कंपनी ने इन इलेक्ट्रिक स्कूटर्स पर डिस्काउंट को तीन हिस्सों में बांटा है। इसमें 6,500 रुपये का कैश डिस्काउंट, 10,000 रुपये का क्रेडिट कार्ड डिस्काउंट और 3,500 रुपये की वैल्यू वाली एक्सटेंडेड कंपोनेंट्स वॉरंटी शामिल है। इस डिस्काउंट के साथ Rizta S का प्राइस 1,04,758 रुपये (एक्स-शोरूम, मुंबई) से शुरू होगा।
इंसानी दिमाग मरने के बाद भी थोड़े समय तक सक्रिय रहता है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, नई स्टडी इस बात का दावा करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मरने के बाद इंसानी दिमाग कुछ समय तक काम करता रहता है। जब किसी इंसान की दिल की धड़कनें बंद हो जाती हैं तो उसे मृत समझ लिया जाता है। लेकिन उसका दिमाग तब भी काम करता रहता है।
अगर आप AI Caricature से आगे कुछ नया ट्राय करना चाहते हैं, तो AI Perspective एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं। इसमें अपनी फोटो अपलोड कर एआई से पूछा जाता है कि वह आपको किस तरह के फिक्शनल कैरेक्टर की तरह देखता है। सही प्रॉम्प्ट देने पर एआई स्टाइलाइज्ड इलस्ट्रेशन तैयार करता है और साथ में कैरेक्टर नेम, रोल और पर्सनालिटी ट्रेट्स भी बताता है। खास बात यह है कि बैकस्टोरी हिंदी में लिखवाई जा सकती है, जबकि नाम और आर्केटाइप इंग्लिश में रखा जा सकता है। आउटपुट पूरी तरह फोटो और दिए गए निर्देशों पर निर्भर करता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच AI सेफ्टी एक्सपर्ट रोमन याम्पोल्स्की ने चेतावनी दी है कि आने वाले सालों में ज्यादातर इंसानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं। उनके मुताबिक, AI के सामने ऐसा कोई काम नहीं है जिसे ऑटोमेट न किया जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कुछ बेहद सीमित रोल्स ऐसे हैं, जो इंसानों की पसंद, अनुभव या AI की वजह से कुछ समय तक बने रह सकते हैं। लेकिन ये रोल्स आज के वर्कफोर्स का बहुत छोटा हिस्सा ही संभाल पाएंगे।
एक X यूजर का अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें स्मार्टफोन रिपेयर को लेकर ऑफिशियल सर्विस सेंटर्स की डायग्नोसिस प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। यूजर के फोन के लिए सर्विस सेंटर ने 16,000 रुपये का अनुमान दिया था, जबकि AI टूल Gemini की सलाह पर लोकल रिपेयर शॉप से वही समस्या सिर्फ 1,450 रुपये में ठीक हो गई। यह मामला दिखाता है कि हर तकनीकी खराबी में महंगा रिप्लेसमेंट जरूरी नहीं होता। ऐसे में रिपेयर से पहले सही जानकारी और सेकेंड ओपिनियन लेना यूजर्स के लिए अहम साबित हो सकता है।
Xiaomi ने AI Glasses के लिए Pioneer Experience Beta Program शुरू किया है, जिसमें 200 यूजर्स को वॉयस पार्किंग पेमेंट, नई चार्जिंग सेटिंग्स और सिस्टम फिक्सेज का जल्दी एक्सेस मिलेगा। जून में लॉन्च हुए इन ग्लासेस में 12MP कैमरा, AR1 चिप, ट्रांसलेशन, स्मार्ट-कंट्रोल और इलेक्ट्रोक्रोमिक लेंस जैसे फीचर्स मौजूद हैं।
रूसी कंपनी Neiry ने कबूतरों को ड्रोन की तरह इस्तेमाल करने का सफल टेस्ट किया है। इन कबूतरों के दिमाग में इलेक्ट्रॉड फिट किए गए जो कि उनकी पीठ पर लगी कंट्रोल यूनिट से जुड़े हुए थे। यह कंट्रोल यूनिट पूरी तरह से सोलर पावर पर चलती है। यानी कबूतर हवा में उड़ेंगे और सूर्य की रोशनी से कंट्रोल यूनिट को पावर मिलती रहेगी। इस चिप से वैज्ञानिक उनकी दिशा को कंट्रोल कर सकते हैं। यानी कबूतरों का रिमोट कंट्रोल अब इंसानों के हाथ में होगा
