Innovation

Innovation - ख़बरें

  • जापान ने बनाया 'इंसानों का फ्रिज'! वीडियो शेयर कर हर्ष गोयनका बोले- इसे हर सड़क किनारे लगा देना चाहिए
    हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर जापान के Do Hiemon Box का वीडियो शेयर किया है, जिसे Human Fridge भी कहा जा रहा है। यह पोर्टेबल कूलिंग बूथ 15°C तापमान बनाए रखता है और यूजर के सिर, गर्दन व कंधों पर 5°C की ठंडी हवा छोड़ता है। कंपनी के मुताबिक, इससे करीब 10 मिनट में गर्मी से राहत मिल सकती है। सुरक्षा के लिए इसमें तीन कूलिंग मोड और 20 मिनट का ऑटो शट-ऑफ फीचर भी दिया गया है। इस टेक्नोलॉजी को खासतौर पर कंस्ट्रक्शन साइट, फैक्ट्री और अन्य आउटडोर वर्कप्लेस के लिए तैयार किया गया है।
  • रेगिस्तान में भी उगेंगे पेड़? 14 साल के बच्चे ने बनाया हवा से पानी निकालने वाला सिस्टम, ऐसे करता है काम
    चीन के 14 वर्षीय छात्र Jia Mingxuan ने एक नई सिंचाई तकनीक विकसित की है, जिसे जर्मनी के iENA इनोवेशन फेयर में गोल्ड मेडल मिला। यह सिस्टम हवा में मौजूद नमी को संघनित (Condense) करके पानी की बूंदों में बदलता है और उन्हें सीधे पेड़ों की जड़ों तक पहुंचाता है। इसमें किसी पाइपलाइन, पंप या बाहरी जल स्रोत की जरूरत नहीं होती। तकनीक का उद्देश्य रेगिस्तान और सूखे इलाकों में नए लगाए गए पौधों को जीवित रखने में मदद करना है। हालांकि, इसकी व्यावसायिक क्षमता और प्रदर्शन से जुड़ा विस्तृत वैज्ञानिक डेटा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
  • Tecno देगी Apple को भी मात? बेजल-लेस डिस्प्ले वाला फोन किया पेश, देखें पहली झलक
    Tecno ने अपना पहला, बेजल लैस डिस्प्ले वाला फोन पेश कर दिया है! जी हां, कंपनी ने कॉन्सेप्ट के रूप में बेजल रहित डिस्प्ले फोन को पेश करने की तैयारी कर ली है जिसे IFA 2026 में कंपनी सबसे सामने लाने वाली है। Tecno ने आधिकारिक तौर पर अपने नेक्स्ट-जेनरेशन के बेजल-लेस कॉन्सेप्ट फोन की पहली झलक दिखाई है।
  • बच्चे ने गत्ते से बना दिया रोबोट, मां की भी करता है मदद! वीडियो वायरल
    केरल के लेविन पॉलोस नामक लड़के का गत्ते का रोबोट इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह साधारण सा लड़का वीडियो में एक गजब का आविष्कार दिखा रहा है। उसने घर में पड़े पुराने गत्ते, कार्डबोर्ड, तार, बैटरी, छोटी मोटर, और नट-बोल्ट आदि का इस्तेमाल कर एक चलता-फिरता रोबोट तैयार किया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि यह रोबोट घर के काम भी कर लेता है।
  • Vivo Ignite 2026 में रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन, ₹35 लाख तक की स्कॉलरशिप मिलने का मौका
    Vivo India ने अपने नेशनल इनोवेशन प्रोग्राम Vivo Ignite 2026 में अब तक की सबसे ज्यादा भागीदारी दर्ज होने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, इस साल 38,000 से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया और 12,000 से ज्यादा स्कूलों, 705 जिलों तथा 4,500 से अधिक शहरों से एंट्री मिलीं। छात्रों ने 6,100 से ज्यादा यूनिक प्रोजेक्ट आइडिया जमा किए, जिनमें Technology, Agriculture & Climate Change सबसे लोकप्रिय थीम रही। अब चयनित प्रतिभागियों को एक्सपर्ट मेंटरशिप मिलेगी और अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में नेशनल फिनाले आयोजित किया जाएगा।
  • भूकंप आते ही हवा में उठ जाएगा घर! जापान की ये टेक्नोलॉजी कर देगी हैरान
