वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर दायर की गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस अमेरिकी कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है
CCI की ओर से यूजर्स के डेटा का विज्ञापन के लिए इस्तेमाल करने को लेकर एक क्रॉस-अपील दाखिल की गई है
इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस Surya Kant की अगुवाई वाली बेंच ने वॉट्सऐप को ऑपरेट करने वाली Meta को फटकार लगाते हुए कहा, 'आप प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकते.... हमारे डेटा की सिंगल डिजिट को भी हम शेयर करने की आपको अनुमति नहीं देंगे।'
वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर दायर की गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस अमेरिकी कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिका कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की ओर से लगाए गए 213 करोड़ रुपये के जुर्माने को कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल की ओर से बरकरार रखने के खिलाफ दायर की गई है। CCI की ओर से भी यूजर्स के डेटा का विज्ञापन के लिए इस्तेमाल करने को लेकर एक क्रॉस-अपील दाखिल की है। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने व्यावसायिक उद्देश्य के लिए यूजर से जुड़े डेटा को शेयर करने की पॉलिसी की निंदा की। इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत का कहना था, 'हमारे संविधान का अगर आप पालन नहीं कर सकते हैं, तो भारत से चले जाएं। हम नागरिकों की प्राइवेसी के साथ समझौते की अनुमति नहीं देंगे।'
इस पॉलिसी को लेकर कोर्ट ने पूछा कि क्या देश के करोड़ों निर्धन और अशिक्षित लोग इसे समझ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच का कहना था, "एक निर्धन महिला या सड़क किनारे सामान बेचने वाला वेंडर या कोई व्यक्ति जो सिर्फ तमिल बोलता है.... क्या वे इसे समझ सकेंगे? कई बार हमें भी आपकी पॉलिसीज को समझने में मुश्किल होती है।" कोर्ट को 'ऑप्ट आउट' क्लॉज के बारे में बताने पर बेंच ने मेटा और वॉट्सऐप से कहा, 'ग्रामीण बिहार में रहने वाले लोग क्या इसे समझ पाएंगे? यह प्राइवेट इनफॉर्मेशन की चोरी करने का एक तरीका है। हम इसके अनुमति नहीं देंगे।'
चीफ जस्टिस ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा, 'वॉट्सऐप पर अगर किसी डॉक्टर को एक मैसेज भेजा जाता है कि आप ठीक महसूस नहीं कर रहे और डॉक्टर किसी दवा का सुझाव देते हैं, आपको तुरंत विज्ञापन दिखने शुरू हो जाते हैं।' मेटा और वॉट्सऐप की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट Akhil Sibal और Mukul Rohatgi ने कहा कि सभी मैसेज एंड-टु-एंड एनक्रिप्टेड होते हैं, जिसका मतलब है कि कंपनियां भी इन मैसेज का कंटेंट नहीं देख सकती।
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