एलन मस्क की Starlink के लिए भारत में पॉजिटिव संकेत, सरकार ने कहा, सैटेलाइट इंटरनेट जरूरी

देश में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए स्टारलिंक को रेगुलेटरी अप्रूवल नहीं मिला है। स्टारलिंक को स्पेक्ट्रम की प्राइसिंग पर रूल्स का इंतजार है

विज्ञापन
Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 18 मार्च 2025 23:46 IST
ख़ास बातें
  • स्टारलिंक को स्पेक्ट्रम की प्राइसिंग पर रूल्स का इंतजार है
  • टेलीकॉम रेगुलेटर इस स्पेक्ट्रम के लिए रूल्स बना रहा है
  • दुनिया में इंटरनेट का भारत दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है

दुनिया में इंटरनेट का भारत दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है

बिलिनेयर Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली Starlink जल्द भारत में बिजनेस शुरू कर सकती है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से स्टारलिंक को एक पॉजिटिव संकेत मिला है। टेलीकॉम मिनिस्टर Jyotiraditya Scindia ने कहा है कि दूरदराज के क्षेत्रों तक इंटरनेट को पहुंचाने के लिए इस सर्विस की जरूरत है। 

हाल ही में स्टारलिंक ने देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों Reliance Jio और Bharti Airtel के साथ टाई-अप किया था। सिंधिया ने एक इंटरव्यू में कहा, "देश में ऐसे कई दूरदराज के क्षेत्र हैं जहां फाइबर या मोबाइल कनेक्टिविटी को नहीं पहुंचाया जा सकता। आपके पास अगर सैटेलाइट इंटरनेट नहीं होगा तो आप 100 प्रतिशत कवरेज तक कैसे पहुंचेंगे?" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर प्राकृतिक आपदाओं से टावर्स और फाइबर नेटवर्क को नुकसान होता है तो सैटेलाइट कनेक्टिविटी ही एकमात्र तरीका है। 

देश में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए स्टारलिंक को रेगुलेटरी अप्रूवल नहीं मिला है। स्टारलिंक को स्पेक्ट्रम की प्राइसिंग पर रूल्स का इंतजार है। हालांकि, इस कंपनी के लिए रुकावटें हट रही हैं। सिंधिया ने कहा, "देश का मार्केट ऐसी किसी भी कंपनी के लिए खुला है जो इस बडे मार्केट में हिस्सा लेना और सर्विस एक उपलब्ध कराना चाहती है. उपभोक्ताओं को यह फैसला करना है कि वह किस कंपनी की सर्विस का इस्तेमाल करेंगे।" सिंधिया ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया कि क्या स्टारलिंक को लाइसेंस मिल सकता है या स्पेक्ट्रम के लिए सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से स्पेक्ट्रम का कितना प्राइस लिया जाएगा। 

टेलीकॉम रेगुलेटर इस स्पेक्ट्रम के लिए रूल्स बना रहा है। दुनिया में इंटरनेट का भारत दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है। देश में मोबाइल इंटरनेट के लिए प्रति गीगाबाइट चार्ज अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। सिंधिया ने बताया कि सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनियां ही इसके लिए प्राइसिंग को तय करेंगी। टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) की ओर से लोकल डेटा स्टोरेज और सरकार की ओर से डेटा इंटरसेप्शन से जुड़ी शर्तों के लिए स्टारलिंक ने औपचारिक तौर पर सहमति दी है। देश में इस सर्विस लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए सभी कंपनियों को इन शर्तों को मानना होगा। DoT ने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के लिए किसी विदेशी कंपनी को लाइसेंस नहीं दिया है। 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी ...और भी

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Vivo X Fold 6 में मिल सकता है 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा
#ताज़ा ख़बरें
  1. BSNL का दमदार परफॉर्मेंस, प्रति यूजर रेवेन्यू 42 प्रतिशत बढ़ा
  2. iQOO Z11 के इंटरनेशनल वेरिएंट में मिल सकता है Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट, Geekbench पर हुई लिस्टिंग
  3. Moto Buds 2 Plus भारत में लॉन्च: Bose ट्यूनिंग, ANC के साथ 40 घंटे की बैटरी! जानें कीमत
  4. YouTube के जिस फीचर के लिए लोग देते थें पैसे, अब फ्री यूजर्स भी उठाएंगे फायदा
  5. Vivo X Fold 6 में मिल सकता है 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा
  6. इंडिया में AI इमेज का क्रेज! ChatGPT Images 2.0 में सबसे आगे भारतीय
  7. Moto G47 हुआ लॉन्च 108MP कैमरा, 5200mAh बैटरी, फास्ट चार्जिंग के साथ, जानें कीमत
  8. Apple के iPhone हो सकते हैं महंगे, मेमोरी कंपोनेंट्स की कॉस्ट बढ़ने का असर!
  9. 180 दिन की बैटरी वाला स्मार्ट इलेक्ट्रिक टूथब्रश Xiaomi ने किया लॉन्च, जानें कीमत
  10. Moto G37 और Moto G37 Power इंटरनेशनल मार्केट में हुए लॉन्च, जानें प्राइस, स्पेसिफिकेशंस
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.