Neuralink N1 इम्प्लांट लगवाने वाले एक मरीज ने 100 दिन बाद अपना अनुभव साझा किया, जिसमें वह दिमाग से कंप्यूटर कंट्रोल कर पा रहा है।
Neuralink N1 इम्प्लांट से मरीज दिमाग के जरिए कंप्यूटर कंट्रोल कर रहा है
Neuralink की ब्रेन-चिप टेक्नोलॉजी को लेकर एक नया मामला सामने आया है, जहां एक पैरालाइज्ड मरीज ने 100 दिन पूरे करने के बाद अपने अनुभव साझा किए हैं। ब्रिटिश आर्मी के पूर्व सैनिक Jon L. Noble, जो गर्दन के नीचे पैरालाइज्ड हैं, ने बताया कि Neuralink N1 इम्प्लांट ने उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव किया है। उनके मुताबिक अब वह सिर्फ अपने दिमाग की मदद से कंप्यूटर कंट्रोल कर पा रहे हैं और बिना इसके जीवन की कल्पना करना मुश्किल लग रहा है।
Noble Neuralink के शुरुआती मरीजों में से एक हैं और उन्हें मरीज संख्या 18 के रूप में इम्प्लांट दिया गया था। उन्होंने बताया कि सर्जरी के दौरान जनरल एनेस्थीसिया दिया गया और एक रोबोटिक सिस्टम की मदद से उनके मोटर कॉर्टेक्स में 1,024 अल्ट्रा-थिन थ्रेड्स लगाए गए। कंपनी के मुताबिक यह प्रक्रिया काफी सटीक होती है और मरीज को अगले ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया।
X पर Noble ने अपने लंबे पोस्ट में बताया कि सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद सुधार दिखने लगा और दो हफ्ते के भीतर इम्प्लांट को MacBook के साथ कनेक्ट किया गया। शुरुआती ट्रेनिंग और कैलिब्रेशन के बाद वह सिर्फ अपने विचारों के जरिए कंप्यूटर का कर्सर कंट्रोल करने लगे। उन्होंने बताया कि तीसरे हफ्ते तक स्क्रॉलिंग, क्लिकिंग और टाइपिंग जैसे काम उनके लिए आसान हो गए थे।
करीब 80 दिन बाद Noble इस तकनीक के साथ गेमिंग तक पहुंच गए। उन्होंने बताया कि वह World of Warcraft जैसे गेम को भी सिर्फ दिमाग से कंट्रोल कर पाए। शुरुआत में यह चुनौतीपूर्ण था, लेकिन समय के साथ दिमाग और डिवाइस के बीच तालमेल बेहतर होता गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है। खासकर दिव्यांग यूजर्स, स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स इस तकनीक को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इसके भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।
100 दिन पूरे होने के बाद Noble का कहना है कि Neuralink N1 इम्प्लांट ने न सिर्फ कंप्यूटर इस्तेमाल करने का तरीका बदला है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भी एक नया रास्ता खोल दिया है। यह मामला दिखाता है कि ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस टेक्नोलॉजी भविष्य में इंसानों और मशीनों के बीच इंटरैक्शन को पूरी तरह बदल सकती है, हालांकि इसके लंबे समय के असर और चुनौतियों को लेकर अभी और स्टडी की जरूरत होगी।
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