Technology News

Technology News - ख़बरें

  • AI से चलेंगे, सेल्फ क्लीन भी करेंगे! Dreame ने भारत में लॉन्च किए 2 नए वैक्यूम क्लीनर
    Dreame Technology ने भारतीय बाजार में अपने दो नए रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर Dreame L50s Pro Ultra और Dreame L50 Ultra CE लॉन्च कर दिए हैं। दोनों डिवाइसेज AI आधारित नेविगेशन, स्मार्ट मैपिंग, ऑटोमैटिक कार्पेट डिटेक्शन और ऐप कंट्रोल जैसे फीचर्स के साथ आते हैं। फ्लैगशिप L50s Pro Ultra में 30,000Pa तक की सक्शन पावर मिलती है, जबकि L50 Ultra CE में 25,000Pa सक्शन पावर दी गई है। दोनों मॉडल्स में ऑटोमैटिक मॉप क्लीनिंग, डस्ट कलेक्शन और स्मार्ट डॉक सिस्टम मिलता है। इनकी कीमत क्रमशः 79,999 रुपये और 64,999 रुपये रखी गई है।
  • अब AI करेगा आपकी तरफ से पेमेंट! भारत में लॉन्च हुआ नया UPI प्रोटोकॉल
    फिनटेक कंपनी Pine Labs ने भारत में Pine Labs Payment Protocol (P3P) लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम AI एजेंट्स को यूजर की पहले से तय की गई सीमाओं के भीतर अपने आप UPI ट्रांजैक्शन करने की सुविधा देता है। कंपनी के अनुसार यूजर को केवल एक बार अनुमति देनी होगी, जिसके बाद AI एजेंट प्रोडक्ट खोजने, कीमतों की तुलना करने और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं पूरी कर सकेगा। P3P को Grantex के साथ मिलकर विकसित किया गया है और इसमें सुरक्षा व खर्च नियंत्रण के कई फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का मानना है कि यह तकनीक भारत में AI आधारित कॉमर्स को बढ़ावा दे सकती है।
  • जेब में लेकर घूमिए मिनी AC! 18°C तक कूलिंग देगा यह डिवाइस, कीमत ₹2 हजार से कम
    TEMPT ने भारतीय बाजार में ICY Instant Cooling Portable Fan लॉन्च किया है। नए डिवाइस में Chiller Technology दी गई है, जो कुछ सेकेंड में 18°C तक कूलिंग इफेक्ट देने का दावा करती है। इसमें 4000mAh बैटरी मिलती है, जो एक बार चार्ज करने पर 12 घंटे तक चल सकती है। फैन में चार स्पीड मोड, LED डिस्प्ले, Type-C फास्ट चार्जिंग और 20dB से कम नॉइज लेवल जैसी सुविधाएं दी गई हैं। कंपनी ने इसकी कीमत 1,990 रुपये रखी है और यह Amazon व आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  • 3.2 करोड़ मच्छरों की फौज तैयार कर रहा Google, खुले में छोड़ने के लिए मांगी मंजूरी
    Google अमेरिका में एक अनोखे प्रयोग की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में अगले दो वर्षों के दौरान 3.2 करोड़ लैब में तैयार किए गए नर मच्छरों को छोड़ने की अनुमति मांगी है। यह प्रोजेक्ट Debug पहल का हिस्सा है, जिस पर Google 2014 से काम कर रहा है। योजना के तहत मच्छरों को Wolbachia pipientis नाम के बैक्टीरिया से संक्रमित किया जाएगा, जिससे उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। कंपनी का मानना है कि इससे समय के साथ मच्छरों की आबादी कम करने और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
  • RBI ला सकता है प्लास्टिक के नोट? जानें क्या होते हैं पॉलीमर नोट और कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी
    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पॉलीमर यानी प्लास्टिक आधारित करेंसी नोटों पर विचार करने की खबरों के बाद यह तकनीक एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हालांकि केंद्रीय बैंक की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक बढ़ती नकदी मांग, नोटों की लाइफ और प्रिंटिंग लागत जैसे पहलुओं को देखते हुए इस विकल्प का मूल्यांकन किया जा रहा है। पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों से अलग होते हैं और इन्हें ज्यादा टिकाऊ तथा सुरक्षित माना जाता है। आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और दुनिया के कई देश इसे क्यों अपना चुके हैं।
