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Chrome - ख़बरें

  • Google Chrome चलाते हैं तो ये खबर आपके लिए! हैक हो सकता है सिस्टम, तुरंत करें ये काम
    सरकार की साइबर एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए हाई सीवेरिटी चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि Chrome के पुराने वर्जन में गंभीर “Use After Free” खामी पाई गई है, जिससे हैकर्स टारगेट सिस्टम पर मनमाना कोड चला सकते हैं। यदि ब्राउजर Linux पर 144.0.7559.75 या Windows/Mac पर 145.0.7632.75/76 से पुराना है, तो जोखिम बढ़ सकता है। एजेंसी ने यूजर्स को तुरंत लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि डेटा चोरी और मालवेयर हमलों से बचा जा सके।
  • Google Chrome में Android के लिए आया बड़े काम का फीचर!
    Google Chrome में अब टैब को Pin करने की सुविधा कंपनी ने उपलब्ध करवा दी है। यह फीचर कंपनी ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया है। इससे अब यूजर अपने पसंद के टैब को ऊपर पिन कर पाएंगे। जैसे ब्राउजर खुलेगा ये टैब सबसे ऊपर दिखाई देंगे, भले ही आप ऐप को बंद कर दें।
  • boAt Chrome Iris Launched: स्लीप ट्रैकिंग, फीमेल वेलनेस और SpO2 मॉनिटरिंग के साथ नई स्मार्टवॉच लॉन्च
    boAt ने भारतीय बाजार में Chrome Iris स्मार्टवॉच लॉन्च कर दी है। यह स्मार्टवॉच 8mm स्लिम मेटल डिजाइन के साथ आती है और इसमें 1.32 इंच की AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जो Always On Display और 1000 निट्स ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Bluetooth कॉलिंग फीचर मिलता है। हेल्थ ट्रैकिंग के लिए इसमें हार्ट रेट मॉनिटरिंग, SpO2 ट्रैकिंग, स्लीप ट्रैकिंग और Female Wellness Tracking जैसे फीचर्स दिए गए हैं। boAt Chrome Iris की कीमत 3499 रुपये से शुरू होती है।
  • Apple की चेतावनी iPhone यूजर्स बंद कर दें Google Chrome का इस्तेमाल
    Safari सिस्टम कॉन्फिगरेशन का एक आसान वर्जन प्रदान करता है जिससे अधिकतर डिवाइस ट्रैकर्स को समान नजर आते हैं, जिससे आपके डिवाइस को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। इस साल डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग काफी खतरनाक रहा है, क्योंकि Google ने इस सीक्रेटिव टेक्नोलॉजी पर बैन को हटा दिया है जिसे डिसेबल नहीं किया जा सकता है। ट्रैकिंग कुकीज ऑप्ट आउट प्रदान करती हैं।
  • HMD के पहले लैपटॉप फ्लिप क्रोमबुक पर चल रहा है काम! जानें क्या हैं खासियतें
    HMD अपने पहले कंप्यूटर यानी कि एक 2-इन-1 क्रोमबुक पर काम कर रहा है, जिसका नाम HMD (Chrome)Book CS-1 Flip है या फिर HMD Book CS-1 Flip हो सकता है। फ्लिप नाम से पता चलता है कि 360 डिग्री हिंज और टचस्क्रीन हो सकती है। यह ASUS Chromebook Flip लाइनअप जैसा हो सकता है। इस बार कंपनी पीसी सेगमेंट में अपना ब्रांड लाने के लिए तैयार है। HMD के आगामी लैपटॉप के स्पेसिफिकेशंस का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
  • Google Chrome का ये वर्जन खतरे में! भारत की एजेंसी ने जारी किया अलर्ट
    भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए एक नया अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी Windows, macOS और Linux - तीनों प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे Chrome ब्राउजर को लेकर है। एजेंसी ने अपने नोट (CIVN-2025-0330) में दो हाई-सीवियरिटी कमजोरियों का जिक्र किया है, जिन्हें CVE-2025-13223 और CVE-2025-13224 के रूप में दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खामियों का फायदा उठाकर सिस्टम में दखल दिया जा सकता है और सर्विस को बाधित किया जा सकता है।
  • Chrome चला रहे हो तो हो जाओ सावधान! एक गलती और सिस्टम हो जाएगा हैक, यहां जानें बचने का तरीका
    भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने Google Chrome में कई गंभीर कमजोरियों की पहचान की है। एजेंसी के मुताबिक, Chrome के पुराने वर्जन (142.0.7444.59 से पहले) में ऐसी खामियां हैं जिनका फायदा उठा कर अटैकर किसी यूजर को फेक वेबसाइट पर भेजकर सिस्टम को हैक कर सकता है या डेटा चुरा सकता है। इन बग्स का असर Windows, macOS और Linux वर्जन पर देखा गया है। CERT-In ने सभी यूजर्स को तुरंत ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी है।
  • Chrome यूजर्स के लिए सरकार की चेतावनी! तुरंत अपडेट करें सिस्टम नहीं तो...
    भारत की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए नई चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने एक हाई-सीवेरिटी 'रिमोट कोड एग्जिक्यूशन' (RCE) वल्नरेबिलिटी (CIVN-2025-0274) की जानकारी दी है, जो पुराने और अनपैच्ड Chrome वर्जन को प्रभावित कर रही है। इस खामी का फायदा उठाकर अटैकर्स किसी यूजर के सिस्टम पर रिमोट एक्सेस पा सकते हैं, जिससे डेटा चोरी, सिस्टम टेकओवर या सर्विस डिसरप्शन का खतरा है। ये खामी Chrome के उन वर्जन्स में पाई गई है जो 141.0.7390.122.123 से पुराने हैं।
  • Chrome और Edge यूज करते हो तो यह खबर आपके लिए है, सरकार ने दिया हाई-रिस्क अलर्ट!
    भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने हाल ही में चेतावनी जारी की है कि पुराने वर्जन के Google Chrome और Microsoft Edge (क्रोमियन-बेस्ड) ब्राउजर्स में मौजूद सिक्योरिटी खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स यूजर्स के सिस्टम में बिना अनुमति एंटर कर सकते हैं। इन खामियों के जरिए रिमोट कोड एक्जीक्यूशन और डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) अटैक्स किए जा सकते हैं। CERT-In ने यह अलर्ट 15 अक्टूबर को जारी किया।
  • Google Chrome यूजर्स पर मंडरा रहा खतरा, CERT-in ने जारी की चेतावनी- हैकर्स की आपके सिस्टम पर नजर
    CERT-In ने विंडोज, मैकओएस और लिनक्स के लिए गूगल क्रॉम में नजर आई खामियों और कमजोरियों की जानकारी दी है। एजेंसी का कहना है कि इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स सिस्टम पर खतरनाक कोड लगा सकते हैं। एजेंसी ने Windows, macOS और Linux पर Google Chrome का उपयोग करने वाले सभी यूजर्स और ऑर्गेनाइजेशन को लेटेस्ट वर्जन अपडेट करने की सलाह दी है।
  • आपका नाम, लोकेशन और हिस्ट्री सब हो रहा है ट्रैक, डेटा कलेक्शन के टेस्ट में Chrome+ Gemini की जोड़ी अव्वल!
    Google ने हाल ही में अपने Chrome ब्राउजर में Gemini AI को इंटीग्रेट करने की घोषणा की, जिससे यूजर्स के लिए ब्राउजिंग और टास्क मैनेजमेंट आसान हो जाएगा। हालांकि सुविधा जितनी आकर्षक है, उतना ही जरूरी है कि यूजर्स समझें कि इस इंटीग्रेशन के चलते कितनी व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा हो रही है। एक रिसर्च ने पांच प्रमुख एजेंटिक AI ब्राउजर्स पर डेटा प्राइवेसी को एनालाइज किया है और इसमें Chrome सबसे डेटा-हंग्री ब्राउजर के रूप में सामने आया है, यानी यह यूजर्स का सबसे ज्यादा डेटा इकट्ठा करता हुआ पाया गया है। चलिए विस्तार से जानते हैं।
  • भारतीय साइबर एजेंसी की चेतावनी: Chrome को तुरंत करें अपडेट, नहीं तो डेटा खतरे में!
    CERT-In ने Google Chrome यूजर्स को तुरंत अपडेट करने की सलाह दी है। Chrome के पुराने वर्ज़न (140.0.7339.80/81 से पहले) में गंभीर खामियां मिली हैं, जिनसे हैकर्स सिस्टम पर कंट्रोल पा सकते हैं। समस्या का कारण V8 इंजन में बग और एक्सटेंशन व डाउनलोड से जुड़ी गलत इंप्लीमेंटेशन है। Google ने इसका सिक्योरिटी फिक्स पहले ही स्टेबल चैनल पर जारी कर दिया है।
  • Perplexity AI का Chrome ब्राउजर पर कब्जा करने का प्लान, 3 लाख करोड़ का ऑफर, अब क्या करेगा Google?
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने Google के पॉपुलर Chrome ब्राउजर को खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर, यानी भारतीय करेंसी में 3 लाख करोड़ रुपये का अनचाहा (Unsolicited) ऑफर दिया है। यह रकम Perplexity की मौजूदा वैल्यूएशन से भी ज्यादा है, लेकिन कंपनी का कहना है कि कई इन्वेस्टर्स ने इस डील के लिए फंडिंग का भरोसा दिया है। जुलाई 2025 में Perplexity की वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर थी, जो उससे कुछ महीने पहले तक 14 अरब डॉलर थी।
  • Vivo के X Fold 5 के लॉन्च से लेकर Google की Chrome OS को Android में मर्ज करने की तैयारी, ये हैं आज की महत्वपूर्ण खबरें
    Chrome OS और एंड्रॉयड के मर्ज होने से यूजर्स को स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स और टैबलेट्स पर सिंगल और पहले से बेहतर इकोसिस्टम का फायदा मिलेगा। गूगल की योजना एंड्रॉयड के डेस्कटॉप मोड को भी लाने की है। ऐसा बताया जा रहा है कि इसके लिए कंपनी टेस्टिंग कर रही है। कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) असिस्टेंट Gemini के लैपटॉप्स और टैबलेट्स पर इस्तेमाल के लिए एंड्रॉयड एक मजबूत बेस बन रहा है।
  • Google की Chrome OS को Android में मर्ज करने की तैयारी, यूजर्स को होगा फायदा!
    इसके बाद Chrome OS एक स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं रहेगा। इससे आगामी Chromebooks और टैबलेट्स एक एंड्रॉयड-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर चल सकते हैं। इससे यूजर्स को इन डिवाइसेज में बेहतर एक्सपीरिएंस मिलेगा। Chrome OS पहले ही Android के Linux kernel और कंपोनेंट्स को शेयर करता है। गूगल की इसे ज्यादा एडवांस्ड बनाने की योजना है।

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