंटेंट पढ़ने के दौरान काफी काम आता है। Chrome के menu में जाकर More Tools के अंदर Reading Mode ऑप्शन को ऑन किया जा सकता है।
  • Google Chrome में आया जबरदस्त फीचर! अब छुपा सकते हैं अपनी असल लोकेशन, जानें कैसे
    Google ने नया फीचर Chrome यूजर्स के लिए दिया है जो सबसे पहले एंड्रॉयड यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा। Chrome यूजर्स के पास अब यह तय करने का अधिकार होगा कि कोई लोकेशन वेबसाइट उनकी असल लोकेशन को एक्सेस कर सकती है या नहीं। यानी अब प्रीसाइज लोकेशन शेयर करने की बाध्यता खत्म हो गई है। आप अपने आस पड़ोस की लोकेशन देकर भी काम चला सकते हैं।
  • Google I/O 2026: गूगल के सबसे बड़े डेवलपर इवेंट की डेट अनाउंस, AI और Android पर रहेगा फोकस
    Google ने अपने डेवलपर इवेंट Google I O 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है, जो 19 और 20 मई को आयोजित होगा। इस इवेंट में AI, Android, Chrome और Cloud प्लेटफॉर्म्स से जुड़े नए अपडेट्स पेश किए जाएंगे। कंपनी इस बार “agentic coding” पर खास ध्यान दे रही है, जिसमें AI की मदद से कोडिंग प्रोसेस को ऑटोमेट करने वाले टूल्स दिखाए जाएंगे। इवेंट में Google Keynote और Developer Keynote के अलावा कई टेक्निकल सेशन्स भी होंगे। इसके बाद 21 मई को ऑन-डिमांड सेशन्स और कोडलैब्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • 5 एंड्रॉयड ऐप आपकी जिंदगी को बना सकते हैं बेहद आसान!
    अगर स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल करना आता है तो हम जिंदगी को काफी आसान और व्यवस्थित बना सकते हैं। आज हम आपको एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले पांच ऐसे ऐप के बारे में बताएंगे जिनके द्वारा आप अपनी जिंदगी को काफी आसान बना सकते हैं।
  • Google Chrome चलाते हैं तो ये खबर आपके लिए! हैक हो सकता है सिस्टम, तुरंत करें ये काम
    सरकार की साइबर एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए हाई सीवेरिटी चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि Chrome के पुराने वर्जन में गंभीर “Use After Free” खामी पाई गई है, जिससे हैकर्स टारगेट सिस्टम पर मनमाना कोड चला सकते हैं। यदि ब्राउजर Linux पर 144.0.7559.75 या Windows/Mac पर 145.0.7632.75/76 से पुराना है, तो जोखिम बढ़ सकता है। एजेंसी ने यूजर्स को तुरंत लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि डेटा चोरी और मालवेयर हमलों से बचा जा सके।
  • Google Chrome में Android के लिए आया बड़े काम का फीचर!
    Google Chrome में अब टैब को Pin करने की सुविधा कंपनी ने उपलब्ध करवा दी है। यह फीचर कंपनी ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया है। इससे अब यूजर अपने पसंद के टैब को ऊपर पिन कर पाएंगे। जैसे ब्राउजर खुलेगा ये टैब सबसे ऊपर दिखाई देंगे, भले ही आप ऐप को बंद कर दें।
  • Apple की चेतावनी iPhone यूजर्स बंद कर दें Google Chrome का इस्तेमाल
    Safari सिस्टम कॉन्फिगरेशन का एक आसान वर्जन प्रदान करता है जिससे अधिकतर डिवाइस ट्रैकर्स को समान नजर आते हैं, जिससे आपके डिवाइस को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इस साल डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग काफी खतरनाक रहा है, क्योंकि Google ने इस सीक्रेटिव टेक्नोलॉजी पर बैन को हटा दिया है जिसे डिसेबल नहीं किया जा सकता है। ट्रैकिंग कुकीज ऑप्ट आउट प्रदान करती हैं।
  • Google Chrome का ये वर्जन खतरे में! भारत की एजेंसी ने जारी किया अलर्ट
    भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए एक नया अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी Windows, macOS और Linux - तीनों प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे Chrome ब्राउजर को लेकर है। एजेंसी ने अपने नोट (CIVN-2025-0330) में दो हाई-सीवियरिटी कमजोरियों का जिक्र किया है, जिन्हें CVE-2025-13223 और CVE-2025-13224 के रूप में दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खामियों का फायदा उठाकर सिस्टम में दखल दिया जा सकता है और सर्विस को बाधित किया जा सकता है।
  • Chrome चला रहे हो तो हो जाओ सावधान! एक गलती और सिस्टम हो जाएगा हैक, यहां जानें बचने का तरीका
    भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने Google Chrome में कई गंभीर कमजोरियों की पहचान की है। एजेंसी के मुताबिक, Chrome के पुराने वर्जन (142.0.7444.59 से पहले) में ऐसी खामियां हैं जिनका फायदा उठा कर अटैकर किसी यूजर को फेक वेबसाइट पर भेजकर सिस्टम को हैक कर सकता है या डेटा चुरा सकता है। इन बग्स का असर Windows, macOS और Linux वर्जन पर देखा गया है। CERT-In ने सभी यूजर्स को तुरंत ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी है।
  • Chrome यूजर्स के लिए सरकार की चेतावनी! तुरंत अपडेट करें सिस्टम नहीं तो...
    भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए नई चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने एक हाई-सीवेरिटी 'रिमोट कोड एग्जिक्यूशन' (RCE) वल्नरेबिलिटी (CIVN-2025-0274) की जानकारी दी है, जो पुराने और अनपैच्ड Chrome वर्जन को प्रभावित कर रही है। इस खामी का फायदा उठाकर अटैकर्स किसी यूजर के सिस्टम पर रिमोट एक्सेस पा सकते हैं, जिससे डेटा चोरी, सिस्टम टेकओवर या सर्विस डिसरप्शन का खतरा है। ये खामी Chrome के उन वर्जन्स में पाई गई है जो 141.0.7390.122.123 से पुराने हैं।
  • Chrome और Edge यूज करते हो तो यह खबर आपके लिए है, सरकार ने दिया हाई-रिस्क अलर्ट!
    भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने हाल ही में चेतावनी जारी की है कि पुराने वर्जन के Google Chrome और Microsoft Edge (क्रोमियन-बेस्ड) ब्राउजर्स में मौजूद सिक्योरिटी खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स यूजर्स के सिस्टम में बिना अनुमति एंटर कर सकते हैं। इन खामियों के जरिए रिमोट कोड एक्जीक्यूशन और डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) अटैक्स किए जा सकते हैं। CERT-In ने यह अलर्ट 15 अक्टूबर को जारी किया।
  • Google Chrome यूजर्स पर मंडरा रहा खतरा, CERT-in ने जारी की चेतावनी- हैकर्स की आपके सिस्टम पर नजर
    CERT-In ने विंडोज, मैकओएस और लिनक्स के लिए गूगल क्रॉम में नजर आई खामियों और कमजोरियों की जानकारी दी है। एजेंसी का कहना है कि इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स सिस्टम पर खतरनाक कोड लगा सकते हैं। एजेंसी ने Windows, macOS और Linux पर Google Chrome का उपयोग करने वाले सभी यूजर्स और ऑर्गेनाइजेशन को लेटेस्ट वर्जन अपडेट करने की सलाह दी है।
  • आपका नाम, लोकेशन और हिस्ट्री सब हो रहा है ट्रैक, डेटा कलेक्शन के टेस्ट में Chrome+ Gemini की जोड़ी अव्वल!
    Google ने हाल ही में अपने Chrome ब्राउजर में Gemini AI को इंटीग्रेट करने की घोषणा की, जिससे यूजर्स के लिए ब्राउजिंग और टास्क मैनेजमेंट आसान हो जाएगा। हालांकि सुविधा जितनी आकर्षक है, उतना ही जरूरी है कि यूजर्स समझें कि इस इंटीग्रेशन के चलते कितनी व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा हो रही है। एक रिसर्च ने पांच प्रमुख एजेंटिक AI ब्राउजर्स पर डेटा प्राइवेसी को एनालाइज किया है और इसमें Chrome सबसे डेटा-हंग्री ब्राउजर के रूप में सामने आया है, यानी यह यूजर्स का सबसे ज्यादा डेटा इकट्ठा करता हुआ पाया गया है। चलिए विस्तार से जानते हैं।

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