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Space Tech - ख़बरें

  • Google Photos का स्टोरेज फुल हो गया? जरूरी फोटो डिलीट किए बिना ऐसे बनाएं जगह
    Google Photos का फ्री 15GB स्टोरेज भरने के बाद नई फोटो और वीडियो का बैकअप रुक सकता है। इसका असर Gmail और Google Drive पर भी पड़ता है, क्योंकि तीनों एक ही स्टोरेज शेयर करते हैं। हालांकि, स्टोरेज खाली करने के लिए जरूरी फोटो डिलीट करना जरूरी नहीं है। Google Photos के Manage Storage फीचर, Storage Saver मोड, गैरजरूरी Screenshots और बड़ी वीडियो फाइल्स को मैनेज करके काफी स्पेस बचाया जा सकता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर Google One प्लान भी एक विकल्प हो सकता है।
  • समय पर नहीं बचाया, तो पृथ्वी पर गिर जाएगा NASA का 22 साल पुराना टेलीस्कोप, अब शुरू होगा रेस्क्यू मिशन
    NASA अपने 22 साल पुराने Swift Observatory को बचाने के लिए 30 जून को Swift Boost मिशन लॉन्च करने जा रहा है। Space.com की रिपोर्ट के मुताबिक, सौर तूफानों की वजह से बढ़े वायुमंडलीय ड्रैग के कारण यह टेलीस्कोप धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर गिर रहा है। मिशन के तहत Katalyst Space का Link स्पेसक्राफ्ट Swift तक पहुंचेगा और उसे पकड़कर ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश करेगा। अगर मिशन सफल रहता है तो Swift कम से कम पांच साल और वैज्ञानिक रिसर्च कर सकेगा। यह अंतरिक्ष इतिहास का पहला ऐसा मिशन होगा, जिसमें किसी पुराने स्पेस टेलीस्कोप को दोबारा ऊंची कक्षा में पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
  • 6 मिनट 23 सेकंड तक गायब रहेगा सूरज, NASA ने बताया कहां दिखेगा सबसे सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण
    2 अगस्त 2027 को होने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण माना जा रहा है। NASA के अनुसार इस दौरान चांद करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक सूरज को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन जाएगा। यह सूर्यग्रहण स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में दिखाई देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा के पृथ्वी के बेहद करीब होने की वजह से यह ग्रहण सामान्य से ज्यादा लंबा रहेगा।
  • Pluto को फिर मिलेगा ग्रह का दर्जा? 10 साल की बच्ची की अपील ने मचाई हलचल
    एक 10 साल की बच्ची द्वारा NASA को लिखा गया खत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने Pluto को फिर से ग्रह बनाने की अपील की है। बच्ची ने अपने लेटर में Pluto से जुड़े कई फैक्ट्स भी बताए और इसे दोबारा Planet बनाने की मांग की। इस पर NASA के एडमिन Jared Isaacman ने जवाब देते हुए कहा कि वे इस पर विचार कर रहे हैं। इस घटना के बाद Pluto को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
  • चांद के सफर से वापस लौट रहा है Artemis II, NASA ने दिखाईं ऐसी तस्वीरें जो पहले कभी नहीं देखीं
    NASA का Artemis II मिशन चांद के ऐतिहासिक फ्लाईबाय के बाद अब धरती की ओर लौट रहा है। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की सतह की कई नई तस्वीरें कैप्चर की हैं, जिनमें एक दुर्लभ सोलर इक्लिप्स भी शामिल है। NASA के मुताबिक, इन तस्वीरों से चांद के जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर को समझने में मदद मिलेगी। मिशन के तहत क्रू ने हजारों इमेजेज और डेटा रिकॉर्ड किया है, जिसका अब विश्लेषण किया जा रहा है। यह मिशन भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • चांद मिशन में भी Microsoft Outlook ने दिया धोखा! एस्ट्रोनॉट ने लाइव स्ट्रीम में मांगी मदद
    NASA के Artemis II मिशन के दौरान Orion स्पेसक्राफ्ट में एक सॉफ्टवेयर गड़बड़ी सामने आई, जब एक एस्ट्रोनॉट ने लाइवस्ट्रीम के दौरान Microsoft Outlook के काम न करने की शिकायत की। कमांडर Reid Wiseman ने बताया कि सिस्टम में Outlook के दो वर्जन चल रहे थे और दोनों ही काम नहीं कर रहे थे। Mission Control ने रिमोट एक्सेस के जरिए इस समस्या को जांचा और बाद में बताया कि Outlook को “offline” मोड में चलाया जा सकता है। यह घटना दिखाती है कि अंतरिक्ष मिशनों में भी रोजमर्रा के कमर्शियल सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होते हैं और उनमें आम तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • 53 साल बाद इंसान फिर चांद की ओर! NASA ने शुरू की उलटी गिनती, जानें क्या है Artemis II मिशन
