ऐसा संभव हुआ, तो मंगल ग्रह से जुड़ी खोज में काफी तेजी आएगी।
साइंटिस्ट एक लेजर-थर्मल प्रपल्शन सिस्टम की क्षमता का आकलन कर रहे हैं। इसी की बदौलत इतने कम वक्त में मंगल पर पहुंचने की उम्मीद जगी है।
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