Meta ने Instagram, Facebook और Messenger पर टीन यूजर्स की सुरक्षा के लिए नए AI आधारित एज डिटेक्शन और वेरिफिकेशन फीचर्स लॉन्च किए हैं।
Photo Credit: Meta
Instagram और Facebook पर नए Teen Safety फीचर्स लागू होंगे
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कम उम्र के यूजर्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच Meta ने नए AI-पावर्ड एज वेरिफिकेशन और प्रोटेक्शन फीचर्स का ऐलान किया है। कंपनी अब AI की मदद से ऐसे यूजर्स की पहचान करने की कोशिश करेगी जो खुद को एडल्ट दिखाने के लिए गलत उम्र दर्ज करते हैं। Meta का कहना है कि इन नए सिस्टम्स का मकसद किशोर यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित ऑनलाइन एक्सपीरियंस देना और अंडरएज अकाउंट्स पर सख्ती बढ़ाना है।
Meta ने बताया कि अगर किसी यूजर के बारे में यह संकेत मिलता है कि वह टीनेजर हो सकता है, तो उसे ऑटोमैटिकली "Teen Account" प्रोटेक्शन में डाल दिया जाएगा, भले ही अकाउंट में एडल्ट जन्मतिथि दर्ज हो। यह प्रोटेक्शन Instagram, Facebook और Messenger पर लागू होगा। इसमें अनजान लोगों के मैसेज लिमिट करना, सेंसिटिव कंटेंट पर रोक और 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए डिफॉल्ट सेफ्टी सेटिंग्स जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
Meta ने यह भी बताया कि वह अब AI आधारित विजुअल एनालिसिस का इस्तेमाल करेगी, जिससे संभावित अंडरएज यूजर्स की पहचान बेहतर तरीके से की जा सके। इसके तहत सिस्टम यूजर की पोस्ट, कैप्शन, कमेंट्स और बायो जैसी एक्टिविटी के साथ-साथ फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले सामान्य फिजिकल पैटर्न का भी विश्लेषण करेगा। कंपनी का कहना है कि यह फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी नहीं है और इससे किसी व्यक्ति की पहचान नहीं की जाती, बल्कि केवल संभावित एज ग्रुप का अनुमान लगाया जाता है।
इसके अलावा Meta अपने डिटेक्शन सिस्टम को Instagram Reels, Instagram Live और Facebook Groups जैसे सेक्शन्स तक भी बढ़ा रही है। अगर कोई अकाउंट संभावित रूप से अंडरएज पाया जाता है, तो उसे डिएक्टिवेट किया जा सकता है या फिर यूजर को दोबारा एक्सेस पाने के लिए एज वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।
एज वेरिफिकेशन के लिए कंपनी सरकारी आईडी या Yoti के फेसियल एज एस्टिमेशन टूल्स का इस्तेमाल करेगी। Meta का कहना है कि AI-सपोर्टेड रिव्यू सिस्टम्स अब पहले से ज्यादा तेज और लगातार एक जैसे फैसले देने में सक्षम हैं।
कंपनी पैरेंट्स के लिए भी नए टूल्स जोड़ रही है। अब माता-पिता को नोटिफिकेशन भेजे जाएंगे, जिनमें बच्चों की उम्र की जानकारी चेक और कन्फर्म करने से जुड़े सुझाव होंगे। साथ ही Family Center टूल्स के जरिए पैरेंटल कंट्रोल और यूजेज इनसाइट्स भी उपलब्ध रहेंगे।
Meta के मुताबिक, एज वेरिफिकेशन सिर्फ एक कंपनी की समस्या नहीं बल्कि पूरे इंडस्ट्री का चैलेंज है। कंपनी का मानना है कि ऐप स्टोर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स को सेंट्रलाइज्ड एज वेरिफिकेशन सिस्टम अपनाना चाहिए, जिससे अलग-अलग ऐप्स पर बार-बार वेरिफिकेशन की जरूरत कम हो सके।
रोलआउट की बात करें तो Instagram पर AI आधारित टीन डिटेक्शन सिस्टम को यूरोपियन यूनियन के 27 देशों और ब्राजील में एक्सपैंड किया जा रहा है। वहीं Facebook पर इसकी शुरुआत अमेरिका से होगी, जिसके बाद यूके और यूरोपियन यूनियन में इसे बढ़ाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में इसे और देशों तक पहुंचाया जाएगा।
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