इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया था कि Meta और वॉट्सऐप की ओर से की गई अपील में मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी एक पक्ष बनाया जाए
इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वॉट्सऐप के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया था
इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (23 फरवरी) को सुनवाई होगी। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी में कथित तौर पर गड़बड़ी की वजह से 213.14 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई थी। इसके खिलाफ वॉट्सऐप को ऑपरेट करने वाली अमेरिकी कंपनी Meta ने अपील दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi और Vipul M Pancholi की बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है। पिछले वर्ष नवंबर में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने CCI के उस ऑर्डर के एक सेक्शन को खारिज कर दिया था जिसमें वॉट्सऐप पर विज्ञापन के उद्देश्यों के लिए Meta के साथ डेटा को पांच वर्ष के लिए शेयर करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, NCLAT ने CCI की ओर से लगाई गई पेनल्टी को बरकरार रखा था। NCLAT ने बाद में स्पष्ट किया था कि वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी और यूजर्स की सहमति से जुड़े सुरक्षा के उपायों को लेकर उसका ऑर्डर विज्ञापन और बिना विज्ञापन सहित नॉन-वॉट्सऐप उद्देश्यों के लिए शेयरिंग पर भी लागू है।
CCI ने भी यूजर्स के डेटा का विज्ञापन के लिए इस्तेमाल करने को लेकर एक क्रॉस-अपील दाखिल की है इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया था कि Meta और वॉट्सऐप की ओर से की गई अपील में मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी एक पक्ष बनाया जाए। हाल ही में इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस अमेरिकी कंपनी को कड़ी चेतावनी दी थी। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने व्यावसायिक उद्देश्य के लिए यूजर्स से जुड़े डेटा को शेयर करने की पॉलिसी की निंदा की थी। इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा था, 'हमारे संविधान का अगर आप पालन नहीं कर सकते हैं, तो भारत से चले जाएं। हम नागरिकों की प्राइवेसी के साथ समझौते की अनुमति नहीं देंगे।'
वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कोर्ट ने पूछा था कि क्या देश के करोड़ों निर्धन और अशिक्षित लोग इसे समझ सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट की बेंच का कहना था, "एक निर्धन महिला या सड़क किनारे सामान बेचने वाला वेंडर या कोई व्यक्ति जो सिर्फ तमिल बोलता है.... क्या वे इसे समझ पाएंगे।? कई बार हमें भी आपकी पॉलिसीज को समझने में मुश्किल होती है।"
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