  • Airtel लाई भारत की पहली नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी! भीड़ में भी नहीं अटकेगा इंटरनेट!
    Airtel ने भारत में नया Priority Postpaid सर्विस लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि यह 5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है और भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी स्टेबल कनेक्टिविटी देने के लिए तैयार किया गया है। Airtel के मुताबिक यूजर्स को “फास्टलेन” नेटवर्क एक्सेस मिलेगा, जिससे कॉलिंग, इंटरनेट और SMS सर्विस ज्यादा भरोसेमंद रहेगी। यह फीचर फिलहाल सभी पोस्टपेड प्लान्स में उपलब्ध है और मौजूदा यूजर्स को ऑटोमैटिक अपग्रेड मिलेगा। कंपनी ने बताया कि यह सर्विस 5G standalone सपोर्ट वाले स्मार्टफोन्स पर काम करेगी। इसकी शुरुआती कीमत 449 रुपये रखी गई है।
  • दुनिया अभी 5G में उलझी है, चीन ने 6G की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम
    चीन ने 6G नेटवर्क टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 6GHz फ्रीक्वेंसी बैंड के ट्रायल इस्तेमाल को मंजूरी दी है। MIIT के मुताबिक यह स्पेक्ट्रम शुरुआती रिसर्च और टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रायल्स IMT-2030 (6G) Promotion Group के तहत होंगे, जो चीन में 6G डेवलपमेंट को कोऑर्डिनेट करता है। सरकार का कहना है कि इससे नई ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजी, नेटवर्क आर्किटेक्चर और भविष्य के कम्युनिकेशन सिस्टम्स की टेस्टिंग में मदद मिलेगी। यह पहल 6G स्टैंडर्डाइजेशन और इंडस्ट्रियल तैयारी को भी सपोर्ट करेगी।
  • क्या पालतू कुत्तों को रिप्लेस करेगा AI Dog? ये प्यार के साथ इमोशनल सपोर्ट भी देता है
    Roomba बनाने वाली कंपनी iRobot के को-फाउंडर Colin Angle ने अपनी नई कंपनी Familiar Machines & Magic के जरिए एक AI-पावर्ड रोबोटिक कंपेनियन पेश किया है। यह चार पैरों वाला रोबोट कुत्ते और भालू के मिश्रण जैसा दिखता है और इसका मकसद इंसानों के साथ emotional connection बनाना है। कंपनी के मुताबिक, इसमें ऑन-डिवाइस जनरेटिव AI, टच-सेंसिटिव कोट और पेट के समान आवाजों जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है और ऑडियो-वीडियो डेटा ऑनलाइन स्ट्रीम नहीं करता। फिलहाल इसे अगले साल लॉन्च किए जाने की संभावना है।
  • लॉन्च सही, लेकिन सैटेलाइट पहुंचा कहीं और! जानें क्या हुआ Blue Origin के मिशन में
    Blue Origin के New Glenn रॉकेट की हालिया लॉन्चिंग फेल हो गई, जिससे सैटेलाइट सही ऑर्बिट में नहीं पहुंच पाया। कंपनी के मुताबिक, अपर स्टेज के एक इंजन ने पर्याप्त थ्रस्ट नहीं दिया, जिसके चलते मिशन प्रभावित हुआ। यह लॉन्च फ्लोरिडा से किया गया था और फर्स्ट स्टेज बूस्टर सफलतापूर्वक लैंड भी कर गया था। घटना के बाद रॉकेट की आगे की लॉन्चिंग फिलहाल रोक दी गई है और जांच जारी है। यह सैटेलाइट AST SpaceMobile के नेटवर्क का हिस्सा बनने वाला था, जो डायरेक्ट सैटेलाइट-टू-स्मार्टफोन कनेक्टिविटी पर काम कर रहा है।
  • Amazon का AI Store लॉन्च, आसान भाषा में समझाएगा टेक, शॉपिंग होगी स्मार्ट!
    Amazon ने भारत में AI Store लॉन्च किया है, जो AI-पावर्ड डिवाइसेस को खोजने और समझने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म है। इसमें स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और वियरेबल्स जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, यह स्टोर यूजर्स को टेक्निकल जानकारी के बजाय AI फीचर्स के रियल लाइफ फायदे समझाने पर फोकस करता है। इसके अलावा Amazon ने Rufus AI असिस्टेंट, Lens सर्च और AR “view in your room” जैसे फीचर्स भी जोड़े हैं, जिससे शॉपिंग एक्सपीरियंस बेहतर होता है।
  • 70 भाषाओं के सपोर्ट के साथ Google का नया स्पीच AI लॉन्च
    Google ने Gemini 3.1 Flash TTS नाम का नया टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल पेश किया है, जो बेहतर स्पीच क्वालिटी और कंट्रोल ऑफर करता है। यह मॉडल Gemini 3 Pro पर आधारित है और 70 से ज्यादा भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसमें ऑडियो टैग्स, मल्टी-स्पीकर सपोर्ट और सीन डायरेक्शन जैसे फीचर्स दिए गए हैं। डेवलपर्स इसे Google AI Studio और Gemini API के जरिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि एंटरप्राइज यूजर्स के लिए यह Vertex AI पर उपलब्ध है। सिक्योरिटी के लिए इसमें SynthID वॉटरमार्किंग भी दी गई है।
  • Whirlpool के नए फ्रिज खुद होंगे डिफ्रॉस्ट, 90 मिनट में जमाएंगे बर्फ! इस कीमत में हुए लॉन्च
    Whirlpool ने भारत में ‘No Tension Refrigerators’ रेंज लॉन्च की है, जिसमें Vitamagic और IMPRO PLUS सीरीज शामिल हैं। इन फ्रिज में 6th Sense IntelliFrost Technology दी गई है, जो बर्फ बनने पर अपने आप डिफ्रॉस्टिंग शुरू कर देती है। इसकी शुरुआती कीमत 17,700 रुपये है और यह 192L से 274L तक की कैपेसिटी में उपलब्ध है। कंपनी के मुताबिक, यह रेंज यूजर्स को मैन्युअल डिफ्रॉस्ट से छुटकारा देने के लिए डिजाइन की गई है।
  • मार्क जुकरबर्ग खुद को बदल रहे हैं AI में? Meta में CEO का डिजिटल अवतार संभालेगा कमान!
    Meta एक फोटोरियलिस्टिक AI-पावर्ड डिजिटल CEO पर काम कर रही है, जिसे Mark Zuckerberg के आधार पर तैयार किया जा रहा है। यह AI कर्मचारियों से बातचीत कर सकेगा और इंटरनल कामकाज में मदद करेगा। यह प्रोजेक्ट कंपनी की AI-फर्स्ट रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत Meta ऑटोमेशन और AI सिस्टम्स को तेजी से बढ़ा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश भी कर रही है।
  • चांद मिशन में भी Microsoft Outlook ने दिया धोखा! एस्ट्रोनॉट ने लाइव स्ट्रीम में मांगी मदद
    NASA के Artemis II मिशन के दौरान Orion स्पेसक्राफ्ट में एक सॉफ्टवेयर गड़बड़ी सामने आई, जब एक एस्ट्रोनॉट ने लाइवस्ट्रीम के दौरान Microsoft Outlook के काम न करने की शिकायत की। कमांडर Reid Wiseman ने बताया कि सिस्टम में Outlook के दो वर्जन चल रहे थे और दोनों ही काम नहीं कर रहे थे। Mission Control ने रिमोट एक्सेस के जरिए इस समस्या को जांचा और बाद में बताया कि Outlook को “offline” मोड में चलाया जा सकता है। यह घटना दिखाती है कि अंतरिक्ष मिशनों में भी रोजमर्रा के कमर्शियल सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होते हैं और उनमें आम तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • लंबे नाखून से फोन नहीं चलता? स्टूडेंट ने बनाई अनोखी नेल पॉलिश, ऐसे करेगी काम
    लंबे नाखून रखने वाले यूजर्स के लिए स्मार्टफोन चलाना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान खोजा जा रहा है। ACS में पेश की जाने वाली एक स्टडी के मुताबिक वैज्ञानिक एक ऐसी clear नेल पॉलिश पर काम कर रहे हैं, जो नाखूनों को टचस्क्रीन के साथ compatible बना सकती है। यह पॉलिश हल्की conductivity पैदा कर स्क्रीन को टच रजिस्टर करने में मदद करती है। फिलहाल यह टेक्नोलॉजी शुरुआती स्टेज में है और इसे ज्यादा सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार बनाने के लिए और रिसर्च जारी है।

Technology News - वीडियो

विज्ञापन

Follow Us
विज्ञापन
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »