Starlink के सैटेलाइट गिर रहे हैं! पृथ्वी के लिए नया खतरा

प्रत्येक स्टारलिंक सैटेलाइट का जीवनकाल लगभग पाँच से सात वर्ष होता है।

Starlink के सैटेलाइट गिर रहे हैं! पृथ्वी के लिए नया खतरा

स्टारलिंक के सैटेलाइट लगभग रोजाना पृथ्वी पर वापस गिर रहे हैं।

ख़ास बातें
  • स्टारलिंक सैटेलाइट का वापस गिरना बन रहा चिंता का कारण
  • अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे से पैदा हो रहा खतरा
  • प्रत्येक स्टारलिंक सैटेलाइट का जीवनकाल लगभग पाँच से सात वर्ष होता है
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पृथ्वी की निचली कक्षा के लिए मनुष्य धीरे-धीरे एक नया खतरा पैदा करता जा रहा है। स्पेस कंपनियां इस कक्षा में लगातार स्पेसक्राफ्ट और सैटेलाइट्स भेजती रहती हैं जो ऑर्बिट में लगातार चक्कर लगा रहे हैं। यहां हजारों की संख्या में सैटेलाइट्स घूम रहे हैं जो पृथ्वी पर महत्वपूर्ण जानकारी भेजते हैं। इन सैटेलाइट्स को अलग-अलग कंपनियां भेजती हैं जिनमें से एक बड़ा स्टारलिंक का भी है। स्टारलिंक लगातार अपने सैटेलाइट्स के नेटवर्क को बढ़ाती जा रही है। लेकिन इसी के चलते यहां पर एक नई समस्या पैदा हो रही है। प्रतिदिन बढ़ती संख्या में स्टारलिंक सैटेलाइट पृथ्वी पर वापस आ रहे हैं।

नई रिपोर्ट के अनुसार स्टारलिंक के सैटेलाइट लगभग रोजाना पृथ्वी पर वापस गिर रहे हैं। जिससे वैज्ञानिकों में अंतरिक्ष मलबे की संभावित चेन रिएक्शन के बारे में चिंता बढ़ रही है। ये धरती की निचली कक्षा की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। स्मिथसोनियन खगोलशास्त्री जोनाथन मैकडॉवेल द्वारा ट्रैक किए गए डेटा के अनुसार मौजूदा समय में लगभग एक से दो स्टारलिंक सैटेलाइट प्रतिदिन पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हैं। अगर ऐसा ही जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में SpaceX, अमेज़न के प्रोजेक्ट कुइपर और चीनी प्रणालियों के और अधिक तारामंडलों के पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के साथ सैटेलाइट वापस गिरने की यह संख्या प्रतिदिन पाँच तक बढ़ सकती है।

प्रत्येक स्टारलिंक सैटेलाइट का जीवनकाल लगभग पाँच से सात वर्ष होता है। इसका मतलब यह कहा जा सकता है कि पुराने यूनिट्स नियमित रूप से सिस्टम फेल के चलते या सौर गतिविधि के कारण कक्षा से बाहर हो जाते हैं या फिर गिर जाते हैं। 

कैसलर सिंड्रोम का बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों की मानें तो वे कई बार इस बारे में चेतावनी जारी कर चुके हैं। कहा गया है कि निष्क्रिय हो चुके सैटेलाइट्स, रॉकेट के टुकड़ों और अन्य मलबे की बढ़ती संख्या पृथ्वी को कैसलर सिंड्रोम की ओर धकेल रही है। कैसलर सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति कही जाती है जिसमें वस्तुओं के बीच टकराव से और ज्यादा मलबा उत्पन्न होता है, जिससे प्रभावों की एक श्रृंखला बनती जाती है। यदि ऐसी स्थिति पैदा होती है तो अंतरिक्ष के कुछ हिस्से भविष्य के सैटेलाइट्स के लिए अनुपयोगी हो जाएंगे तथा भू-आधारित खगोल विज्ञान में बाधा उत्पन्न हो सकती है। 

Spacex के स्टारलिंक नेटवर्क ने ग्लोबल कनेक्टिविटी में जाहिर तौर पर क्रांति ला दी है, लेकिन इसका तेज़ी से विस्तार निचली कक्षा में बढ़ती भीड़भाड़ को और बढ़ा रहा है। अगले कुछ वर्षों में दसियों हज़ार उपग्रहों के प्रक्षेपण की उम्मीद की जा रही है। लेकिन इसी के साथ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अंतरिक्ष यातायात और मलबे का प्रबंधन जल्द ही इस दशक के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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