PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलने वाला इंसेंटिव घटकर 2,500 रुपये प्रति kWh और अधिकतम 5,000 रुपये हो गया है। जानें नए नियम।
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PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलने वाले इंसेंटिव के नए नियम
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement यानी PM E-DRIVE Scheme भी शामिल है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर इंसेंटिव दिया जाता है, ताकि पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा मिले।
हाल ही में सरकार ने इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (Two-Wheelers) के लिए मिलने वाले इंसेंटिव में बदलाव किया है। पहले जहां एक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर अधिकतम 10,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिल सकता था, वहीं अब यह अधिकतम 5,000 रुपये रह गया है। लेकिन आखिर यह इंसेंटिव कैसे तय होता है, किस इलेक्ट्रिक स्कूटर को इसका फायदा मिलेगा और इसका असर खरीदार की जेब पर कितना पड़ेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
PM E-DRIVE केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक और क्लीन ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने वाली स्कीम है। इसके तहत अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फाइनेंशियल हेल्प का प्रावधान किया गया है। योजना का कुल बजट 11,900 करोड़ रुपये है। इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (Electric two-wheelers) के अलावा इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन (Electric three-wheelers) और दूसरे संबंधित व्हीकल सेगमेंट भी शामिल हैं।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों यानी ई-स्कूटर और ई-बाइक के लिए हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए इंसेंटिव 5,000 रुपये प्रति kWh था। हालांकि एक वाहन पर इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपये थी। यानी बैटरी की क्षमता के हिसाब से इंसेंटिव की गणना होती थी, लेकिन किसी एक इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 10,000 रुपये से ज्यादा का इंसेंटिव नहीं मिल सकता था।
अब 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 की अवधि के लिए यह दर घटाकर 2,500 रुपये प्रति kWh कर दी गई है। साथ ही प्रति वाहन अधिकतम इंसेंटिव भी घटकर 5,000 रुपये हो गया है। आसान उदाहरण में समझें;
मान लीजिए किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर में 2 kWh की बैटरी है।
पहले 5,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से: 2 x 5,000 = 10,000 रुपये। यानी इस वाहन को अधिकतम 10,000 रुपये तक का इंसेंटिव मिल सकता था।
अब नई दर 2,500 रुपये प्रति kWh है: 2 x 2,500 = 5,000 रुपये। इसलिए इसी क्षमता वाले वाहन पर अब 5,000 रुपये का इंसेंटिव मिलेगा।
अगर बैटरी की क्षमता इतनी ज्यादा है कि गणना के हिसाब से रकम 5,000 रुपये से ऊपर चली जाती है, तब भी वाहन के लिए अधिकतम सीमा 5,000 रुपये ही रहेगी।
नहीं। योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए एक महत्वपूर्ण कीमत सीमा भी है। इंसेंटिव सिर्फ उन इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए उपलब्ध होगा जिनकी अधिकतम ex-factory कीमत 1.5 लाख रुपये है।
इसका मतलब यह है कि केवल इलेक्ट्रिक होना पर्याप्त नहीं है। व्हीकल को योजना में तय कीमत सीमा के भीतर भी होना जरूरी है। यहां ex-factory price और ग्राहक द्वारा चुकाई जाने वाली ऑन-रोड कीमत को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। एक्स-फैक्ट्री कीमत वाहन की वह कीमत होती है जिस पर वह फैक्ट्री से निकलता है, जबकि ग्राहक की अंतिम कीमत में दूसरे शुल्क और खर्च शामिल हो सकते हैं।
PM E-DRIVE के इस प्रावधान के हिसाब से 1.5 लाख रुपये से ज्यादा ex-factory कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन इस इंसेंटिव के लिए पात्र नहीं होंगे। इसलिए अगर कोई ग्राहक महंगा इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद रहा है, तो उसे सिर्फ इसलिए इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि वाहन इलेक्ट्रिक है।
योजना के सभी सेगमेंट के लिए अंतिम तारीख 31 मार्च 2028 रखी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में 31 मार्च 2028 तक इंसेंटिव मिलता रहेगा। अगर संबंधित फंड इससे पहले खत्म हो जाता है, तो संबंधित सेगमेंट पहले ही बंद हो सकता है।
योजना के तहत किसी भी कंपोनेंट से जुड़े क्लेम को Ministry of Heavy Industries या Project Management Agency के पास जमा करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2027 है। इसके बाद 31 मार्च 2028 तक योजना के बाकी प्रशासनिक काम पूरे होने की समयसीमा है। ऑर्डर के मुताबिक 31 मार्च 2028 के बाद Ministry of Heavy Industries या Project Management Agency की ओर से कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
योजना के सभी इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट की स्थिति एक जैसी नहीं है। रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के L5 सेगमेंट को पहले ही बंद किया जा चुका है। अधिसूचना के मुताबिक इस सेगमेंट का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो गया था और इसे 26 दिसंबर 2025 को बंद कर दिया गया। इसलिए PM E-DRIVE के तहत अलग-अलग वाहन सेगमेंट की स्थिति अलग हो सकती है।
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