I4C की मदद से धोखाधड़ी वाली इंटरनेशनल कॉल्स में हुई 97 प्रतिशत की कमी

टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने टेलीकॉम रिसोर्सेज के गलत इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी को स्टेकहोल्डर्स के साथ शेयर करने के लिए एक ऑनलाइन डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) बनाया है

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 2 अप्रैल 2025 22:46 IST
ख़ास बातें
  • मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने सायबर क्राइम रोकने के लिए I4C को बनाया था
  • I4C के सिस्टम से धोखाथड़ी वाली कॉल्स में लगभग 97 प्रतिशत की कमी हुई है
  • सायबर फ्रॉड्स का लगभग 45 प्रतिशत दक्षिण पूर्व एशिया से होता है

देश में सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड्स का लगभग 45 प्रतिशत दक्षिण पूर्व एशिया से होता है

सायबर क्राइम और फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए टेलीकॉम रिसोर्सेज के गलत इस्तेमाल को रोकने में केंद्र सरकार को सफलता मिल रही है। इंडियन सायबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की ओर से इंस्टॉल किए गए सिस्टम से धोखाथड़ी वाली कॉल्स में से लगभग 97 प्रतिशत की कमी हुई है। 

मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर कम्युनिकेशंस, Pemmasani Chandra Sekhar ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया, "भारत के मोबाइल नंबर्स को दिखाने वाली धोखाथड़ी वाली इंटरनेशनल कॉल्स की पहचान और उन्हें ब्लॉक करने का सिस्टम पिछले वर्ष शुरू किया गया था और इसके अच्छे नतीजे मिले हैं। इसकी शुरुआत के एक दिन के अंदर लगभग 1.35 करोड़ कॉल्स को धोखाथड़ी से जुड़ी होने के तौर पर पहचान कर ब्लॉक किया गया था।"  इस वर्ष 3 मार्च को धोखाधड़ी वाली लगभग चार लाख कॉल्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया गया था। इससे यह पता चलता है कि इस सिस्टम से धोखाधड़ी वाली इनकमिग कॉल्स में लगभग 97 प्रतिशत की गिरावट हुई है। 

टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने टेलीकॉम रिसोर्सेज के गलत इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी को स्टेकहोल्डर्स के साथ शेयर करने के लिए एक ऑनलाइन डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) बनाया है। इस सिस्टम के साथ लगभग 560 ऑर्गनाइजेशंस को जोड़ा गया है। इनमें केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, 35 राज्यों की पुलिस, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स और I4C शामिल हैं। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने सायबर क्राइम से निपटने के लिए I4C का गठन किया था। 

हाल ही में I4C और DoT ने विदेशी हैकर्स के कम से कम 17,000 वॉट्सऐप एकाउंट्स को ब्लॉक किया था। इसका लक्ष्य विदेशी क्रिमिनल नेटवर्क को नष्ट करना और देश की डिजिटल सुरक्षा को बढ़ाना है। पिछले वर्ष मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने कंबोडिया, फिलिपींस, लाओस और म्यांमार जैसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से संगठित सायबरक्राइम में बढ़ोतरी से निपटने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी बनाई थी। देश में सायबर फाइनेंशियल फ्रॉड्स का लगभग 45 प्रतिशत दक्षिण पूर्व एशिया से होता है। ये अपराध अधिक जटिल और बड़े हो गए हैं। इससे पीड़ितों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। ये हैकर्स जिस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं उसे नष्ट करने के लिए I4C ने कई कदम उठाए हैं। I4C की जांच में पता चला है कि सायबर क्रिमिनल अपने जाल में फंसाने के लिए लोगों को निवेश के मौकों, गेम्स, डेटिंग ऐप्स. क्रिप्टोकरेंसी और जाली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स की पेशकश करते हैं। ये लोगों को अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं। 
 

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