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Apple ने चैरिटी प्रोग्राम में गड़बड़ी करने पर कई भारतीय वर्कर्स को किया टर्मिनेट

एपल के इस प्रोग्राम के कथित तौर पर गलत इस्तेमाल के लिए तेलुगु एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका की जांच की जा रही है

Apple ने चैरिटी प्रोग्राम में गड़बड़ी करने पर कई भारतीय वर्कर्स को किया टर्मिनेट

इन वर्कर्स ने कंपनी की ओर से चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशंस को दी गई रकम वापस हासिल कर ली थी

ख़ास बातें
  • इस मामले में कंपनी ने 180 से अधिक वर्कर्स के खिलाफ कार्रवाई की है
  • अमेरिका का फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (FBI) इस मामले की जांच कर रहा है
  • एपल के चैरिटी प्रोग्राम से जुड़ी ग्रांट्स में गड़बड़ी की गई थी
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अमेरिकी डिवाइसेज मेकर Apple ने कंपनी के ग्रांट्स प्रोग्राम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करने पर भारतीय मूल के कई वर्कर्स को टर्मिनेट किया है। इस चैरिटी प्रोग्राम में वर्कर्स के पात्र ऑर्गनाइजेशंस को डोनेशन देने पर इसके बराबर की रकम कंपनी भी देती थी। ऐसा आरोप है कि कुछ वर्कर्स ने विशेष चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशंस के साथ साठगांठ कर डोनेशन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की थी। इन वर्कर्स ने कंपनी की ओर से इन चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशंस को दी गई रकम वापस हासिल कर ली थी। 

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कंपनी ने 180 से अधिक वर्कर्स के खिलाफ कार्रवाई की है। एपल के इस प्रोग्राम के कथित तौर पर गलत इस्तेमाल के लिए तेलुगु एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका की जांच की जा रही है। यह जांच फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (FBI) के साथ ही इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस कर रहे हैं। 

पिछले महीने अमेरिका के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने तेलुगु एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका को समन जारी किया था। इस समन में डोनेशन के रिकॉर्ड और रकम के वितरण जैसे कई दस्तावेज मांगे गए हैं। तेलुगु एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के खिलाफ यह जांच कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली ग्रांट के गलत इस्तेमाल से जुड़ी हो सकती है। कंपनी ने इस बारे में कोई स्टेटमेंट नहीं दिया है। 

हाल ही में एपल पर अपने वर्कर्स को दबाने और उनकी गैर कानूनी तरीके से निगरानी करने का आरोप लगा था। इसे लेकर दर्ज कराए गए एक कानूनी मामले में कहा गया था कि कंपनी की ओर से गोपनीयता की ऐसी पॉलिसी लागू की जाती है जिससे वर्कर्स पर कार्य की स्थितियों को लेकर चर्चा करने पर प्रतिबंध लगता है। यह मामला अमेरिका में कैलिफोर्निया के कोर्ट में कंपनी की डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग डिविजन में कार्य करने वाले Amar Bhakta ने दायर किया था। इसमें दावा किया गया था कि एपल के वर्कर्स को उनके व्यक्तिगत डिवाइसेज पर ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए मजबूर किया जाता है जिससे उनकी ईमेल, फोटो लाइब्रेरी और अन्य व्यक्तिगत जानकारी को कंपनी एक्सेस कर सकती है। पिछले चार वर्षों से एपल में कार्य कर रहे भक्ता का कहना था कि उन्हें पॉडकास्ट पर अपने कार्य के बारे में चर्चा करने से रोका गया था। इसके साथ ही उन्हें LinkedIn प्रोफाइल से कार्य की स्थितियों के बारे में जानकारी को हटाने का निर्देश दिया गया था। 
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आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

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