होम मिनिस्ट्री ने चेतावनी दी है कि बहुत से क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए सायबर क्रिमिनल्स ने लगभग 624 करोड़ रुपये को खपाया है
इस वर्ष सितंबर तक भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम को खपाया गया है
पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टो मार्केट में फ्रॉड के मामले बढ़े हैं। क्रिप्टो एक्सचेंजों का इस्तेमाल सायबर क्रिमिनल्स के गैर कानूनी रकम को खपाने के लिए भी किए जाने का खतरा सामने आया है। होम मिनिस्ट्री ने चेतावनी दी है कि बहुत से क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए सायबर क्रिमिनल्स ने लगभग 624 करोड़ रुपये को खपाया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की शुरुआत से इस वर्ष सितंबर तक सायबर क्रिमिनल्स ने कम से कम 27 क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए लगभग 624 करोड़ रुपये की गैर कानूनी रकम को खपाया है। होम मिनिस्ट्री के तहत आने वाले इंडियन सायबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के रिकॉर्ड्स से पता चला है कि 2024-2025 के दौरान अपराध से मिली 25 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को 12 विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से ट्रांसफर किया गया है।
यह खुलासा नेशनल सायबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से जुटाए गए डेटा से हुआ है। इस बारे में एक अधिकारी ने बताया, "इन मामलों में पीड़ितों ने विशेषतौर पर जाली ट्रेडिंग या इनवेस्टमेंट ऐप्स के जरिए रकम लगाई थी। उन्हें यह नहीं पता था कि उनके फंड्स को डिजिटल एसेट्स में कन्वर्ट कर दर्जनों क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए खपाया जा रहा है।" उन्होंने कहा कि I4C ने इन मामलों में जिन क्रिप्टो एक्सचेंजों का इस्तेमाल किया है उनकी लिस्ट एन्फोर्समेंट एजेंसियों और फाइनेंस मिनिस्ट्री के तहत आने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) को दी है। होम मिनिस्ट्री की ओर से धोखाधड़ी के मामलों में जिन क्रिप्टो एक्सचेंजों की पहचान की गई है उनमें WazirX, Coin DCX, Giottus, Mudrex, CoinSwitch और ZebPay शामिल हैं।
NCRP के डेटा से पता चला है कि सायबर क्रिमिनल्स ने इस वर्ष सितंबर तक भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से मिली रकम को खपाया है। यह अवैध रकम फ्रॉड की 1,608 शिकायतों से जुड़ी है। पिछले वर्ष फ्रॉड की 1,264 शिकायतों से जुड़े लगभग 424 करोड़ रुपये को क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए ट्रांसफर किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 624 करोड़ रुपये की यह रकम सायबर अपराधों के जरिए की जाने वाली ठगी का बहुत कम हिस्सा है। इससे यह पता चलता है कि FIU के पास रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज सायबर क्रिमिनल्स के गलत इस्तेमाल को रोकने में सक्षम नहीं हैं।
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