महाराष्ट्र में ठाणे की पुलिस ने बताया है कि इस इनवेस्टमेंट स्कीम में पीड़ितों की संख्या का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। इस मामले में शिकायकर्ता का आरोप है कि पिछले वर्ष अगस्त और इस वर्ष मार्च में उन्हें एक फर्म में इनवेस्टमेंट करने पर अधिक रिटर्न का झांसा दिया गया था। यह फर्म इस क्रिप्टो एक्सचेंज से जुड़ी बताई गई है।
हैदराबाद के कोंडापुर के रहने वाले इस पीड़ित ने बताया है कि दो वर्ष पहले उनसे एक जालसाज ने संपर्क कर एक पोर्टल pc.omnifxpro.com पर एकाउंट खोलने के लिए कहा था। " उन्होंने बताया कि खुद को नव्या बताने वाली यह जालसाज बाद में काजल मिश्रा के नाम के साथ ऑनलाइन दिखी थी। इसके बाद उनसे खुद को महिला के तौर पर दिखाने वाले दो अन्य जालसाजों ने भी ठगी की है।
आंध्र प्रदेश में मल्काजगिरि सायबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस कारोबारी ने पुलिस को बताया कि पिछले वर्ष फेसबुक पर उन्होंने दो क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को देखा था। ज्यादा रिटर्न और एक्सपर्ट की गाइडेंस के वादे के बाद उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग के लिए रकम को ट्रांसफर करना शुरू किया था।
ED ने चार्जशीट में आरोप लगाया था कि कुंद्रा को Gain Bitcoin पॉन्जी स्कीम के मास्टरमाइंड और प्रमोटर अमित भारद्वाज से यूक्रेन में बिटकॉइन माइनिंग फार्म लगाने के लिए 285 बिटकॉइन मिले थे। हालांकि, यह डील पूरी नहीं हो सकी थी लेकिन कुंद्रा का 285 बिटकॉइन पर कब्जा है। इन बिटकॉइन की मौजूदा वैल्यू 150 करोड़ रुपये से अधिक की है।
Enforcement Directorate ने देशभर में फैले एक बड़े क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट स्कैम का खुलासा करते हुए 26 फर्जी वेबसाइट्स को रेड-फ्लैग किया है। ED के मुताबिक, ये प्लेटफॉर्म्स खुद को वैध क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट साइट्स बताकर लोगों को हाई रिटर्न का लालच दे रहे थे। शुरुआती तौर पर छोटे मुनाफे दिखाकर निवेशकों का भरोसा जीता गया और बाद में अकाउंट फ्रीज व एक्स्ट्रा चार्ज के नाम पर ठगी की गई। एजेंसी का कहना है कि यह नेटवर्क सालों से एक्टिव था और इसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन का शक है।
इस रूल के तहत, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) की ओर से रेगुलेटेड सभी एंटिटीज को सर्विस और ट्रांजैक्शन से जुड़ी कॉल्स के लिए '1600' सीरीज के नंबर्स का इस्तेमाल करना होगा। इसका उद्देश्य वैध सर्विस और ट्रांजैक्शंस से जुड़ी कॉल्स की पहचान करना है। लगभग 570 एंटिटीज ने नई नंबरिंग सीरीज का इस्तेमाल शुरू किया है।
एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर छापे मारे हैं। इसमें कथित तौर पर जाली क्रिप्टोकरेंसी पॉन्जी स्कीम और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कैम से कई इनवेस्टर्स के साथ लगभग 2,300 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया गया है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस मामले की जांच शुरू की है।
क्रिप्टो का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 2.8 लाख करोड़ डॉलर का है। पिछले महीने की शुरुआत यह लगभग 4.4 लाख करोड़ डॉलर पर था। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन में भारी बिकवाली से डेटा लेकर इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी खरीदने वाले MicroStrategy जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स पर मार्जिन का प्रेशर बढ़ सकता है।
पिछले वर्ष की शुरुआत से इस वर्ष सितंबर तक सायबर क्रिमिनल्स ने कम से कम 27 क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए लगभग 624 करोड़ रुपये की गैर कानूनी रकम को खपाया है। होम मिनिस्ट्री के तहत आने वाले इंडियन सायबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के रिकॉर्ड्स से पता चला है कि 2024-2025 के दौरान अपराध से मिली 25 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को 12 विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए ट्रांसफर किया गया है।
बिटकॉइन ने लगभग 96,000 डॉलर पर छह महीने का निचला लेवल छुआ है। इस वर्ष की पहली छमाही में क्रिप्टो मार्केट में काफी तेजी आई थी। इसके पीछे अमेरिका जैसे देशों में इस सेगमेंट के लिए रेगुलेशंस बनना और इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की ओर से खरीदारी प्रमुख कारण थे। पिछले एक महीने में इनवेस्टर्स ने लगभग 8,15,000 बिटकॉइन बेचे हैं। इसका बड़ा असर क्रिप्टो मार्केट पर पड़ा है।
इसमें पीड़ितों को इनवेस्टमेंट से जुड़े फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगा जाता था। इस मामले में दुबई में मौजूद अपराधियों तक लगभग पांच करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी ट्रेल का खुलासा किया गया है। हाल ही में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने केरल में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लगभग 330 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट का खुलासा किया था।
फ्लावर्स का एक्सपोर्ट करने वाली यह फर्म मालापुरम के दो व्यक्ति चला रहे थे। पिछले कई वर्षों से यह फर्म इंडोनेशिया को फ्लावर्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इन दोनों आरोपियों को बैंकिंग सिस्टम के बजाय क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पेमेंट्स मिलती थी। इस मामले में रकम को छिपाने के लिए इन दोनों ने कथित तौर पर स्टूडेंट्स सहित विभिन्न व्यक्तियों के नामों पर कई क्रिप्टो वॉलेट्स बनाए थे।
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Bitcoin, Ethereum और XRP जैसे क्रिप्टो टोकन्स का मालिकाना हक हो सकता है और इन्हें ट्रांसफर किया जा सकता है। यह पहली बार है कि जब देश में किसी कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी को प्रत्यक्ष तौर पर प्रॉपर्टी के एक प्रकार के तौर पर वर्गीकृत किया है। इससे ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स को ट्रांजैक्शंस और विवाद के निपटारे के लिए एक कानूनी आधार मिलेगा।
RBI ने कहा कि यह देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और फिनटेक इकोसिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। RBI एक पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म को तैयार कर रहा है जिससे फ्रॉड वाली ट्रांजैक्शंस की रियल टाइम में पहचान कर उन्हें रोका जा सकेगा। केंद्र सरकार की योजना RBI की गारंटी वाली एक डिजिटल करेंसी को लॉन्च करने की है।
कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने कहा है कि प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसीज को सरकार की ओर से सपोर्ट नहीं किया जाता क्योंकि इनके साथ एसेट की कोई वैल्यू नहीं जुड़ी होती। उन्होंने बताया कि क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन नहीं लगाया गया है लेकिन अधिक टैक्स लगातार इनके इस्तेमाल को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। क्रिप्टो इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह रेगुलेटरी सख्ती बढ़ने का संकेत हो सकता है।