अमेरिका में टैरिफ के प्रेशर के बावजूद स्मार्टफोन्स के एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के पीछे प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, वेंडर्स का मजबूत इकोसिस्टम और इंटरनेशनल स्मार्टफोन मेकर्स का इनवेस्टमेंट प्रमुख कारण हैं। देश से स्मार्टफोन्स के एक्सपोर्ट में iPhone बनाने वाली अमेरिकी कंपनी Apple की बड़ी हिस्सेदारी है।
भारत से स्मार्टफोन्स का एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है। इस एक्सपोर्ट मे्ं एपल और दक्षिण कोरिया की Samsung की बड़ी हिस्सेदारी है। कंपनी की iPhone 17 सीरीज की भी देश में मैन्युफैक्चरिंग की जा रही है। इसके लिए एपल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स Foxconn और Tata Group की फैक्टरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश में पिछले वित्त वर्ष में एपल की सेल्स लगभग 9 अरब डॉलर की रही थी।
एपल की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन की योजना अपनी प्रोडक्शन लाइंस में से कुछ में बदलाव कर AirPods के नए मॉडल्स की मैन्युफैक्चरिंग करने की है। इनमें हाल ही में लॉन्च किया गया AirPods Pro 3 शामिल हो सकता है। फॉक्सकॉन की योजना हैदराबाद की अपनी फैक्टरी में AirPods की मासिक मैन्युफैक्चरिंग को लगभग एक लाख यूनिट्स से बढ़ाकर दो लाख यूनिट्स करने की है।
कंपनी ने iPhone Air की मैन्युफैक्चरिंग को घटाने का फैसला किया है। इसका कारण चीन के अलावा अन्य इंटरनेशनल मार्केट्स में इस स्मार्टफोन की कम बिक्री है। हालांकि, iPhone 17, iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max के लिए एपल को मजबूत डिमांड मिल रही है। iPhone Air में एपल का A19 Pro चिप और 6.5 इंच डिस्प्ले दिया गया है।
इस वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच अमेरिका को यह एक्सपोर्ट बढ़कर लगभग 9.4 अरब डॉलर का रहा है। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह लगभग 3.1 अरब डॉलर का था। ICEA का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में स्मार्टफोन्स का एक्सपोर्ट बढ़कर लगभग 35 अरब डॉलर पर पहुंच सकता है। पिछले महीने लॉन्च की गई Apple की iPhone 17 सीरीज की भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग की जा रही है।
एपल के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर की पोस्ट के लिए कंपनी में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट, John Ternus प्रमुख दावेदार हैं। पिछले 24 वर्षों से Ternus ने कंपनी में विभिन्न पोस्ट्स पर कार्य किया है। इसके अलावा अस्थायी तौर पर एपल के रिटेल चीफ, Deirdre O'Brien को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। हाल ही में कंपनी ने आईफोन 17 सीरीज को लॉन्च किया था।
इस वर्ष मार्च तक एपल का रेवेन्यू एक वर्ष पहले के 8 अरब डॉलर से लगभग 13 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी की सेल्स में आईफोन्स की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके MacBook कंप्यूटर्स की डिमांड भी बढ़ रही है। एपल की सेल्स में भारत की हिस्सेदारी में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। कंपनी को अपने कुछ बड़े मार्केट्स में सेल्स के बढ़ने की धीमी दर जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
टाटा ग्रुप के साथ एपल अपनी पार्टनरशिप को बढ़ा रही है। देश में अगले दो वर्षों में असेंबल किए जाने वाले सभी आईफोन मॉडल्स में टाटा ग्रुप की हिस्सेदारी आधी हो सकती है। इस वर्ष की अप्रैल तिमाही में भारत से एपल ने लगभग 7.5 अरब डॉलर के आईफोन्स का एक्सपोर्ट किया है। इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष में देश से कंपनी ने लगभग 17 अरब डॉलर के आईफोन्स का एक्सपोर्ट किया था।
