भारत में क्रिप्टोकरेंसी को एक 'एसेट' का दर्जा नहीं दिया गया है। इस वजह से इस सेगमेंट को रेगुलेट करने का कोई सवाल नहीं है। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने की जरूरत बताई थी
सोशल मीडिया पर इस सेगमेंट को रेगुलेट करने से जुड़ा गलत दावा किया गया था
केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि उसकी क्रिप्टो सेगमेंट को रेगुलेट करने की योजना नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने बताया है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को एक 'एसेट' का दर्जा नहीं दिया गया है। इस वजह से इस सेगमेंट को रेगुलेट करने का कोई सवाल नहीं है। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने की जरूरत बताई थी।
प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में इस दावे को गलत बताया कि फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से क्रिप्टो सेगमेंट को रेगुलेट करने पर विचार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह झूठा दावा किया गया था कि फाइनेंस मिनिस्ट्री ने RBI और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने की संभावना तलाशने को कहा है। PIB की ओर से इस दावे को गलत बताया गया है। क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन के लिए इसे एक एसेट के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए और भारत में ऐसा नहीं है। PIB की पोस्ट में बताया गया है, "भारत में क्रिप्टो को एक एसेट के तौर पर मान्यता नहीं मिली है। फाइनेंस मिनिस्ट्री की ओर से इस प्रकार का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।"
इसके साथ ही PIB ने पुष्टि वाली जानकारी के लिए सिर्फ आधिकारिक सूत्रों से हासिल करने का निवेदन किया है। पिछले कुछ महीनों में क्रिप्टो मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। मार्केट वैल्यू के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin ने पिछले वर्ष अक्टूबर में 1,26,000 डॉलर से अधिक का हाई बनाया था। इसके बाद से बिटकॉइन में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसके पीछे कुछ देशों के बीच तनाव और मंदी की आशंका जैसे कारण हैं।
हाल ही में Reuters की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार ने क्रिप्टोकरेंसीज को रेगुलेट करने या इस सेगमेंट पर बैन लगाने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। हालांकि, वर्चुअल डिजिट एसेट्स (VDA) से जुड़े जोखिमों को लेकर RBI जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों की चिंता बरकरार है। इस रिपोर्ट में इंटरनल डॉक्युमेंट्स के हवाले से कहा गया था कि RBI का मानना है कि बैंकों और अन्य फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को क्रिप्टोकरेंसीज या प्राइवेट एंटिटीज के स्टेबलकॉइन्स को होल्ड करने, ट्रेडिंग या इनमें फंड लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही RBI का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसीज को रेगुलेटेड फाइनेंशियल सिस्टम के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी क्रिप्टोकरेंसीज में ट्रेडिंग को लेकर आशंका जताई है।
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