मरने के बाद भी इतने समय तक जिंदा रहता है दिमाग! स्टडी में दावा

डॉक्टर कहते हैं कि 10 मिनट तक अगर ऑक्सीजन न मिले तो दिमाग को बहुत अधिक नुकसान होता है।

मरने के बाद भी इतने समय तक जिंदा रहता है दिमाग! स्टडी में दावा

Photo Credit: Shutterstock

वैज्ञानिकों का कहना है कि मरने के बाद इंसानी दिमाग कुछ समय तक काम करता रहता है।

ख़ास बातें
  • मरने के बाद इंसानी दिमाग कुछ समय तक काम करता रहता है।
  • कार्डिएक अरेस्ट तब होता है जब दिल एकदम से धड़कना बंद कर देता है।
  • 40% मरीजों ने बताया कि उन्हें मरने के बाद यादें और सचेत विचार आते रहे।
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क्या मरने के बाद इंसान का शरीर जिंदा रह सकता है? हां, इंसान के शरीर का एक हिस्सा ऐसा है जो मरने के बाद भी जिंदा रह सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मरने के बाद इंसानी दिमाग कुछ समय तक काम करता रहता है। जब किसी इंसान की दिल की धड़कनें बंद हो जाती हैं तो उसे मृत समझ लिया जाता है। लेकिन उसका दिमाग तब भी काम करता रहता है। नई स्टडी में इस बात को लेकर दावा किया गया है। आइए जानते हैं क्या कहती है रिसर्च। 

इंसानी दिमाग मरने के बाद भी थोड़े समय तक सक्रिय रहता है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, नई स्टडी इस बात का दावा करती है। Resuscitation जर्नल में इसे प्रकाशित किया गया है। स्टडी को NYU Langone Medical Center के Dr Sam Parnia ने लीड किया है। इन्होंने 53 मरीजों पर अध्य्यन किया जो दिल की धड़कन रुकने के शिकार हुए थे। कार्डिएक अरेस्ट तब होता है जब दिल एकदम से धड़कना बंद कर देता है। 

डॉक्टर कहते हैं कि 10 मिनट तक अगर ऑक्सीजन न मिले तो दिमाग को बहुत अधिक नुकसान होता है। हालांकि, स्टडी में पुनर्जीवन प्रयासों के दौरान मस्तिष्क की गतिविधि के संकेत मिले, कभी-कभी दिल की धड़कनें रुकने के एक घंटे बाद तक भी। लगभग 40% मरीजों ने बताया कि उन्हें यादें और सचेत विचार आते रहे, जब वे मेडिकल की भाषा में मरे हुए माने जा चुके थे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उन्हें वे सारी बातें भी याद हैं जो उस दौरान मेडिकल कर्मियों के बीच अस्पताल में हुईं। 

स्टडी के दौरान ब्रेन स्कैन किए गए। इसमें सोचने और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न प्रकार की मस्तिष्क तरंगों में अचानक वृद्धि देखी गई और यह सब दिल की धड़कन रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक भी हुआ। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि मस्तिष्क कहीं अधिक लचीला हो सकता है। यानी वो मरने के बाद भी काफी समय तक एक्टिव रह सकता है। 

यह शोध सीपीआर के तरीकों और हृदय गति रुकने से होने वाली मस्तिष्क की चोटों के उपचार में सुधार लाने में सहायक हो सकता है। इस स्टडी ने एक्सपर्ट्स के बीच इस बात पर बहस छेड़ दी है कि चेतना वास्तव में कब और कैसे समाप्त होती है। 
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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