स्टेबलकॉइन्स में गिरावट से क्या मिल रहा संकेत

यह पहली बार नहीं है कि जब स्टेबलकॉइन्स में इस तरह की गिरावट हुई है। Tether और USDC में इससे पहले भी गिरावट आ चुकी है

स्टेबलकॉइन्स में गिरावट से क्या मिल रहा संकेत

क्रिप्टो का तेजी से बढ़ता वर्जन स्टेबलकॉइन एक्सचेंज के प्रमुख माध्यम के तौर पर उभरा है

ख़ास बातें
  • Tether, USDC जैसे स्टेबलकॉइन्स का डॉलर के साथ जुड़ाव टूट गया था
  • स्टेबलकॉइन्स के इस्तेमाल से ट्रेडर्स को फंड भेजने में आसानी होती है
  • स्टेबलकॉइन्स का सामान्य एसेट्स में रिजर्व होता है
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क्रिप्टो का एक अधिक सुरक्षा वाला वर्जन कहे जाने वाले स्टेबलकॉइन्स में पिछले सप्ताह भारी बिकवाली हुई है। इससे क्रिप्टोकरेंसीज जैसी वोलैटिलिटी से बचने का दावा करने वाले स्टेबलकॉइन्स में इनवेस्टर्स के लिए रिस्क बढ़ा है। Tether और USDC जैसे प्रमुख स्टेबलकॉइन्स का पिछले सप्ताह डॉलर के साथ जुड़ाव टूट गया था। 

Coinmarketcap के डेटा के अनुसार, बड़े स्टेबलकॉइन्स का प्राइस घटकर 0.95 डॉलर से 1.02 डॉलर के बीच रह गया था। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जब स्टेबलकॉइन्स में इस तरह की गिरावट हुई है। Tether और USDC में इससे पहले भी गिरावट आ चुकी है लेकिन स्टेबलकॉइन्स को लेकर ऐसी वोलैटिलिटी इससे पहले नहीं रही। सिंगापुर की लॉ फर्म Reed Smith में फाइनेंशियल रेगुलेशन पार्टनर Hagen Rooke ने कहा, "क्रिप्टो सेगमेंट में स्टेबलकॉइन्स सिस्टम के लिहाज से एक महत्वपूर्ण एसेट है। स्टेबलकॉइन्स की वैल्यू पर असर होने से पूरे सिस्टम को झटका लगेगा। स्टेबलकॉइन्स को लेकर रेगुलेशन अधिक नहीं है। यह एक प्रकार से बैंक डिपॉजिट के समान है।" 

स्टेबलकॉइन्स ऐसी क्रिप्टोकरेंसीज होते हैं जो अपने मार्केट प्राइस को गोल्ड या सामान्य करेंसीज जैसे किसी रिजर्व एसेट से जोड़ने की कोशिश करते हैं। ये ऐसी डिजिटल ट्रांजैक्शंस के लिए अधिक इस्तेमाल होते हैं जिनमें वर्चुअल एसेट्स को वास्तविक एसेट्स में कन्वर्ट करना शामिल होता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, USD Coin, Tether और Binance USD कुछ लोकप्रिय स्टेबलकॉइन्स हैं, जो अमेरिकी डॉलर से जुड़े हैं। क्रिप्टो का तेजी से बढ़ता वर्जन स्टेबलकॉइन एक्सचेंज के प्रमुख माध्यम के तौर पर उभरा है। इसका इस्तेमाल अक्सर ट्रेडर्स की ओर से फंड भेजने के लिए किया जाता है। प्रमुख स्टेबलकॉइन्स को बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसीज के लिए एक्सचेंज करना आसान है। अन्य स्टेबलकॉइन्स का सामान्य एसेट्स में रिजर्व होता है लेकिन TerraUSD इसे एक एल्गोरिद्म के जरिए बरकरार रखता है, जो एक अन्य बैलेंसिंग टोकन Luna के इस्तेमाल से सप्लाई और डिमांड को नियंत्रित रखती है। एल्गोरिद्मिक स्टेबलकॉइन कहे जाने वाले TerraUSD ने पिछले सप्ताह डॉलर के साथ अपने 1:1 के जुड़ाव को तोड़ दिया था।

एक प्रमुख स्टेबलकॉइन Paxos के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर Chad Cascarilla का कहना है, "इकोनॉमी अब इंटरनेट की ओर शिफ्ट हो रही है लेकिन फाइनेंशियल सिस्टम के साथ ऐसा नहीं है। इस वजह से इकोनॉमी की गति से डॉलर के मूव करने के लिए आपको स्टेबलकॉइन की जरूरत है।" स्टेबलकॉइन्स को लेकर अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, इनमें से कुछ इनवेस्टर्स के लिए फायदेमंद हो सकते हैं और कुछ में नुकसान होने का रिस्क रहेगा। 


(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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ये भी पढ़े: Crypto, Selling, Tether, stablecoins, Digital, Terra, Regulation

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