ED ने 26 फर्जी क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वेबसाइट्स का पर्दाफाश किया, पैन-इंडिया स्कैम का खुलासा।
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यह सिंडिकेट 2015 के आसपास से एक्टिव बताया जा रहा है
देशभर में फैल रहे क्रिप्टो फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई करते हुए Enforcement Directorate (ED) ने 26 फर्जी क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट वेबसाइट्स का खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, ये प्लेटफॉर्म्स खुद को वैध निवेश साइट्स के तौर पर पेश कर लोगों से पैसे ऐंठ रहे थे। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लंबे समय से एक्टिव था और हजारों निवेशकों को हाई रिटर्न का झांसा देकर ठगा गया। ED ने लोगों को इन वेबसाइट्स से तुरंत दूरी बनाने की सलाह दी है।
ED की जांच में जिन वेबसाइट्स को रेड-फ्लैग किया गया है, उनमें goldbooker.com, fincorp.com, wozur.com, theapexpower.com, mygoldrev.com, cryptobrite.com, cryptexify.com, goldxcapital.com, hawkchain.com, cubigains.com, paymara.com, bitcodeals.com, growmore.com, bitminerclub.com, bitrobix.com, primetrades.com और zylotrade.com जैसी साइट्स शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि ये सभी वेबसाइट्स निवेश के नाम पर फर्जी डैशबोर्ड और नकली प्रॉफिट दिखाकर यूजर्स को भरोसे में लेती थीं।
जांच के मुताबिक, यह सिंडिकेट 2015 के आसपास से एक्टिव बताया जा रहा है और इसका तरीका पारंपरिक पोंजी स्कीम और आधुनिक सोशल इंजीनियरिंग का मिला-जुला रूप था। शुरुआत में निवेशकों को छोटे अमाउंट पर रिटर्न दिखाया जाता था, ताकि वे ज्यादा पैसा लगाएं और अपने जान-पहचान वालों को भी जोड़ें। WhatsApp, Telegram और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप्स बनाए गए थे, जहां कथित “एक्सपर्ट्स” लगातार प्रॉफिट दिखाने वाले सिग्नल शेयर करते थे।
ED की प्रेस रिलीज में बताया गया है कि असली खेल तब शुरू होता था जब कोई निवेशक बड़ी रकम निकालने की कोशिश करता था। ऐसे में वेबसाइट्स की तरफ से “टैक्स”, “क्लियरेंस फीस” या “स्टैच्यूटरी चार्ज” के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे। रकम देने के बाद भी कई मामलों में अकाउंट फ्रीज कर दिए जाते थे और निवेशक पूरी तरह फंस जाता था।
हालांकि इस खास नेटवर्क से जुड़े कुल नुकसान का आंकड़ा अभी जोड़ा जा रहा है, लेकिन ED का कहना है कि 2024-25 के दौरान सामने आए क्रिप्टो फ्रॉड मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी सामने आ चुकी है। एजेंसी के अनुसार, कई मामलों में एक-एक नेटवर्क से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का पता चला है। ED ने यह भी बताया कि बीते वित्त वर्ष में अलग-अलग फाइनेंशियल क्राइम्स से जुड़े 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं, जिनमें डिजिटल और क्रिप्टो फ्रॉड का बड़ा हिस्सा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि भले ही शिकार भारत में हों, लेकिन इन वेबसाइट्स का टेक्निकल इन्फ्रास्ट्रक्चर विदेशों से ऑपरेट किया जाता था। कई सर्वर्स साउथ-ईस्ट एशिया के उन इलाकों में होस्ट किए गए थे, जहां साइबर रेगुलेशन कमजोर माने जाते हैं। ठगी से कमाए गए पैसों को शेल कंपनियों, हवाला नेटवर्क और P2P क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस के जरिए बाहर भेजा जाता था, जिससे मनी ट्रेल को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
ED ने निवेशकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन क्रिप्टो या हाई-रिटर्न स्कीम में पैसा लगाने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और अनजान वेबसाइट्स या सोशल मीडिया ग्रुप्स के दावों पर भरोसा न करें।
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