TCS में वर्कर्स की छंटनी को लेकर बढ़ा विवाद, एंप्लॉयी यूनियन ने लगाया प्रेशर डालने का आरोप

हाल ही में TCS ने बताया था कि उसकी योजना लगभग 12,000 वर्कर्स को हटाने की है। इसके लिए कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया था

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 8 अक्टूबर 2025 23:53 IST
ख़ास बातें
  • TCS ने बताया था कि उसकी योजना लगभग 12,000 वर्कर्स को हटाने की है
  • कंपनी ने इसके लिए AI के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया था
  • कंपनी का कहना है कि छंटनी का असर उसकी वर्कफोर्स के दो प्रतिशत तक है

कुछ एंप्लॉयी यूनियंस का दावा है कि कंपनी से बड़ी संख्या में वर्कर्स को हटाया जा रहा है

देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में बड़ी संख्या में वर्कर्स की छंटनी को लेकर विवाद बढ़ गया है। हाल ही में TCS ने बताया था कि उसकी योजना लगभग 12,000 वर्कर्स को हटाने की है। इसके लिए कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया था। 

हालांकि, कुछ एंप्लॉयी यूनियंस का दावा है कि कंपनी से हटाए जाने वाले वर्कर्स की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट में Union of IT and ITES Employees के जनरल सेक्रेटरी, Alagunambi Welkin के हवाले से बताया गया है कि वर्कर्स को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, " TCS की ओर से प्रेशर डालकर वर्कर्स को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके कुछ HR एग्जिक्यूटिव्स लेबर लॉयर्स के जरिए भी वर्कर्स को प्रॉविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने की धमकी दे रहे हैं।"  

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Karnataka State IT/ITES Union (KITU) के जनरल सेक्रेटरी, Suhas Adiga ने बताया कि यूनियन ने TCS के खिलाफ कर्नाटक के एडिशनल कमिश्नर ऑफ लेबर के पास इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट का एक मामला दर्ज कराया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होनी है। TCS ने इन आरोपों को गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि छंटनी का असर उसकी वर्कफोर्स के दो प्रतिशत तक सीमित है। छंटनी के दायरे में आए वर्कर्स को कंपनी की ओर से सेवरेंस पैकेज और अन्य सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है। 

कुछ महीने पहले TCS पर अमेरिका में कथित तौर पर भारतीय वर्कर्स का पक्ष लेने और अमेरिकी वर्कर्स के साथ भेदभाव करने का भी आरोप लगा था। कंपनी के विदेशी वर्कर्स ने यह आरोप लगाया था। इन वर्कर्स का कहना था कि TCS ने उनकी आयु और मूल देश के आधार पर भेदभाव किया है। Bloomberg की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस आरोप की US Equal Employment Opportunity Commission (EEOC) की ओर से जांच शुरू की गई है। भेदभाव का आरोप लगाने वाले अधिकतर पूर्व वर्कर्स का कहना था कि कंपनी ने उनकी छंटनी की थी लेकिन उनके भारतीय सहकर्मियों का पक्ष लिया था। भारतीय वर्कर्स में से कुछ H-1B वीजा पर कार्य कर रहे थे। 

 

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