Tech Safety

Tech Safety - ख़बरें

  • वाटरप्रूफ फोन है तो भी न करें ये गलती! मानसून में ऐसे रखें मोबाइल का ख्याल
    मानसून के दौरान बारिश और नमी की वजह से स्मार्टफोन के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सिर्फ IP रेटिंग पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। फोन को बारिश से बचाने, गीले हाथों से चार्जिंग न करने, भीगने पर सही तरीके से सुखाने और डेटा का नियमित बैकअप लेने जैसी छोटी-छोटी सावधानियां बड़े नुकसान से बचा सकती हैं। अगर फोन पानी में गिर जाए तो उसे तुरंत चार्ज करने या ऑन करने की बजाय पहले पूरी तरह सूखने दें। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप मानसून में अपने स्मार्टफोन को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • WhatsApp हैक हो गया? दिल्ली पुलिस ने बताई ##21# कोड वाली जरूरी ट्रिक
    WhatsApp अकाउंट हैक होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार यूजर्स अचानक अपने अकाउंट से लॉगआउट हो जाते हैं और उनका WhatsApp किसी दूसरे डिवाइस पर इस्तेमाल होने लगता है। ऐसे में सबसे पहले कॉल और मैसेज फॉरवर्डिंग को बंद करना जरूरी माना जाता है। इसके लिए ##21# USSD कोड डायल किया जा सकता है। इसके बाद Meta के आधिकारिक शिकायत फॉर्म के जरिए अकाउंट रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सही जानकारी देने और जांच पूरी होने के बाद यूजर अपने नंबर और OTP की मदद से दोबारा अकाउंट एक्सेस कर सकता है।
  • दिल्ली में फिर हुआ AC ब्लास्ट, ओवरहीटिंग बन सकती है जानलेवा; जानें कारण और सेफ्टी टिप्स
    गर्मियों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ने के साथ AC ओवरहीटिंग और आग लगने की घटनाएं भी चर्चा में रहती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक खराब वायरिंग, शॉर्ट-सर्किट, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, गंदे फिल्टर और समय पर सर्विसिंग न होने जैसी वजहें AC पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हालांकि हर हादसे की वजह अलग हो सकती है, लेकिन कई मामलों में AC पहले से कुछ चेतावनी संकेत देता है। अगर समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं AC ओवरहीटिंग के कारण, इसके शुरुआती संकेत और जरूरी सेफ्टी टिप्स।
  • सरकार दे रही फ्री Cyber Security Course, सिर्फ 2.5 घंटे में मिलेगा सर्टिफिकेट, ऐसे करें अप्लाई
    भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने फ्री ऑनलाइन Cyber Security Course शुरू किया है। यह कोर्स गृह मंत्रालय के तहत तैयार किया गया है और इसका मकसद लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके सिखाना है। कोर्स में फेक लिंक, स्कैम कॉल्स, डिजिटल पेमेंट सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। इसे करीब 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकता है और सफल प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
  • बच्चों के फोन में छिपे ऐप्स कैसे पहचानें? हर पैरेंट को पता होनी चाहिए ये ट्रिक्स
    स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की चिंता भी बढ़ी है। कई बार बच्चे App Hider, Vault या Fake Calculator जैसे ऐप्स इस्तेमाल करते हैं, जो फोन में छिपे रहते हैं। ऐसे में माता-पिता फोन की Settings, App List और Battery Usage की मदद से संदिग्ध ऐप्स की पहचान कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल पेरेंटिंग में बच्चों की जासूसी करने के बजाय उनसे खुलकर बात करना ज्यादा जरूरी है। इसके अलावा Google Family Link और Apple Screen Time जैसे Official Tools भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।
  • बच्चों के लिए Instagram में बढ़ाए गए सेफ्टी फीचर्स, पैरेंट्स को मिलेंगे नए कंट्रोल्स
    Meta ने Teen Accounts सुपरविजन सिस्टम को अपडेट किया है, जिससे पैरेंट्स के लिए Instagram, Facebook, Messenger और Meta Horizon पर बच्चों की एक्टिविटी को ट्रैक करना आसान होगा। कंपनी ने सभी पैरेंटल कंट्रोल्स को Family Center में इंटीग्रेट किया है। इसके अलावा Instagram के “Your Algorithm” फीचर में नए इनसाइट्स जोड़े गए हैं, जिनकी मदद से पैरेंट्स यह समझ पाएंगे कि उनके बच्चे किस तरह के कंटेंट में दिलचस्पी ले रहे हैं। Meta नए टीन इंटरेस्ट नोटिफिकेशन्स भी जोड़ रही है। कंपनी के मुताबिक यह अपडेट ग्लोबली रोलआउट किया जा रहा है और आने वाले समय में इसे दूसरे मार्केट्स में भी एक्सपैंड किया जाएगा।
  • Instagram पर आया प्राइवेट फोटो शेयरिंग फीचर Instants, जल्द लॉन्च होगा अलग ऐप
    Instagram ने Instants नाम का नया फीचर पेश किया है, जो रियल टाइम और बिना एडिट की गई फोटो शेयरिंग पर आधारित है। इस फीचर में यूजर्स सिर्फ उसी समय क्लिक की गई फोटो Close Friends या Mutual followers को भेज पाएंगे। गैलरी से फोटो अपलोड करने की अनुमति नहीं होगी। शेयर की गई फोटो देखने के बाद गायब हो जाएगी और 24 घंटे बाद दोबारा एक्सेस नहीं की जा सकेगी। कंपनी के मुताबिक इसमें स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग सपोर्ट भी नहीं दिया गया है। Instagram ने Teen अकाउंट्स के लिए पैरेंटल कंट्रोल्स और सेफ्टी टूल्स भी शामिल किए हैं। फिलहाल फीचर का ग्लोबल रोलआउट शुरू हो गया है।
  • गलत उम्र डालकर अकाउंट चलाना पड़ेगा भारी, बच्चों की सेफ्टी के लिए Meta ने लगाई AI पुलिस!
    Meta ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर टीन यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए AI-पावर्ड एज डिटेक्शन फीचर्स का ऐलान किया है। कंपनी अब पोस्ट, फोटो, कैप्शन और अन्य एक्टिविटी के आधार पर संभावित टीन यूजर्स की पहचान करेगी, भले ही उन्होंने अकाउंट में गलत उम्र दर्ज की हो। ऐसे यूजर्स को ऑटोमैटिकली Teen Account प्रोटेक्शन में डाला जाएगा, जहां सेंसिटिव कंटेंट और अनजान लोगों के मैसेज पर लिमिट्स लागू होंगी। जरूरत पड़ने पर यूजर्स को सरकारी आईडी या फेसियल एज एस्टिमेशन टूल्स के जरिए एज वेरिफिकेशन भी करना होगा।
  • खोए-चोरी हुए फोन को 2 मिनट में कहीं से भी करें लॉक, जानें आसान तरीका
    फोन खो जाने या चोरी होने पर डेटा सुरक्षित रखना सबसे जरूरी होता है। ऐसे में Android और iPhone दोनों में ऐसे फीचर्स मिलते हैं, जिनसे आप दूर बैठकर फोन को लॉक कर सकते हैं। Android में Find My Device और iPhone में Find My फीचर की मदद से यह काम आसानी से किया जा सकता है। इसके जरिए फोन को लॉक करने के साथ-साथ मैसेज दिखाना या जरूरत पड़ने पर डेटा डिलीट करना भी संभव है। हालांकि इसके लिए कुछ सेटिंग्स पहले से ऑन होना जरूरी है। सही जानकारी से आप अपने फोन और डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • UPI से गलत जगह भेज दिया पैसा? तुरंत करें ये काम, वरना वापस मिलना मुश्किल
    UPI के जरिए गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हो जाना एक आम समस्या बनती जा रही है, लेकिन सही समय पर कदम उठाकर पैसे वापस पाए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में सबसे पहले रिसीवर से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर जवाब न मिले, तो UPI ऐप या बैंक में शिकायत दर्ज करनी होती है। इसके अलावा NPCI और बैंकिंग ओम्बड्समैन के जरिए भी मदद ली जा सकती है। हालांकि UPI ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं और रिवर्सल आसान नहीं होता, इसलिए जल्दी एक्शन लेना जरूरी है। सही प्रक्रिया अपनाकर पैसे रिकवर करने की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
  • हर UPI यूजर को पता होनी चाहिए ये 7 सिक्योरिटी टिप्स, नहीं तो एक गलती पड़ेगी भारी!
