Spacex News

Spacex News - ख़बरें

  • Elon Musk की टेंशन बढ़ाएगा Amazon! सैटेलाइट से सीधे फोन तक इंटरनेट, भारत में भी होगी एंट्री?
    Amazon ने अमेरिकी FCC से 5,105 नए Low Earth Orbit (LEO) सैटेलाइट लॉन्च करने की मंजूरी मांगी है। कंपनी Amazon Leo प्रोजेक्ट के तहत Direct-to-Device (D2D) तकनीक विकसित कर रही है, जिससे बिना मोबाइल टावर के सीधे स्मार्टफोन पर मैसेज, कॉल और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इस कदम को Starlink के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। फिलहाल Amazon ने भारत में इस सेवा के लॉन्च की घोषणा नहीं की है। वहीं भारत में Starlink, OneWeb और Jio की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं भी अभी शुरुआती चरण में हैं और व्यावसायिक विस्तार का इंतजार कर रही हैं।
  • SpaceX का 4000 किलोग्राम का रॉकेट चांद से टकराएगा! बनेगा 30 मीटर चौड़ा गड्ढा, इस दिन होगी टक्कर
    SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का अपर स्टेज जल्द ही चांद से टकराने वाला है। यह टक्कर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगी जिसे धरती से भी देखा जा सकेगा। SpaceX ने 15 जनवरी 2025 को दो लूनर लैंडर लॉन्च किए थे। इस दौरान रॉकेट का अपर स्टेज स्पेस में छूटा रह गया।
  • मेघालय के पहाड़ों पर सैटेलाइट से मिलेगा इंटरनेट! Starlink और सरकार के बीच हुई डील
    मेघालय सरकार ने Starlink के साथ सैटेलाइट इंटरनेट के लिए MoU साइन किया है। Conrad K Sangma के मुताबिक इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य के दूरदराज इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना है। इस पहल से स्कूल, हेल्थ सेंटर और ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही ऑनलाइन शिक्षा, हेल्थकेयर और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
  • Elon Musk आम जनता के लिए ला रहे हैं सैटेलाइट फोन? नए दावे ने खोल दिए राज!
    SpaceX के संभावित IPO से पहले Starlink बिजनेस से जुड़े नए प्लान्स सामने आए हैं। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी Starlink की पहुंच बढ़ाने के लिए नए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर काम कर रही है, जिनमें Starlink फोन, डायरेक्ट टू डिवाइस इंटरनेट और स्पेस ट्रैकिंग सर्विस शामिल हो सकती हैं। हालांकि SpaceX ने इन योजनाओं को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Elon Musk ने भी हाल ही में साफ किया है कि फिलहाल SpaceX किसी फोन पर काम नहीं कर रही है, लेकिन भविष्य में इस तरह का आइडिया पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
  • Starlink क्या है, कैसे करता है काम? भारत में इसकी कीमत से लेकर फायदे–कमियों तक, यहां समझें सब कुछ
    भारत में Starlink को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है, खासकर तब से जब रिपोर्ट्स ने इसकी संभावित कीमत और लॉन्च की ओर इशारा किया है। SpaceX की यह सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लो-अर्थ ऑर्बिट में घूमते हजारों सैटेलाइट्स की मदद से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड देती है, जो मुश्किल इलाकों में भी काम कर सकती है। भारत के लिए कंपनी ने अभी आधिकारिक प्राइस घोषित नहीं किया है, लेकिन ET की रिपोर्ट बताती है कि मंथली प्लान 2,500-3,500 रुपये और हार्डवेयर किट लगभग 25,000-30,000 रुपये हो सकती है। Starlink दूर-दराज क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर बन सकती है, हालांकि कीमत और मौसम का असर इसके सामने बड़ी चुनौतियां हैं।
