हाल ही में हुईं कुछ स्टडीज से पता चला है कि धूमकेतुओं के टकराने से पृथ्वी के वायुमंडल पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ये ग्रहों के वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं, विशेष रूप से वे ग्रह जो एम-ड्वार्फ तारों की परिक्रमा करते हैं। इन नतीजों ने न केवल ग्रहों के निर्माण की समझ को बढ़ाया है, बल्कि सुदूर रहने योग्य दुनिया की पहचान करने की उम्मीद भी जगाई है।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के बाहर एक ग्रह पर कुछ ऐसे तत्व होने का दावा किया है जो जीवन के लिए जरूरी प्रक्रिया में शामिल रहते हैं। इस एग्जोप्लेनेट का नाम K2-18 b है जिस पर कुछ गैसों के कैमिकल फिंगरप्रिंट मिले हैं। सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन गैसों के निशान वहां पर मिले हैं, वे गैसें पृथ्वी पर केवल किसी जैविक प्रक्रिया के दौरान ही बनती हैं।
Astronomy & Astrophysics में पब्लिश की गई एक स्टडी बताती है कि वैज्ञानिकों द्वारा पृथ्वी के पास स्थित HD 20794 d नाम के एक एक्सोप्लैनेट की पुष्टि की गई है। इस ग्रह पर पहली बार 2022 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. माइकल क्रेटिनियर ने चिली में HARPS स्पेक्ट्रोग्राफ के डेटा का उपयोग करके संदेह जताया था। इस उपकरण ने ग्रह के मेजबान तारे से लाइट में छोटे बदलावों का पता लगाया, जिससे पता चला कि कुछ है, जो इसकी परिक्रमा कर रहा था।
अगर आप अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं में दिलचस्पी रखते हैं, तो आज मंगलवार को एक अहम खगोलीय नजारे का गवाह बनने का मौका मिलेगा। इसे ‘प्लैनेटरी परेड 2025’ कहा जा रहा है, जिसमें एकसाथ 6 ग्रहों को सीधी लाइन में देखा जा सकेगा। 4 ग्रह तो बिना टेलीस्कोप यानी नग्न आंखों से नजर आएंगे। क्या होती है प्लैनेटरी परेड। कौन-कौन से ग्रह आसमान में दिखाई देंगे। इसकी पूरी डिटेल हम आपको देने जा रहे हैं।
पहली बार वैज्ञानिकों ने दूसरे ग्रह पर किसी हेलीकॉप्टर की जांच की है। Nasa JPL के Ingenuity मिशन मैनेजरों का कहना है कि हेलीकॉप्टर को लाल ग्रह (Red Planet) पर दूसरा जीवन मिल सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि हेलीकॉप्टर के बैटरी सेंसर काम कर रहे हैं और यह हेलीकॉप्टर अब एक तरह के मौसम स्टेशन (Weather Station) के रूप में काम करना जारी रखेगा।
भारतीयों के खाने-पीने की आदत और हमारा भोजन, क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद कर सकता है। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने के अलावा भारतीयों की खान-पान की आदतें ग्लोबल क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद कर सकती हैं। वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीयों द्वारा अपनाए जाने वाला भोजन G20 देशों में सबसे ज्यादा क्लाइमेट के अनुकूल है।
अक्टूबर में आकाश में एक नया धूमकेतु दिखाई देगा। कई ग्रह भी नजर आएंगे। धूमकेतु को C/2023 A3 (Tsuchinshan-ATLAS) नाम से जाना जाता है, जो 14 अक्टूबर के बाद शाम के समय दिखाई दे सकता है। इसके अलावा, सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा की तरफ शुक्र ग्रह को देखा जा सकता है। अंधेरा होने के बाद दक्षिण-पूर्व में शनि दिखाई दे सकता है। मंगल और बृहस्पति रात में दिखाई देंगे।
Cotton candy Planet : एक्सोप्लैनेट का नाम WASP-193 b है। यह हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति की चौड़ाई का लगभग 1.5 गुना है, लेकिन इसका द्रव्यमान बृहस्पति के दसवें हिस्से जितना है।
इसकी सतह पर चट्टानें पिघले हुए रूप में मौजूद हैं और इनसे लगातार गैसे निकल रही हैं जो इसके वातावरण में भरी हुई हैं। यानी यहां पर मैग्मा का महासागर मौजूद है।