Space Science

Space Science - ख़बरें

  • ब्रह्मांड का सबसे पुराना पता अब मिला, NASA के टेलीस्कोप ने बदली यूनिवर्स की समझ
    NASA ने बताया है कि James Webb Space Telescope ने अब तक की सबसे दूर स्थित गैलेक्सी MoM-z14 को देखा है। यह गैलेक्सी बिग बैंग के सिर्फ 280 मिलियन साल बाद मौजूद थी और इसकी रोशनी को धरती तक पहुंचने में करीब 13.5 अरब साल लगे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह खोज ब्रह्मांड के शुरुआती दौर यानी कॉस्मिक डॉन को समझने में मदद करती है। MoM-z14 उम्मीद से ज्यादा चमकदार और विकसित पाई गई है, जिसने शुरुआती ब्रह्मांड को लेकर बनी कई थ्योरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • धरती में कहां से आया था पानी? अब चांद की मिट्टी से निकली बिल्कुल नई कहानी
    NASA की एक नई स्टडी ने धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर अहम जानकारी दी है। अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाए गए सैंपल्स के विश्लेषण में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि उल्कापिंडों ने धरती पर सिर्फ सीमित मात्रा में पानी पहुंचाया था। रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी का अधिकांश पानी उसके बनने के शुरुआती दौर में मौजूद मटेरियल से ही आया था। इस स्टडी में ट्रिपल ऑक्सीजन आइसोटोप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे अरबों साल पुराने इम्पैक्ट्स का रिकॉर्ड समझना संभव हुआ है।
  • चांद पर भेजें अपना नाम, NASA दे रहा है Free मौका, यहां जानें रजिस्टर करने का तरीका
    NASA अपने Artemis प्रोग्राम के तहत Artemis II मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जो इंसानों को अब तक की सबसे दूर की मानव अंतरिक्ष यात्रा पर ले जाएगा। इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों ओर 10 दिन की यात्रा करेंगे। NASA ने इस मिशन के साथ आम लोगों को भी जोड़ते हुए “Send Your Name with Artemis” पहल शुरू की है। 21 जनवरी तक नाम रजिस्टर करने पर यूजर्स को डिजिटल बोर्डिंग पास मिलेगा और उनका नाम Orion स्पेसक्राफ्ट के जरिए चांद तक जाएगा।
  • 2026 का पहला ISRO मिशन फेल! PSLV-C62 के साथ कहां, कब और कैसे हुई गड़बड़? यहां पढ़ें पूरी कहानी
    ISRO ने 12 जनवरी 2026 को साल का पहला स्पेस मिशन PSLV-C62 लॉन्च किया था, लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। लॉन्च के शुरुआती मिनटों में सब कुछ सामान्य रहा, हालांकि तीसरे स्टेज के अंत में रॉकेट में अस्थिरता आ गई। इसके चलते रॉकेट जरूरी ऑर्बिटल स्पीड और दिशा हासिल नहीं कर पाया और सैटेलाइट्स पृथ्वी की ओर लौट गए। PSLV-C62 में EOS-N1 समेत कई पेलोड्स शामिल थे। ISRO ने फेल्योर के कारणों की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
  • रास्ते से भटका ISRO का रॉकेट! 16 सैटेलाइट लेकर गया है PSLV, जानें क्या हुआ तीसरे स्टेज में
    ISRO के Polar Satellite Launch Vehicle के 64वें मिशन PSLV-C62 में लॉन्च के कुछ मिनट बाद तकनीकी अनियमितता दर्ज की गई है। श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे लॉन्च हुए इस मिशन में रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे स्टेज में ट्रेजेक्टरी में झुकाव देखा गया। ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यह मिशन 2025 में हुई PSLV की विफल उड़ान के बाद एक अहम वापसी माना जा रहा था।
  • NASA की ऐतिहासिक खोज! ब्रह्मांड के पहले तारे हुए कैप्चर, 13 अरब साल पुराना रहस्य आया सामने
    NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े एक बड़े रहस्य की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। हालिया स्टडी के मुताबिक, JWST ने LAP1-B नाम की एक दूरस्थ गैलेक्सी में ऐसे प्राचीन तारों के संकेत पाए हैं, जो बिग बैंग के तुरंत बाद बने हो सकते हैं। इन्हें Population III stars कहा जाता है और अब तक इन्हें कभी सीधे तौर पर नहीं देखा गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तारों से निकली बेहद तेज अल्ट्रावॉयलेट रोशनी और खास परिस्थितियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि ये ब्रह्मांड की पहली पीढ़ी के तारे हो सकते हैं।
  • ISRO बना ग्लोबल हीरो! 'बाहुबली' रॉकेट से स्पेस में पहुंचाई सबसे भारी विदेशी सैटेलाइट, सेट किया रिकॉर्ड
    ISRO के हेवी-लिफ्ट रॉकेट LVM3-M6 ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरते हुए अमेरिका के BlueBird-6 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित किया है। यह अब तक किसी भारतीय लॉन्च व्हीकल द्वारा ले जाया गया सबसे भारी पेलोड है। यह मिशन आम स्मार्टफोन्स तक सीधे स्पेस से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लक्ष्य से जुड़ा है। करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद सैटेलाइट 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने तय ऑर्बिट में पहुंचा। यह भारत की कमर्शियल स्पेस लॉन्च क्षमता को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करता है।
