Science

Science - ख़बरें

  • धरती पर गिरने वाला है नासा का टेलीस्कोप! तबाही को रोकने के लिए भेजेगी रेस्क्यू मिशन!
    नासा स्पेस में एक रेस्क्यू मिशन भेजने जा रही है। मिशन एक स्टार्टअप कंपनी कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजी द्वारा पूरा किया जाएगा। नासा का स्पेस टेलीस्कोप स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी (Swift Observatory) धीरे-धीरे अपनी कक्षा से हटता हुआ नीचे की ओर आ रहा है। अगर इसे मदद न मिली तो यह टेलीस्कोप आखिरकार वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा।
  • दुनिया में पहली बार! न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से बनाई ग्रीन हाइड्रोजन, भारत ने रचा इतिहास
    भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का सफल प्रदर्शन किया है। तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित IGCAR में विकसित इस तकनीक में BARC के Copper-Chlorine Thermochemical Process का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से बिना कार्बन एमिशन के ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जा सकती है। इस उपलब्धि के बाद न्यूक्लियर रिएक्टर सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन भी तैयार कर सकेंगे। इससे भारत के क्लीन एनर्जी मिशन और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
  • समय पर नहीं बचाया, तो पृथ्वी पर गिर जाएगा NASA का 22 साल पुराना टेलीस्कोप, अब शुरू होगा रेस्क्यू मिशन
    NASA अपने 22 साल पुराने Swift Observatory को बचाने के लिए 30 जून को Swift Boost मिशन लॉन्च करने जा रहा है। Space.com की रिपोर्ट के मुताबिक, सौर तूफानों की वजह से बढ़े वायुमंडलीय ड्रैग के कारण यह टेलीस्कोप धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर गिर रहा है। मिशन के तहत Katalyst Space का Link स्पेसक्राफ्ट Swift तक पहुंचेगा और उसे पकड़कर ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश करेगा। अगर मिशन सफल रहता है तो Swift कम से कम पांच साल और वैज्ञानिक रिसर्च कर सकेगा। यह अंतरिक्ष इतिहास का पहला ऐसा मिशन होगा, जिसमें किसी पुराने स्पेस टेलीस्कोप को दोबारा ऊंची कक्षा में पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
  • न कंप्रेसर होगा, न गैस! चुंबक से चलेंगे फ्रिज और AC, जानें क्या है मैग्नेटिक कूलिंग तकनीक
    Magnetic Cooling या Magnetic Refrigeration एक उभरती हुई कूलिंग तकनीक है, जो Magnetocaloric Effect पर आधारित है। इसमें कुछ खास मैग्नेटिक मटेरियल चुंबकीय क्षेत्र मिलने पर गर्म और हटने पर ठंडे हो जाते हैं। इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कूलिंग पैदा करने के लिए किया जाता है। पारंपरिक फ्रिज और AC की तरह इसमें रेफ्रिजरेंट गैस और बड़े कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसकी लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण इसका इस्तेमाल सीमित स्तर पर ही हो रहा है।
  • 130 फीट का एस्टरॉयड पहुंच रहा है धरती के पास! नासा ने दी चेतावनी
    नासा की जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी ने अगले 24 घंटे में पृथ्वी के नजदीक आने वाले एक एस्टरॉयड के लिए अलर्ट जारी किया है। 24 घंटे में एक चट्टान घूमती हुई धरती के करीब आ रही है। इसका नाम Asteroid 2003 LN6 है। नासा की JPL ने बताया है कि यह 130 फीट बड़ा है।
  • क्लाइमेट चेंज धीमी कर रहा है पृथ्वी की गति! हो सकता है बड़ा खतरा
    क्लाइमेट चेंज पृथ्वी पर अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा प्रभाव डाल रहा है। इससे न सिर्फ मौसमों का पैटर्न बदल रहा है, बल्कि यह पृथ्वी की घूमने की गति को धीमी कर रहा है। वैज्ञानिकों ने स्टडी के आधार पर खुलासा किया है कि पघलते ग्लेशियर और बर्फ परतों के कारण पृथ्वी की रोटेशन धीमी हो रही है। इससे पृथ्वी पर दिन की लम्बाई कुछ बढ़ रही है।
  • 3.1 किमी प्रति सेकेंड स्पीड से पृथ्वी की ओर आ रहा 35 फीट का एस्टरॉयड!
    नासा ने आज के लिए ताजा एस्टरॉयड अलर्ट (asteroid alert) जारी किया है। नासा की जेट प्रॉ़पल्शन लेबोरेटरी ने एस्टरॉयड 2018 GE (Asteroid 2018 GE3) के लिए अलर्ट दिया है। यह भीमकाय चट्टान आज धरती की ओर बढ़ रही है। इसका साइज एक बस जितना बताया जा रहा है।
