NASA का Artemis II मिशन चांद के ऐतिहासिक फ्लाईबाय के बाद अब धरती की ओर लौट रहा है। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की सतह की कई नई तस्वीरें कैप्चर की हैं, जिनमें एक दुर्लभ सोलर इक्लिप्स भी शामिल है। NASA के मुताबिक, इन तस्वीरों से चांद के जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर को समझने में मदद मिलेगी। मिशन के तहत क्रू ने हजारों इमेजेज और डेटा रिकॉर्ड किया है, जिसका अब विश्लेषण किया जा रहा है। यह मिशन भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 11 हजार नए एस्टरॉयड्स को सौरमंडल में खोजा है। ये एस्टरॉयड लगातार सौरमंडल में चक्कर लगा रहे हैं। इनमें से 33 एस्टरॉयड पृथ्वी के बेहद करीब बताए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन 33 एस्टरॉयड्स में कुछ एस्टरॉयड्स 500 मीटर से भी बड़े हैं।
जीवाश्म वैज्ञानिकों ने स्पाइनोसॉरस की एक नई प्रजाति की खोज की है जिसे स्पाइनोसॉरस मिराबिलिस (Spinosaurus mirabilis) नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये करीब 10 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर विचरण करते थे।
Artemis II मिशन को नासा ने मार्च तक के लिए टाल दिया है। चांद पर खोज का यह महत्वपूर्ण मिशन पहले 8 फरवरी को लॉन्च होने वाला था। नासा ने बताया कि उसने वेट ड्रेस रिहर्सल किया है। Space.com के अनुसार, यह ऐसा टेस्ट होता है जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर एक अभूतपूर्व पथ पर छोड़ देने के लिए विशाल रॉकेट सिस्टम का परीक्षण किया जाता है। नासा ने कहा कि ठंडे मौसम के कारण परीक्षण के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।
जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी (JPL) की ओर से आज 4 एस्टरॉयड्स के लिए अलर्ट जारी किया गया है। ये एस्टरॉयड धरती के करीब आने वाले हैं। ये 100 फीट तक बड़े हैं। इस साइज का कोई एस्टरॉयड अगर पृथ्वी से टकरा जाता है तो भारी तबाही ला सकता है।
नासा की जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी ने कुछ ही घंटे में पृथ्वी के नजदीक आने वाले एक एस्टरॉयड के लिए अलर्ट जारी किया है। इसका नाम 2026 BG2 एस्टरॉयड है। Asteroid 2026 BG2 के बारे में JPL ने बताया है कि यह 74 फीट बड़ा है। यानि कि करीबन 100 फीट का ये चट्टानी टुकड़ा अब धरती की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
ISRO के Polar Satellite Launch Vehicle के 64वें मिशन PSLV-C62 में लॉन्च के कुछ मिनट बाद तकनीकी अनियमितता दर्ज की गई है। श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे लॉन्च हुए इस मिशन में रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे स्टेज में ट्रेजेक्टरी में झुकाव देखा गया। ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यह मिशन 2025 में हुई PSLV की विफल उड़ान के बाद एक अहम वापसी माना जा रहा था।
मंगल ग्रह पर वैज्ञानिकों को पानी की मौजूदगी के नए सबूत मिले हैं। चीन से वैज्ञानिकों ने मंगल के हेबरस वेल्स क्षेत्र में नई गुफाओं के बारे में पता लगाया है जो एक अभूतपूर्व खोज है। यहां पर 8 गुफाएं खोजी गई हैं जिनके बनने का कारण पानी हो सकता है। Daily Galaxy की रिपोर्ट के अनुसार, ये नई संरचनाएं घुलनशील चट्टानों के रासायनिक विघटन के परिणामस्वरूप बनी हुई प्रतीत होती हैं।
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के लिए ऐसी भविष्यवाणी की है जो डराने वाली है। वैज्ञानिकों ने वो समय बता दिया है जब पृथ्वी पर जीवन खत्म हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्युटर सिमुलेशन का इस्तेमाल किया और बताया कि एक दिन पृथ्वी पर जिंदा रहना असंभव हो जाएगा। स्टडी कहती है कि एक दिन पृथ्वी की जीवनदायनी गैस ऑक्सीजन पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। यह घटना करीबन 1 अरब वर्ष बाद घटित हो चुकी होगी।
वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल, या लाल ग्रह, कभी पृथ्वी जैसा था। पिछले चार सालों से NASA का पर्सेवरेंस रोवर (Perseverance rover) मंगल पर उस जगह का भ्रमण कर रहा है जहां पर कभी एक क्रेटर में एक शक्तिशाली नदी आकर गिरती थी। कंप्यूटर मॉडल सुझाते हैं कि प्राचीन मंगल पर अवश्य ही बर्फ गिरती होगी, बारिश होती होगी। इसने ग्रह पर सैकड़ों झीलों और नदी घाटियों का निर्माण किया होगा।
मंगल के बारे में नई खोज सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि मंगल पर पूरा सागर मौजूद रहा होगा। नई स्टडी में दावा किया गया है कि यहां पर चट्टानों के नीचे समुद्री बीच (beach) मौजूद है। स्टडी को चीनी और अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मिलकर कंडक्ट किया है। चीनी रोवर झुरॉन्ग का डेटा खंगालने पर वहां सागर का किनारा होने के सबूत मिले हैं।
साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो कि यूरोप, एशिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, और साउथ अमेरिका में दिखाई देगा। यह अटलांटिक महासागर से भी देखा जा सकेगा। यूरोप के अधिकतर हिस्सों में यह प्रभावी रूप से दिखेगा। वहीं, नॉर्थ अमेरिका में भी यह काफी अच्छी तरह से दिखाई देगा।
Elon Musk ने मंगल पर एक खोजी अभियान भेजकर जांच करने की बात कही है। दरअसल नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर (MGS) के मार्स ऑर्बिटर कैमरा (MOC) ने मंगल पर एक फोटो खींची थी जिसमें एक सटीक चौकोर आकृति दिखाई दे रही है। यह एक सटीक वर्ग जैसा दिखता है। Musk ने कहा है कि इसके बारे में सीधे जाकर खोज करनी चाहिए कि आखिर इस स्क्येअर शेप का रहस्य क्या है।
चंद्रमा के लिए कई मिशन तैयार हो रहे हैं। अमेरिका आर्टिमिस मिशन भेजकर वहां दोबारा से इंसान को उतारना चाहता है, तो चीन एक रोबोटिक मिशन भेजने की योजना बना रहा है। ड्रैगन, चांद पर पानी की खोज करना चाहता है और उसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्मार्ट रोबोटिक ‘फ्लायर डिटेक्टर’ भेजने की योजना का खुलासा किया है।
एक भारतीय खगोलशास्त्री दोर्जे अंगचुक (Dorje Angchuk) ने बेहतरीन टाइम-लैप्स वीडियो बनाया है। इसे लद्दाख में शूट किया गया है। वीडियो में वहां की एक साइंस लेबोरेटरी के सामने पृथ्वी को घूमते हुए दिखाया गया है। वीडियो अपने आप में यूनीक है और हमारे ग्रह की गति को लेकर अनूठा दृश्य पेश करता है। दोर्जे अंगचुक लद्दाख के हानले में स्थित ऑब्जर्वेट्री के इंजीनियर इन-चार्ज हैं।