एपल की योजना आईफोन 17 सीरीज के स्टैंडर्ड मॉडल की भारत और चीन में साथ में असेंबलिंग करने की है। कंपनी की आगामी स्मार्टफोन सीरीज में iPhone 17, iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max शामिल हो सकते हैं। नई आईफोन सीरीज को 9 सितंबर को लॉन्च किया जा सकता है। फॉक्सकॉन की फैक्टरी में आईफोन 16 और आईफोन 14 की भी असेंबलिंग की जा रही है।
अमेरिका में स्मार्टफोन्स के सबसे बड़े सोर्स के तौर पर भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। इसका बड़ा कारण Apple का भारत में अपने iPhones की असेंबलिंग बढ़ाना है। इस वर्ष की दूसरी तिमाही में अमेरिका को एक्सपोर्ट किए गए स्मार्टफोन्स का पहली बार भारत सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर रहा है। अमेरिका में मेड इन इंडिया डिवाइसेज की वॉल्यूम पिछली तिमाही में तिगुनी से अधिक बढ़ी है।
फॉक्सकॉन की तेलंगाना की फैक्टरी में डायसप्रोसियम की कमी हो रही है। यह एक रेयर अर्थ मेटल है जो ईयरबड्स में इस्तमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट्स में एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट है। इसके साथ ही नियोडायमियम का इस्तेमाल एयरपॉड्स में साउंड लाने वाले ऑडियो ड्राइवर्स बनाने में किया जाता है। इन दोनों रेयर अर्थ मेटल्स का चीन एक बड़ा एक्सपोर्टर है।
भारत में फॉक्सकॉन के लगभग 80,000 वर्कर्स हैं। यह आईफोन्स की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर है। हालांकि, फॉक्सकॉन की मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हिस्सा चीन में है। एपल की चीन में मैन्युफैक्चरिंग को घटाने की स्ट्रैटेजी के तहत भारत में फॉक्सकॉन ने आईफोन की असेंबलिंग को बढ़ाया है। पिछले वित्त वर्ष में देश से स्मार्टफोन्स के एक्सपोर्ट में आईफोन की हिस्सेदारी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की थी।
यह अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump की ओर से चीन पर लगाए गए अधिक टैरिफ से बचने की एपल की एक कोशिश है। आईफोन्स की अधिकांश मैन्युफैक्चरिंग चीन में होती है। पिछले कुछ वर्षों में एपल ने चीन से मैन्युफैक्चरिंग का कुछ हिस्सा भारत में शिफ्ट किया है। इससे पहले देश में मैन्युफैक्चरिंग वाले आईफोन्स का ब्रिटेन, नीदरलैंड और चेक गणराज्य को बड़ी संख्या में एक्सपोर्ट किया जाता था।
अमेरिकी डिवाइसेज मेकर Apple ने देश में आईफोन्स और MacBook की रिपेयर का कॉन्ट्रैक्ट Tata Group को दिया है। Tata Group की एक कंपनी पहले आईफोन्स की असेंबलिंग कर रही है। चीन से अपनी मैन्युफैक्चरिंग का कुछ हिस्सा शिफ्ट करने की एपल की योजना में भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना शामिल है। इससे पहले यह कॉन्ट्रैक्ट ताइवान की Wistron की भारत में एक यूनिट, ICT Service Management Solutions के पास था।
एपल की योजना मुंबई के बोरिविली में स्काई सिटी मॉल और बेंगलुरु में फिनिक्स मॉल ऑफ एशिया में नए स्टोर्स खोलने की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन स्टोर्स के लिए पिछले कुछ महीनों से वर्कर्स की हायरिंग की जा रही है। हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एपल के दो स्टोर्स उत्तर प्रदेश में नोएडा के DLF Mall of India और महाराष्ट्र में पुणे के Kopa Mall में खोले जा सकते हैं।