    UPI पेमेंट आज के समय में सबसे आसान और तेज तरीका बन चुका है, लेकिन इसके साथ फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। कई यूजर्स छोटी-छोटी गलतियों के कारण अपने पैसे गंवा देते हैं। ऐसे में UPI ऐप में मौजूद कुछ जरूरी सेटिंग्स को ऑन रखना बेहद जरूरी है, जैसे App Lock, ट्रांजैक्शन अलर्ट और डेली लिमिट सेट करना। इसके अलावा अनजान रिक्वेस्ट और फर्जी ऐप्स से बचना भी जरूरी है। सही सावधानी और सेटिंग्स के जरिए आप अपने अकाउंट को सुरक्षित रख सकते हैं और फ्रॉड के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
  • Facebook-Instagram पर बच्चे AI से क्या बात कर रहे हैं? अब आप रख सकेंगे नजर, Meta लाया नया फीचर
    Meta ने Facebook, Instagram और Messenger पर नया parental control फीचर पेश किया है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों के AI इस्तेमाल को मॉनिटर कर सकते हैं। “Insights” टैब के जरिए parents पिछले 7 दिनों में पूछे गए सवालों के टॉपिक्स देख सकते हैं, हालांकि पूरी चैट नहीं दिखाई जाती। कंपनी के मुताबिक, यह फीचर teens के लिए AI अनुभव को सुरक्षित और उम्र के अनुसार बेहतर बनाने के लिए लाया गया है। फिलहाल यह फीचर कुछ देशों में उपलब्ध है और जल्द ही अन्य मार्केट्स में भी रोलआउट किया जाएगा।
  • हैकर्स से रहना है दूर?, ऐसे अपने फोन पर एडवांस्ड प्रोटेक्शन करें ऑन
    एडवांस्ड प्रोटेक्शन जून 2025 में पेश किया गया था। एडवांस्ड डिवाइस प्रोटेक्शन गूगल क्रोम, मैसेज और फोन ऐप्स जैसे ऐप्स में सिक्योरिटी सेटिंग्स के लिए सिंगल कंट्रोल प्वाइंट के तौर पर काम करता है। यह फीचर किसी भी खराब वेबसाइट की पहचान करके ब्लॉक करता है, जिनकी पहले से रिपोर्ट की गई होती है। इसके अलावा इन वेबसाइट के खराब लिंक के लिए अलर्ट भी दिखाता है।
  • गेमर्स के लिए बड़ा अपडेट, सरकार ने लागू किए नए नियम - जानें कौन से गेम चलेंगे, कौन से होंगे बंद
    केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए नए नियम लागू किए हैं, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होंगे। इन नियमों के तहत Online Gaming Authority of India का गठन किया गया है, जो इस सेक्टर की निगरानी करेगा। सरकार ने “regulation-light” अप्रोच अपनाई है, जिससे ज्यादातर सोशल गेम्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं होगा। हालांकि, मनी गेम्स पर सख्ती रहेगी और ई-स्पोर्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसके अलावा यूजर्स की सुरक्षा के लिए age verification, parental controls और grievance सिस्टम जैसे फीचर्स जरूरी किए गए हैं।
  • क्या AI आपको गलत बातों पर यकीन दिला रहा है? ये नई रिसर्च आपके होश उड़ा देगी!
    एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि AI चैटबॉट्स का “sycophancy” व्यवहार यूजर्स को गलत दिशा में ले जा सकता है। arXiv पर प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक जब चैटबॉट्स यूजर की हर बात से सहमत होते हैं, तो एक “delusional spiraling” शुरू हो सकता है, जिसमें यूजर का भरोसा गलत जानकारी पर बढ़ता जाता है। यह समस्या सिर्फ कमजोर यूजर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि तार्किक सोच रखने वाले लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार मौजूदा सेफ्टी उपाय भी इस जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं कर पा रहे हैं।

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