  • हो जाओ तैयार! जून में निकलेगी ग्रहों की परेड, शुक्र को ढक लेगा चांद! दिखेंगे अद्भुत नजारे
    अंतरिक्ष उत्साहियों के लिए जून का महीना बहुत खास होने वाला है। इस महीने में कई खगोलीय घटनाएँ होने जा रही हैं। यहां चांद और शुक्र ग्रह का मिलन देखने को मिलेगा। इसके साथ ही ग्रहों की जुगलबंदी भी होगी। नासा ने इस महीने होने वाली अंतरिक्ष की घटनाओं की जानकारी दी है।
  • 3.2 करोड़ मच्छरों की फौज तैयार कर रहा Google, खुले में छोड़ने के लिए मांगी मंजूरी
    Google अमेरिका में एक अनोखे प्रयोग की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में अगले दो वर्षों के दौरान 3.2 करोड़ लैब में तैयार किए गए नर मच्छरों को छोड़ने की अनुमति मांगी है। यह प्रोजेक्ट Debug पहल का हिस्सा है, जिस पर Google 2014 से काम कर रहा है। योजना के तहत मच्छरों को Wolbachia pipientis नाम के बैक्टीरिया से संक्रमित किया जाएगा, जिससे उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। कंपनी का मानना है कि इससे समय के साथ मच्छरों की आबादी कम करने और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
  • हवाई जहाज जितने बड़े 2 एस्टरॉयड आज आ रहे पृथ्वी के पास!
    एस्टरॉयड हमारे सौरमंडल में लगातार चक्कर लगा रहे हैं। ये चट्टानी टुकड़े जब पृथ्वी की दिशा में बहुत करीब आ जाते हैं तो नासा इनके लिए अलर्ट जारी करती है। नासा की जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी एस्टरॉयड की दिशा पर नजर रखती है। JPL ने आज 2 एस्टरॉयड को लेकर अलर्ट जारी किया है जो धरती के बेहद करीब से गुजरने वाले हैं।
  • 6 मिनट 23 सेकंड तक गायब रहेगा सूरज, NASA ने बताया कहां दिखेगा सबसे सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण
    2 अगस्त 2027 को होने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण माना जा रहा है। NASA के अनुसार इस दौरान चांद करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक सूरज को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन जाएगा। यह सूर्यग्रहण स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में दिखाई देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा के पृथ्वी के बेहद करीब होने की वजह से यह ग्रहण सामान्य से ज्यादा लंबा रहेगा।
  • अंतरिक्ष से एकसाथ आ रहे 100 फीट तक बड़े 5 एस्टरॉयड, नासा ने दी चेतावनी
    NASA ने 5 एस्टरॉयड के धरती के पास होकर गुजरने की चेतावनी जारी की है। किसी एस्टरॉयड के लिए अलर्ट तब जारी किया जाता है जब वह पृथ्वी के बहुत अधिक करीब से होकर गुजरने वाला हो। आज पृथ्वी की ओर आने वाले एस्टरॉयड्स में से एक एस्टरॉयड तो इतनी पास से गुजरने वाला है, जितना कि चंद्रमा हमारी धरती के करीब है।
  • 4 चट्टानें आज धरती से टकराने वाली हैं? NASA ने दिया एस्टरॉयड अलर्ट
    NASA की जेट प्रॉपल्शन लेबोरेटरी (JPL) की ओर से आज 4 एस्टरॉयड्स के लिए अलर्ट जारी किया गया है। ये एस्टरॉयड धरती के करीब आने वाले हैं। ये 150 फीट तक बड़े हैं। इस साइज का कोई एस्टरॉयड अगर पृथ्वी से टकरा जाता है तो भारी तबाही ला सकता है।
  • 180 फीट तक बड़ी 2 चट्टानों से आज पृथ्वी को खतरा!
    एस्टरॉयड को क्षुद्र ग्रह भी कहा जाता है। ये ग्रहों और उपग्रहों की तरह ही लगातार अंतरिक्ष में चक्कर लगाते हैं। एस्टरॉयड बड़ी चट्टानें होती हैं जो कि खनिज पदार्थों से बनी होती हैं। एस्टरॉयड हमारे सौरमंडल में चट्टानों के रूप में घूमता एक संभावित खतरा हैं जिन पर अंतरिक्ष वैज्ञानिक हमेशा पैनी नजर बनाए रखते हैं।
  • चांद से टकराया था 260km चौड़ा एस्टरॉयड! बनाया 2500 किलोमीटर का गड्ढा ...
    चांद का सबसे बड़ा क्रेटर SPA बेसिन अपने आप में विशेष महत्व रखता है। इसमें चांद की सहत मेंटल (mantle) के कई महत्वपूर्ण पदार्थ मौजूद हो सकते हैं जिनमें वैज्ञानिकों को विशेष रुचि हो सकती है। पर्ड्यू विश्वविद्यालय की शिगेरु वाकिता ने इसके 3D सिमुलेशन पर काम किया और पता लगाया कि यह क्रेटर एक एस्टरॉयड के प्रभाव से बना हो सकता है।

Science - वीडियो

विज्ञापन

Follow Us
विज्ञापन
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »