बिटकॉइन का प्राइस 73,600 डॉलर से अधिक पर था। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी तेजी थी और इसका प्राइस लगभग 2,270 डॉलर का था
पिछले वर्ष अक्टूबर में इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी ने 1,26,198 डॉलर का पीक लेवल बनाया था
पिछले कुछ महीनों से क्रिप्टो मार्केट में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी कम थी। इसका असर बिटकॉइन और Ethereum जैसी बड़ी क्रिप्टोकरेंसीज पर पड़ रहा है। इस मार्केट में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। इससे मार्केट वैल्यू के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin में तेजी है। बिटकॉइन का सोमवार को प्राइस 73,000 डॉलर से अधिक पर था। Ethereum भी 2,200 डॉलर से अधिक पर ट्रेड कर रहा था।
इस रिपोर्ट को पब्लिश करने पर इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंज Coinmarketcap पर बिटकॉइन का प्राइस 73,600 डॉलर से अधिक पर था। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी तेजी थी और इसका प्राइस लगभग 2,270 डॉलर का था। इसके अलावा Tether और XRP जैसी क्रिप्टोकरेंसीज के प्राइस भी बढ़े हैं। पिछले एक दिन में क्रिप्टो का मार्केट कैपिटलाइजेशन तीन प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 2.52 लाख करोड़ डॉलर पर था।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन एक रेंज में ट्रेड कर रहा है। इसके पीछे ईरान पर हो रहे हमले, मैक्रोइकोनॉमिक डिवेलपमेंट्स और ऑयल प्राइसेज में उतार-चढ़ाव जैसे कारण हैं। हालांकि, इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की ओर से फंड लगाने और मार्केट सेंटीमेंट में कुछ सुधार होने से बिटकॉइन में मजबूती आई है। पिछले वर्ष अक्टूबर में इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी ने 1,26,198 डॉलर का पीक लेवल बनाया था। इसके बाद से इसका प्राइस 40 प्रतिशत से अधिक गिरा है। बिटकॉइन में गिरावट का असर Strategy (पहले MicroStrategy) जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स पर पड़ा है। इस अमेरिकी सॉफ्टवेयर मेकर के पास सात लाख से अधिक बिटकॉइन हैं। कंपनी के पास मौजूद बिटकॉइन्स की कुल वैल्यू 62 अरब डॉलर से अधिक की है।
हाल ही में बिटकॉइन एनालिस्ट Peter Schiff ने इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी में नुकसान बढ़ने की चेतावनी दी थी। Schiff ने कहा था, "अगर बिटकॉइन का प्राइस 50,000 डॉलर से नीचे जाता है तो यह 20,000 डॉलर तक गिर सकता है। यह इसके पीक लेवल से लगभग 84 प्रतिशत की गिरावट होगी। बिटकॉइन की सर्कुलेशन में सप्लाई दो करोड़ टोकन से ज्यादा हो गई है। इसके बाद लगभग 10 लाख बिटकॉइन की माइनिंग ही की जा सकती है। प्राइस में गिरावट का असर बिटकॉइन की माइनिंग पर भी पड़ रहा है। प्राइस घटने की वजह से इस सबसे महंगी क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग में प्रॉफिट कम हो गया है।
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