एन्सिलेडस के महासागर में जीवन के विकास के लिए संतुलन की आवश्यकता होगी।
Photo Credit: NASA
शनि के बर्फीले चंद्रमा एन्सिलेडस पर जीवन पनपने की संभावना को वैज्ञानिकों ने प्रबल होने का दावा किया है।
हमारे सौरमंडल में पृथ्वी के बाहर और कहां जीवन हो सकता है? वैज्ञानिकों को यह सवाल कई दशकों से परेशान करता आया है। अंतरिक्ष वैज्ञानिक लगातार ऐसे ग्रह की तलाश में हैं जहां पर पृथ्वी की तरह जीवन पनप सके। इस संबंध में शनि ग्रह के चंद्रमा हमेशा से ध्यान खींचते आए हैं। हमारे सौरमंडल के खूबसूरत ग्रह शनि का एक चंद्रमा है जिसे एंसिलेडस कहते हैं। इस चंद्रमा ने वैज्ञानिकों के मन में नई आस जगाई है। चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव से उष्मा का रिसाव खोजा गया है जो वहां पर जीवन को पनाह देने के लिए उत्तम परिस्थितियों का निर्माण कर सकता है।
शनि के बर्फीले चंद्रमा एन्सिलेडस पर जीवन पनपने की संभावना को वैज्ञानिकों ने प्रबल होने का दावा (via) किया है। वजह है इसके उत्तरी ध्रुव से निकलती गर्मी। कहा गया है कि जमे हुए चंद्रमा के नॉर्थ पोल से निकलने वाली गर्मी की खोज से एक बड़ा संकेत मिलता है। वह यह कि भूगर्भीय समय-सीमा में इसका महासागर स्थिर है, जिससे वहां जीवन विकसित होने का समय मिलता है। Oxford University की कार्ली हॉवेट के अनुसार, पहली बार हम पुख्ता तौर पर साथ कह सकते हैं कि एन्सिलेडस स्थिर अवस्था में है, और इसका वहां रहने की संभावना पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।"
दरअसल एन्सिलेडस पिछले काफी समय से वैज्ञानिकों के लिए उस खगोलीय पिंड के रूप में खोज का विषय रहा है जिस पर जीवन की सबसे ज्यादा संभावना नजर आती रही है। वैज्ञानिक अब तक भली-भांति जानते थे कि इस पर द्रव्य का सागर, उष्मा, ऑर्गेनिक अणु आदि सब मौजूद हैं, लेकिन बात अटकी हुई थी स्थिरता पर। आखिर में वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि इसकी यह अवस्था स्थिर भी है। इस अवस्था का स्थिर होना ही वहां पर जीवन होने की सबसे ज्यादा संभावना बनाता दिखता है।
हॉवेट और उनके सहयोगियों ने नासा के कैसिनी स्पेस क्राफ्ट के डेटा का इस्तेमाल किया। कैसिनी ने 2004 से 2017 तक शनि की परिक्रमा की थी। पता चला कि इसका आंतरिक भाग ज्वारीय बलों से गर्म होता है क्योंकि शनि के गुरुत्वाकर्षण के कारण यह खिंचता और सिकुड़ता है। मगर अभी तक यह उष्मा केवल दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों से ही रिसती हुई पाई गई थी जो कि अब उत्तरी ध्रुव से भी पाई गई है।
एन्सिलेडस के महासागर में जीवन के विकास के लिए संतुलन की आवश्यकता होगी। यानी महासागर को उतनी ही ऊष्मा बाहर निकालनी चाहिए जितनी अंदर डाली जा रही है। दक्षिणी ध्रुव से निकलने वाली ऊष्मा के मापन में सभी ऊष्मा इनपुट का हिसाब नहीं होता, लेकिन हॉवेट और उनकी टीम ने पाया कि उत्तरी ध्रुव हमारे पहले के अनुमान से लगभग 7 डिग्री ज़्यादा गर्म है। यानी यहां से भी पर्याप्त मात्रा में हीट निकल रही है जो कि इसको जीवन के लिए स्थिरता की ओर ले जाता लगता है।
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