    जापान की Air Danshin Systems Inc. ने भूकंप से बचाव के लिए एक अनोखी तकनीक विकसित की है। यह सिस्टम भूकंप के झटके महसूस होते ही पूरे घर को करीब 3 सेंटीमीटर हवा में उठा देता है, जिससे जमीन का कंपन सीधे इमारत तक नहीं पहुंचता। कंपनी का दावा है कि सिस्टम 0.5 से 1 सेकंड में एक्टिव हो जाता है और बिजली न होने पर भी बैटरी बैकअप के जरिए काम करता है। फिलहाल जापान में करीब 90 घरों और इमारतों में इसका इस्तेमाल हो रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भूकंपों में इसकी क्षमता पर अभी और परीक्षण जरूरी हैं।
  • Vivo Ignite 2026: स्टूडेंट्स के लिए ₹40 लाख प्राइज पूल! यहां जानें रजिस्ट्रेशन और एलिजिबिलिटी डिटेल्स
    Vivo India ने vivo Ignite: Technology and Innovation Initiative का चौथा एडिशन लॉन्च कर दिया है। यह प्रोग्राम कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए है, जिसमें वे टेक्नोलॉजी आधारित प्रोजेक्ट्स बना सकते हैं। कंपनी के मुताबिक स्टूडेंट्स अकेले या टीम में हिस्सा ले सकते हैं और अपने प्रोटोटाइप सबमिट कर सकते हैं। इस साल Aspirational Districts के छात्रों को स्पेशल वेटेज और Achiever 30 जैसे नए स्टेज जोड़े गए हैं। साथ ही टीचर्स के लिए 50,000 रुपये का ग्रांट भी रखा गया है। फाइनल 11 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगा, जहां 40 लाख रुपये तक के रिवॉर्ड्स दिए जाएंगे।
  • KitKat का ये रैपर ब्लॉक करता है सिग्नल! इसमें फोन डालो और ऑफलाइन हो जाओ
    KitKat ने Ogilvy Colombia के साथ मिलकर “Break Mode” नाम का नया पैकेजिंग कॉन्सेप्ट पेश किया है, जो यूजर्स को डिजिटल ब्रेक लेने में मदद करता है। कंपनी के मुताबिक यह पैकेजिंग Faraday Cage की तरह काम करती है, जिसमें फोन रखने पर कॉल, इंटरनेट, Bluetooth और GPS जैसे सभी सिग्नल ब्लॉक हो जाते हैं। इसमें मेटैलिक लेयर्स और स्पेशल डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पूरी तरह नेटवर्क कट जाता है। इस पहल का मकसद यूजर्स को नोटिफिकेशन से दूर रखकर रियल ब्रेक का अनुभव देना है। साथ ही इसे रिसायक्लिंग और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
  • लड़खड़ाया, टकराया, फिर भी जीता - Honor के रोबोट ने तोड़ा इंसानों का वर्ल्ड रिकॉर्ड!
    बीजिंग में आयोजित ह्यूमनॉइड रोबोट हाफ मैराथन में “Lightning” नाम के रोबोट ने 50 मिनट 26 सेकंड में रेस पूरी कर इंसानों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह रोबोट Honor कंपनी ने बनाया है, जिसने हाल ही में रोबोटिक्स सेक्टर में कदम रखा है। इस इवेंट में 100 से ज्यादा रोबोट्स ने हिस्सा लिया और टॉप 3 सभी “Lightning” मॉडल रहे। रेस में ऑटोनॉमस और रिमोट कंट्रोल रोबोट्स दोनों शामिल थे। इस तरह के इवेंट्स को रोबोट्स की बैटरी, मोटर और सॉफ्टवेयर टेस्ट करने का प्लेटफॉर्म भी माना जा रहा है।
  • लंबे नाखून से फोन नहीं चलता? स्टूडेंट ने बनाई अनोखी नेल पॉलिश, ऐसे करेगी काम
    लंबे नाखून रखने वाले यूजर्स के लिए स्मार्टफोन चलाना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान खोजा जा रहा है। ACS में पेश की जाने वाली एक स्टडी के मुताबिक वैज्ञानिक एक ऐसी clear नेल पॉलिश पर काम कर रहे हैं, जो नाखूनों को टचस्क्रीन के साथ compatible बना सकती है। यह पॉलिश हल्की conductivity पैदा कर स्क्रीन को टच रजिस्टर करने में मदद करती है। फिलहाल यह टेक्नोलॉजी शुरुआती स्टेज में है और इसे ज्यादा सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार बनाने के लिए और रिसर्च जारी है।
