ISRO के कई वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद Department of Space ने Gaganyaan और अन्य अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब ऐसे मामलों में अंतिम फैसला सीधे DoS करेगा।
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ISRO के अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए नए नियम लागू किए गए
ISRO के अपकमिंग सबसे बड़े मिशनों से वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफे सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने एक नया आंतरिक मेमोरेंडम जारी किया है, जिसके तहत Gaganyaan और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) के अनुरोध अब पहले की तरह सामान्य प्रोसेस में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट पर अचानक असर न पड़े।
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में ISRO के कई प्रमुख केंद्रों से वैज्ञानिकों के नौकरी छोड़ने के मामले सामने आए हैं। हालांकि DoS ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि कितने लोगों ने इस्तीफा दिया है, लेकिन रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यह संख्या 100 से 120 के बीच हो सकती है। इनमें से करीब 80 वैज्ञानिक यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और लगभग 20 वैज्ञानिक विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) से जुड़े बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी छोड़ने वालों में कुछ ऐसे वैज्ञानिक भी शामिल हैं, जिन्होंने ISRO के प्रमुख मिशनों में अहम भूमिका निभाई थी। सूत्रों का दावा है कि LVM-3 परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोजेफ ने भी इस्तीफा दिया है। इसके अलावा SpaDeX मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट डायरेक्टर और Chandrayaan-3 मिशन में काम कर चुके एक युवा वैज्ञानिक के भी संगठन छोड़ने की बात कही गई है।
इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए DoS ने 14 जुलाई को नया मेमोरेंडम जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया है कि Gaganyaan और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से जुड़े Group 'A' वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध अब नियमित प्रोसेस के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे सभी मामलों में संबंधित सेंटर डायरेक्टर को अंतिम फैसला लेने के बजाय अपनी सिफारिश के साथ फाइल DoS को भेजनी होगी। अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाएगा।
अब तक ISRO के विभिन्न केंद्रों के डायरेक्टर्स को Group 'A' वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। अब Gaganyaan और अन्य अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के मामलों में यह अधिकार वापस ले लिया गया है।
ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने भी वैज्ञानिकों के इस्तीफों की पुष्टि की है। TOI से बातचीत में उन्होंने कहा था कि किसी भी संगठन में लोगों का आना-जाना सामान्य बात है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए नियमों का मकसद केवल कर्मचारियों को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय महत्व की प्रोजेक्ट अचानक प्रभावित न हों।
रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि ISRO में कर्मचारियों के इस्तीफे कोई नई बात नहीं हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2012 से 2024 के बीच करीब 700 कर्मचारी संगठन छोड़ चुके हैं। वहीं ISRO की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1,050 वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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