  • आज NASA ऑफिस में रहेगी हलचल! धरती की तरफ आ रहे हैं 3 बड़े एस्टेरॉयड
    NASA ने 23 दिसंबर 2025 को पृथ्वी के करीब से गुजरने वाले तीन एस्टेरॉयड्स को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन एस्टेरॉयड्स में एयरप्लेन और बिल्डिंग के आकार के खगोलीय पिंड शामिल हैं, जो तय सुरक्षित दूरी से धरती के पास से गुजरेंगे। नासा की Jet Propulsion Laboratory के मुताबिक, ये एस्टेरॉयड 75 लाख किलोमीटर के दायरे में आने के कारण ट्रैक किए जा रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि फिलहाल किसी भी एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने की आशंका नहीं है।
  • हवाई जहाज जितना साइज, बिजली सी रफ्तार! पृथ्वी की ओर बढ़ रही हैं पांच चट्टानें
    NASA की Jet Propulsion Laboratory ने 19 और 20 दिसंबर 2025 को पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टेरॉयड्स को लेकर अलर्ट जारी किया है। नासा के मुताबिक, इन दो दिनों में कुल पांच एस्टेरॉयड धरती के नजदीक से गुजरेंगे, जिनमें कुछ का साइज एयरप्लेन के बराबर बताया गया है। हालांकि ये सभी एस्टरॉयड सुरक्षित दूरी से निकल जाएंगे और किसी तरह के टकराव की आशंका नहीं है।
  • एस्टरॉयड में चीनी! NASA की नई खोज ने चौंकाया
    Asteroid Bennu पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ऐसे शर्करा (sugar) खोजे हैं जो जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं। एस्‍टरॉयड बेन्नु में बहुत सारे कार्बनिक अणु हैं, जिनमें जीवन के लिए जरूरी कई ‘बिल्डिंग ब्‍लॉक्‍स' शामिल हैं। 2023 में नासा का ओसिरिस-रेक्स (Osiris-Rex) अंतरिक्ष यान पृथ्वी के निकट मौजूद एस्टरॉयड बेन्नु से 122 ग्राम धूल और कंकड़ लेकर आया था। तभी से वैज्ञानिक इसे स्टडी कर रहे हैं। एस्टरॉयड पर कई सारे खनिज अणु पहले ही खोजे जा चुके हैं।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ने बनाया रिकॉर्ड, एक साथ डॉक हुए 8 स्पेसक्राफ्ट
    ISS का इस्तेमाल माइक्रोगेविटी में वैज्ञानिक रिसर्च, टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग और मानव पर अंतरिक्ष के प्रवाहों की स्टडी करने के लिए होता है। इस वर्ष जून में भारतीय एस्ट्रोनॉट Shubhanshu Shukla ने Axiom-4 मिशन के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचकर एक बड़ी सफलता हासिल की थी। भारत की योजना भी स्पेस स्टेशन बनाने की है।
  • भारत का 2028 में चंद्रयान-4 लॉन्च करने का टारगेट
    केंद्र सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए स्वीकृति दे दी है। इस मिशन में चंद्रमा से सैम्प्ल को लाया जाएगा। यह देश का सबसे जटिल लूनर मिशन होगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस ने चंद्रमा से सैम्प्ल लाने की क्षमता को प्रदर्शित किया है। Chandrayaan-4 मिशन को 2028 में लॉन्च करने का टारगेट है। ISRO की योजना अगले तीन वर्षों में स्पेसक्राफ्ट के मैन्युफैक्चरिंग की अपनी कैपेसिटी को तिगुना करने की है।
  • गगनयान मिशन में हुई बड़ी प्रगति, ISRO ने किया क्रू मॉड्यूल के लिए पैराशूट टेस्ट
    ISRO ने यह टेस्ट उत्तर प्रदेश में झांसी की बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में किया है। इसमें भारतीय वायु सेना के IL-76 एयरक्राफ्ट से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से लगभग 2.5 टन के क्रू मॉड्यूल को गिराया था। क्रू मॉड्यूल के नीचे उतरने पर पैराशूट सिस्टम बिना किसी मुश्किल के खुला जिससे इसकी वास्तविक मिशन के दौरान अत्यधिक मुश्किल स्थिति को संभालने में इसकी क्षमता साबित हो गई है।
  • ISRO की बड़ी कामयाबी, देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 किया लॉन्च
    देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 को रविवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया है। इस सैटेलाइट का भार लगभग 4,410 किलोग्राम का है। LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) एक थ्री-स्टेज लॉन्च व्हीकल है। इस हेवी व्हीकल लॉन्च व्हीकल से ISRO को भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स को GTO में भेजने में आसानी हो गई है।
  • ISRO का मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट इस सप्ताह होगा लॉन्च
    इस मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट का डिजाइन भारत सहित ओशियानिक क्षेत्र में सर्विसेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। CMS-03 का भार लगभग 4,400 किलोग्राम का है। यह भारत से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में लॉन्च किया जाने वाला सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट होगा। ISRO ने बताया कि LVM3 का पिछला मिशन Chandrayaan-3 था।

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