इस मिशन के क्रू ने ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स किए हैं। इनमें से सात एक्सपेरिमेंट्स की अगुवाई शुक्ला ने की थी। इन एस्ट्रोनॉट्स के साथ शून्य ग्रेविटी के उनके संकेतक के तौर पर Joy कहे जाने वाले एक स्वैन टॉय को भी भेजा गया था। इस मिशन से भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO को गगनयान की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सबक मिल सकते हैं।
इस मिशन के पायलट की जिम्मेदारी शुक्ला ने सभाली है, जबकि और मिशन कमांडर के तौर पर कमान Peggy Whitson के पास थी। अनडॉकिंग के कई घंटे बाद Axiom-4 मिशन का स्पलैशडाउन अमेरिका के कैलिफोर्निया में प्रशांत महासागर के तट के निकट होगा। Axiom-4 मिशन में 31 देशों की भागीदारी है इस मिशन को सुरक्षा के साथ ISS पर पहुंचाने के लिए NASA और Axiom Space ने कड़ी तैयारी की थी।
अमेरिका में कैलिफोर्निया के Kennedy Space Centre से बुधवार को SpaceX का Falcon 9 रॉकेट इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट Dragon के साथ बुधवार को 12.01 PM पर लॉन्च किया गया था। इस स्पेसक्राफ्ट की लगभग 29 घंटे की उड़ान के बाद गुरुवार को 4.01 पर ISS के साथ डॉकिंग हुई है। Axiom-4 मिशन के क्रू के सदस्य ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स करेंगे।
Axiom-4 मिशन के क्रू के सदस्य ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स करेंगे। इनमें से सात एक्सपेरिमेंट्स की अगुवाई शुक्ला करेंगे। इस मिशन में 31 देशों की भागीदारी है इस मिशन को सुरक्षा के साथ ISS पर पहुंचाने के लिए NASA और अमेरिकी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर Axiom Space ने कड़ी तैयारी की थी। इन एस्ट्रोनॉट्स के साथ शून्य ग्रेविटी के उनके संकेतक के तौर पर Joy कहे जाने वाले एक स्वैन टॉय को भी भेजा गया है।
Axiom-4 मिशन को धरती से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर मौजूद ISS पर डॉकिंग करने में लगभग 29 घंटे लगेंगे। Falcon 9 रॉकेट पर स्थित SpaceX का Dragon स्पेसक्राफ्ट शुरुआत में ISS से नीचे के एक ऑर्बिट में पहुंचेगा। ISS के साथ डॉकिंग (जुड़ना) के लिए इस स्पेसक्राफ्ट को अपने रास्ते और ऊंचाई में बदलाव करने होंगे। यह प्रक्रिया आसान नहीं है क्योंकि ISS लगभग 28,000 km/h की रफ्तार से चक्कर लगा रहा है।
अमेरिकी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर Axiom Space ने बताया है कि पिछले 40 वर्षों से अधिक में यह पहली बार है कि जब अमेरिका की सरकार ने भारत, पोलैंड या हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स वाली एक स्पेसफ्लाइट के लिए स्वीकृति दी है। भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री Rakesh Sharma ने 1984 में अंतरिक्ष में पहुंचकर इतिहास बनाया था।
NASA, Axiom Space औ बिलिनेयर Elon Musk की SpaceX ने इस मिशन के लिए 25 जून को बुधवार 12.01 PM (भारतीय समयानुसार) पर लॉन्च का टारगेट रखा है। अमेरिका में कैलिफोर्निया के Kennedy Space Centre से SpaceX का Falcon 9 रॉकेट इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट Dragon के साथ उड़ान भरेगा। यह Dragon स्पेसक्राफ्ट की पहली और Falcon 9 रॉकेट की दूसरी उड़ान होगी।
Axiom-4 मिशन के जरिए ISS पर भारतीय एस्ट्रोनॉट, Shubhanshu Shukla के साथ अमेरिका की Peggy Whitson, पोलैंड के Slawosz Uznanski Wisniewski और हंगरी के Tibor Kapu को जाना है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA, Axiom Space और SpaceX की ओर से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ऑपरेशनल और सेफ्टी से जुड़ी आशंकाओं को दूर किया जा रहा है।