Green Energy

Green Energy - ख़बरें

  • बिजली के बिना भी चार्ज होगी EV! लॉन्च हुई Ethanol-बेस्ड चार्जिंग टेक्नोलॉजी, जानें कैसे करती है काम
    KETO Motors ने हैदराबाद में Ethanol आधारित मोबाइल EV चार्जिंग टेक्नोलॉजी लॉन्च की है। इस तकनीक में Ethanol से चलने वाला जनरेटर बिजली पैदा करता है, जिसके जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी चार्ज की जाती है। यह सिस्टम उन जगहों पर भी EV चार्जिंग की सुविधा दे सकता है, जहां ग्रिड आधारित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं है। कंपनी का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल हाईवे, रिमोट एरिया, इवेंट्स और फ्लीट ऑपरेशन जैसी जगहों पर किया जा सकता है। इसी इवेंट में कंपनी ने अपनी पहली 9-मीटर कमर्शियल इलेक्ट्रिक बस भी पेश की।
  • क्या गाय का गोबर चलाएगा AI? डेटा सेंटर के लिए बिजली बनाने का नया तरीका
    AI मॉडल्स और डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली खपत के बीच Renewable Natural Gas (RNG) एक नए विकल्प के रूप में उभर रहा है। यह गैस गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को प्रोसेस करके तैयार की जाती है और इससे लगातार बिजली पैदा की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। हालांकि, AI की पूरी ऊर्जा जरूरत केवल RNG से पूरी नहीं हो सकती। भविष्य में न्यूक्लियर, सोलर, विंड और दूसरी ऊर्जा तकनीकों के साथ इसका भी महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
  • दुनिया में पहली बार! न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से बनाई ग्रीन हाइड्रोजन, भारत ने रचा इतिहास
    भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का सफल प्रदर्शन किया है। तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित IGCAR में विकसित इस तकनीक में BARC के Copper-Chlorine Thermochemical Process का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से बिना कार्बन एमिशन के ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जा सकती है। इस उपलब्धि के बाद न्यूक्लियर रिएक्टर सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन भी तैयार कर सकेंगे। इससे भारत के क्लीन एनर्जी मिशन और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
  • पानी में तैरने वाले सोलर पैनल, बिजली पैदा करने के साथ बचा रहे खूब पानी, जानें क्या है तकनीक
    दुनिया में कई देश इस समय जल संकट से जूझ रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं कि कैसे पानी को बचाया जाए। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया भी जल संकट का सामना कर रहा है। देश में पानी की सबसे ज्यादा खपत खेती में होती है जो कि देश का करीबन 70 प्रतिशत पानी का हिस्सा है। अब देश में पानी की सप्लाई से बचने के लिए नए तरह का फ्लोटिंग सोलर पैनल तैयार किए हैं, जिससे पानी का बचाव होता है।
  • 1.5 लाख घरों जितनी बिजली बनेगी! Apple ने भारत में किया मोटा निवेश, नए ग्रीन प्रोजेक्ट्स शुरू
    Apple ने भारत में नए पर्यावरण प्रोजेक्ट्स शुरू करने का ऐलान किया है। कंपनी करीब 100 करोड़ रुपये निवेश करके सोलर बिजली प्रोजेक्ट्स, Recycling और Green Startups को सपोर्ट करेगी। Apple, CleanMax के साथ मिलकर 150 मेगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी तैयार करेगा, जिससे हर साल करीब 1.5 लाख घरों जितनी बिजली पैदा हो सकेगी। इसके अलावा WWF-India के साथ मिलकर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम्स और प्लास्टिक पॉल्यूशन कम करने पर काम किया जाएगा। वहीं Acumen के जरिए शुरुआती स्तर के Green Startups को ग्रांट्स, मेंटरशिप और टेक्निकल सपोर्ट भी दिया जाएगा।
  • इलेक्ट्रिक अवतार में आ रहा है 1972 में भारत में लॉन्च हुआ Kinetic Luna मोपेड, प्रोडक्शन शुरू
    इसे KEL की सहयोगी कंपनी काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सॉल्यूशंस लिमिटेड (Kinetic Green Energy & Power Solutions Ltd.) लॉन्च करेगी।
  • वैज्ञानिकों ने डेवलप किए ट्रांसपैरंट सोलर पैनल, घर में खिड़कियों की तरह हो सकते हैं इस्‍तेमाल
    ये ट्रांसपैरंट सौर सेल एक नई ऊर्जा क्रांति शुरू कर सकते हैं, क्योंकि इन्हें ऑफ‍िसेज, घरों, फैक्ट्रियों और अन्य इमारतों में लगाया जा सकता है।

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