  • इंतजार खत्म! 2026 में अंतरिक्ष की सैर, दुनिया का पहला प्राइवेट स्पेस स्टेशन Haven-1 होगा शुरू
    दुनिया का पहला प्राइवेट स्पेस स्टेशन जल्द ही हकीकत बनने वाला है। वास्ट स्पेस (Vast Space) की ओर से यह स्पेस स्टेशन तैयार किया जा रहा है जो दुनिया का पहला निजी अंतरिक्ष स्टेशन होगा। स्पेस स्टेशन का नाम Haven-1 है और यह 2026 में दुनिया के लिए खोल दिया जाएगा। यह एक सिंगल मॉड्यूल आवास होगा जिसे SpaceX Falcon 9 के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।
  • Starlink के सैटेलाइट गिर रहे हैं! पृथ्वी के लिए नया खतरा
    स्टारलिंक के सैटेलाइट लगभग रोजाना पृथ्वी पर वापस गिर रहे हैं। जिससे वैज्ञानिकों में अंतरिक्ष मलबे की संभावित चेन रिएक्शन के बारे में चिंता बढ़ रही है, जो धरती की निचली कक्षा की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। प्राप्त किए गए डेटा के अनुसार मौजूदा समय में लगभग एक से दो स्टारलिंक सैटेलाइट प्रतिदिन पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हैं। अगर ऐसा ही जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में और अधिक तारामंडलों के पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के साथ सैटेलाइट वापस गिरने की यह संख्या प्रतिदिन पाँच तक बढ़ सकती है।
  • भारतीय एस्ट्रोनॉट Shubhanshu Shukla का Axiom-4 मिशन 19 जून को होगा लॉन्च
    बिलिनेयर Elon Musk की रॉकेट कंपनी SpaceX की एक टीम ने यह पुष्टि की है कि इस Axiom-4 मिशन को टालने के पीछे की समस्या का समाधान किया गया है। इस स्पेस मिशन को 29 मई को लॉन्च किया जाना था। हालांकि, इसके बाद इसे 8 जून, 10 जून और 11 जून को टाला गया था। SpaceX ने बताया था कि Falcon-9 रॉकेट में एक लिक्विड ऑक्सिजन लीक की वजह से 11 जून को इस मिशन का लॉन्च टाला गया था।
  • सोलर तूफानों से Elon Musk की Starlink के सैटेलाइट्स आसमान से गिर रहे
    अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के Goddard Space Flight Centre में स्पेस फिजिसिस्ट, Denny Oliveira ने पिछले कुछ वर्षों में धरती पर वापस गिरे स्टारलिंक के 523 सैटेलाइट्स पर एक स्टडी की अगुवाई की है। इस स्टडी में पता चला है कि सूर्य में विस्फोटों से बनने वाले जियोमैग्नेटिक तूफानों से वातावरण में खिंचाव बढ़ता है और इससे सैटेलाइट्स ऑर्बिट से गिरकर तेजी से वातावरण में दोबारा एंट्री करते हैं।
  • आज रात फ‍िर उड़ेगा दुनिया का सबसे भारी रॉकेट Starship! मकसद क्‍या है? जानें
    दुनिया के सबसे भारी रॉकेट में रूप में ‘शोहरत’ पा चुका स्‍पेसएक्‍स का ‘स्‍टारशिप’ (Starship) एक बार फ‍िर टेस्‍ट फ्लाइट से गुजरने जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार, 19 नवंबर की रात करीब 2.45 बजे इसे लॉन्‍च किया जा सकता है। पिछली पांचों टेस्‍ट फ्लाइट्स की तरह इस बार भी रॉकेट के दोनों हिस्‍सों- फर्स्‍ट स्‍टेज और अपर स्‍टेज को परखा जाएगा।