  • दिमाग से कंट्रोल हो रहा है लैपटॉप! Neuralink इम्प्लांट के बाद शख्स ने शेयर किया 100 दिनों का अनुभव
    Neuralink के N1 ब्रेन इम्प्लांट का इस्तेमाल करने वाले एक पैरालाइज्ड मरीज ने 100 दिन बाद अपने अनुभव साझा किए हैं। Jon L. Noble नाम के इस मरीज के मुताबिक वह अब अपने दिमाग की मदद से कंप्यूटर कंट्रोल कर पा रहे हैं। सर्जरी के कुछ हफ्तों बाद ही उन्होंने कर्सर कंट्रोल, टाइपिंग और यहां तक कि गेमिंग भी शुरू कर दी। कंपनी के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर आधारित है, जो भविष्य में दिव्यांग लोगों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। हालांकि इसके लंबे समय के असर पर अभी और रिसर्च की जरूरत है।
  • Samsung लाएगा 20,000mAh तक बैटरी वाले स्मार्टफोन्स? टेस्टिंग रिपोर्ट हुई लीक
    Samsung SDI कथित तौर पर नई Silicon Carbon बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जिसमें 12,000mAh, 18,000mAh और 20,000mAh क्षमता वाली बैटरियों की टेस्टिंग की जा रही है। लीक हुई इंटरनल रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल 12,000mAh और 18,000mAh बैटरियों के टेस्ट सैंपल करीब 960 चार्ज साइकल के बाद फेल हो गए, जबकि कंपनी का लक्ष्य 1,500 चार्ज साइकल तक पहुंचने का है। रिपोर्ट में बैटरी डिजाइन और मल्टी सेल स्टैकिंग से जुड़ी डिटेल भी सामने आई है। फिलहाल कंपनी इन बैटरियों के डिजाइन और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में सुधार पर काम कर रही है।
  • क्या है वो रोबोट डॉग जिसने AI Summit में Galgotias University से उसका पवेलियन छीन लिया? यहां जानें पूरी कहानी
    India AI Impact Summit 2026 में Galgotias University के स्टॉल पर प्रदर्शित रोबोट डॉग को लेकर विवाद सामने आया है। “Orion” नाम से दिखाए गए इस AI पावर्ड रोबोट को यूनिवर्सिटी की इनोवेशन बताया गया था, लेकिन टेक कम्युनिटी ने इसे Unitree Robotics के कॉमर्शियल मॉडल Unitree Go2 के रूप में पहचाना। इसके बाद सोशल मीडिया पर आलोचना बढ़ी और आयोजकों ने स्टॉल खाली करने के निर्देश दिए। यूनिवर्सिटी ने बाद में स्पष्ट किया कि रोबोट को स्वयं डेवलप नहीं किया गया था, बल्कि छात्रों को टेक्निकल एक्सपीरियंस देने के लिए प्रदर्शित किया गया था।
  • भारत के Medical Dialogues ने जीता Google का JournalismAI इनोवेशन चैलेंज
    वैश्विक स्तर पर आयोजित #JournalismAI Innovation Challenge का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारिता में इनोवेशन को बढ़ाना और इसके भविष्य को बेहतर बनाना है। यह प्रतिस्पर्धा समाचार संगठनों को ऑडिएंस का जुड़ाव और रेवेन्यू में ग्रोथ को बढ़ाने् के लिए AI से जुड़े सॉल्यूशंस को तलाशने के लिए सशक्त बनाती है।
  • स्मार्ट गैजेट्स के बाद अब स्मार्ट दवा! चिप वाली गोली पेट में जाके भेजेगी सिग्नल, जानें किस काम आएगी
    MIT की नई रिसर्च में एक स्मार्ट पिल पेश की गई है, जो मरीज के पेट में पहुंचते ही रेडियो सिग्नल भेजकर यह कन्फर्म कर देती है कि दवा निगली जा चुकी है। इस पिल में बायोडिग्रेडेबल RF एंटीना का इस्तेमाल किया गया है, जो कुछ दिनों में शरीर के अंदर घुल जाता है। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, जिन्हें ट्रांसप्लांट, टीबी या HIV जैसी बीमारियों में नियमित दवा लेना जरूरी होता है। इससे डॉक्टर मरीज की दवा लेने की आदत पर बेहतर नजर रख सकेंगे।

Innovation - वीडियो

विज्ञापन

Follow Us
विज्ञापन
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »