नासा (Nasa) के पार्कर सोलर प्रोब ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सूर्य (Sun) के बेहद नजदीक से उड़ान भरी थी। वह एक ऐतिहासिक पल था। हालांकि वैज्ञानिकों को अबतक यह मालूम नहीं है कि पार्कर सोलर प्रोब ‘जिंदा’ है या फिर सूर्य की गर्मी से ‘राख’ हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कुछ दिनों का टाइम लग सकता है। वैज्ञानिक इंतजार कर रहे हैं कि पार्कर सोलर प्रोब का उनसे संपर्क हो पाए और वह संकेत भेजे कि सबकुछ ठीक है।
अब आदित्य एल-1 ने सौर हवाओं को स्टडी करना शुरू कर दिया है। लेटेस्ट अपडेट में आदित्य सोलर वाइंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (ASPEX) पेलोड ने अपना काम शुरू कर दिया है
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने बताया है कि सूर्य से बेहद ताकतवर फ्लेयर का उत्सर्जन हुआ। इसके असर से पृथ्वी पर रेडियो कम्युनिकेशन पर असर पड़ा, जो आज भी जारी रह सकता है।
स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (SWPC) इन जियो मेग्नेटिक आंधियों को G1 से G5 के बीच वर्गीकृत करता है। G1 सबसे कमजोर सौर आंधी होती है और G5 सबसे शक्तिशाली सौर आंधी होती है। 7 अगस्त को जो सौर आंधी आई, वह G2 कैटिगरी की बताई गई है।
यह सब उस 11 साल के चक्र की वजह से हो रहा है, जिसने सूर्य को बहुत अधिक एक्टिव फेज में ला दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वजह से सूर्य में साल 2025 तक विस्फोट होते रहेंगे।