    NASA ने Artemis II मिशन के लिए काउंटडाउन शुरू कर दिया है, जो करीब 53 साल बाद इंसानों को चांद की ओर ले जाएगा। यह मिशन Space Launch System रॉकेट के जरिए लॉन्च होगा और इसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। मिशन में चांद पर लैंडिंग नहीं होगी, बल्कि यह एक फ्लाईबाय मिशन होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चांद की कक्षा में जाकर वापस लौटेंगे। इससे पहले Apollo प्रोग्राम के तहत 1972 में आखिरी बार इंसान चांद पर गया था।
  • NASA के चांद मिशन में एस्ट्रोनॉट्स के हाथ में होगा खास बैंड, जानें कैसे करेगा काम
    NASA का Artemis II मिशन 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च होने वाला है, जो Apollo के बाद पहला crewed deep-space मिशन होगा। इस मिशन में चार astronauts चांद के आसपास यात्रा करेंगे। खास बात यह है कि इस बार “Archer” स्टडी के तहत astronauts रिस्टबैंड पहनेंगे, जो उनकी नींद, स्ट्रेस, मूवमेंट और टीमवर्क से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करेंगे। कंपनी के मुताबिक यह रिसर्च भविष्य के Moon और Mars मिशन के लिए अहम साबित हो सकती है, क्योंकि इससे डीप स्पेस में इंसानों के व्यवहार और हेल्थ पर पड़ने वाले असर को समझने में मदद मिलेगी।
  • धरती से टकराने से पहले रोके जाएंगे एस्टेरॉयड! जानिए क्या है Blue Origin का बड़ा मिशन
    Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin ने NASA और Caltech के साथ मिलकर NEO Hunter मिशन पर काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी को एस्टेरॉयड जैसे खतरों से बचाना है। यह मिशन Blue Ring स्पेसक्राफ्ट प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जो पहले एस्टेरॉयड का अध्ययन करेगा और जरूरत पड़ने पर उसकी दिशा बदलने की कोशिश करेगा। इसके लिए आयन बीम और टक्कर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। मिशन के दौरान छोटे सैटेलाइट्स डेटा इकट्ठा करेंगे और “Slamcam” इम्पैक्ट को रिकॉर्ड करेगा।
  • लैपटॉप-फोन के लिए आया Portronics का 8-in-1 हब, HDMI और SSD दोनों सपोर्ट के साथ, जानें कीमत
    Portronics ने भारत में Mport Space नाम का नया 8 इन 1 USB Type C हब लॉन्च किया है। इसमें इन बिल्ट M.2 SSD स्लॉट दिया गया है, जो NVMe और SATA SSD को सपोर्ट करता है। हब में 4K 30Hz HDMI आउटपुट, USB 3.0, SD और microSD कार्ड रीडर, Type C डेटा पोर्ट और 100W Power Delivery पास थ्रू चार्जिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कंपनी के मुताबिक यह सिंगल Type C कनेक्शन के जरिए स्टोरेज, चार्जिंग और डिस्प्ले का समाधान देता है। इसकी कीमत 2,799 रुपये रखी गई है और 12 महीने की वारंटी मिलती है।
  • What is NATO Innovation Fund? 90 अरब रुपये से डिफेंस, AI में स्‍मार्ट बनेंगे नाटो देश, अमेरिका को मंजूर नहीं!
    NATO Innovation Fund : नाटो के 32 में से 24 मेंबर्स ने कहा है कि वो 4 यूरोपीय टेक कंपनियों में निवेश करेंगे। 1 बिलियन यूरो का निवेश एआई, स्‍पेस और रोबोट‍िक डिफेंस टेक के क्षेत्र में एडवांस्‍ड बनने के लिए किया जाएगा।
  • What is Space Laser : क्‍या हैं स्‍पेस लेजर हथियार? ईरानी राष्‍ट्रपति के हेलीकॉप्‍टर क्रैश के बाद हो रही चर्चा
    What is Space Laser : ईरानी राष्‍ट्रपति के हेलीकॉप्‍टर क्रैश की वजह अभी स्‍पष्‍ट नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया में बहुत से लोग इसे स्‍पेस लेजर का हमला बता रहे हैं।
  • 13 देशों के 280 वैज्ञानिक उड़ाएंगे एक गुब्‍बारा, जानें इसकी वजह
    प्रोजेक्‍ट का नाम ‘एक्सट्रीम स्पेस बैलून ऑब्जर्वेटरी’ (Extreme Space Balloon Observatory) है। इसे EUSO-SPB2 के रूप में भी जाना जाता है।

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