  • Elon Musk की कंपनी ने क्‍यों लॉन्‍च किया ISRO का सैटेलाइट? क्‍या भारत के पास नहीं है क्षमता? जानें
    स्‍पेसएक्‍स के फाल्‍कन-9 रॉकेट ने इसरो के GSAT-N2 कम्‍युनिकेशंस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाया। GSAT-N2 सैटेलाइट का वजन 10360 पाउंड यानी करीब 4700 किलोग्राम है। इसे अंतरिक्ष में ऐसी कक्षा में पहुंचाया गया है, जो हमारी पृथ्‍वी से 22,236 मील (35,786 किलोमीटर) ऊपर स्थित है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी भारतीय रॉकेट इतने भारी पेलोड को इतनी दूर तक नहीं ले जा सकता, इसलिए इसरो ने फाल्कन-9 रॉकेट का चुनाव किया।
  • 232 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने के बाद धरती पर लौटे 4 अंतरिक्ष यात्री, देखें Video
    इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) में कई दिनों तक रुकने के बाद चार अंतरिक्ष यात्री सकुशल पृथ्‍वी पर लौट आए हैं। क्रू8 (Crew-8) के एस्‍ट्रोनॉट्स- मैथ्यू डोमिनिक, माइकल बैरेट, जीनेट एप्स और अलेक्जेंडर ग्रेबेनकिन ने शुक्रवार को फ्लोरिडा के पेंसाकोला के तट से दूर मैक्सिको की खाड़ी में लैंड किया। ये अंतरिक्ष यात्री 232 दिनों तक स्‍पेस में रुके। उन्‍हें दो हफ्तों से ज्‍यादा वक्‍त तक इंतजार करना पड़ा, क्‍योंकि मौसम साथ नहीं दे रहा था।
  • Big Breaking : स्‍पेसएक्‍स ने रचा इतिहास, दुनिया के सबसे भारी रॉकेट का लॉन्‍च टेस्‍ट ‘कामयाब’, बूस्‍टर की सफल लैंडिंग
    अंतरिक्ष के क्षेत्र में रविवार को इतिहास रचा गया। एलन मस्‍क की स्‍पेस कंपनी स्‍पेसएक्‍स ने दुनिया के सबसे भारी रॉकेट स्‍टारशिप का पांचवीं बार परीक्षण किया। स्‍पेसएक्‍स को बड़ी कामयाबी मिली, क्‍योंकि रॉकेट का बूस्‍टर लॉन्‍च साइट पर वापस लौट आया। वहीं, अपर स्‍टेज भी तय समय पर स्‍पैलशडाउन के लिए हिंद महासागर में पहुंच गया। यह भविष्‍य में इंसान को मंगल ग्रह (Mars) तक ले जाने का रास्‍ता पुख्‍ता करेगा।
  • Elon Musk की बड़ी कामयाबी! अंतरिक्ष से मोबाइलों में भेजे अलर्ट मैसेज
    स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) की स्‍टारलिंक सैटेलाइट सर्विस को अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने देश के कुछ हिस्‍सों में डायरेक्ट-टू-सेल सर्विस देने की मंजूरी दी है। आसान भाषा में समझाएं तो अमेरिकी यूजर्स के मोबाइल में सीधे सैटेलाइट से नेटवर्क आ रहा है। हालांकि यह मंजूरी उत्तरी कैरोलिना के इलाकों के लिए दी गई है, क्‍योंकि वहां तूफान हेलेन के कारण टेलिकॉम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को नुकसान पहुंचा है।
  • आज अंतरिक्ष में उड़ेगा ‘हेरा’, 2026 में वहां पहुंचेगा, जहां एस्‍टरॉयड से टकराया था Nasa का स्‍पेसक्राफ्ट, मकसद क्‍या है?
    नासा ने साल 2022 में DART (डबल एस्‍टरॉयड रीडायरेक्‍शन टेस्‍ट) मिशन को टेस्‍ट किया था। एक स्‍पेसक्राफ्ट को डिमोर्फोस एस्‍टरॉयड से टकराया था। शुरुआती नतीजे उत्‍साहजनक रहे थे और नासा ने कन्‍फर्म किया था कि टक्‍कर के कारण एस्‍टरॉयड के पथ में बदलाव हुआ। नासा अपने मकसद में कितना कामयाब रही, यह पता लगाने के लिए SpaceX हेरा स्‍पेसक्राफ्ट को लॉन्‍च करने जा रही है। यह साल 2026 में डिमोर्फोस तक पहुंचकर उसे हुए इम्‍पैक्‍ट का आकलन करेगा।

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